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अपराध नोएडा

50 का टिकट और 12 लाख का झांसा, नोएडा में बैठकर दक्षिण भारत को लूटने वाले 10 ठग गिरफ्तार।


अरविन्द उत्तम की रिपोर्ट 
नोएडा की थाना फेस-3 पुलिस और साइबर सेल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक ऐसे शातिर गैंग को दबोचा है, जो सोशल मीडिया के ज़रिए लोगों को करोड़पति बनाने का झांसा देकर खुद करोड़ों की ठगी कर रहा था। पुलिस ने नोएडा के सेक्टर-121 से इस गिरोह के 10 सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनके निशाने पर मुख्य रूप से दक्षिण भारत के राज्य थे।
साइबर ठगों की पहचान एलन एंटनी, अंकित कुमार, राहुल, शकील, राजशेखर, गुरु प्रसाद, विनय डीपी, विनोद कुमार, संतोष और चेतन के रूप में हुई है। इनमें से 8 आरोपी कर्नाटक के और 2 बिहार के रहने वाले हैं। एडिशनल डीसीपी सेंट्रल नोएडा ने बताया कि पिछले दो महीनों से संदिग्ध मोबाइल नंबरों, आईएमईआई और बैंक खातों के संबंध में लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इनमें से करीब 18 शिकायतें कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में दर्ज थीं। जब नोएडा पुलिस और साइबर सेल ने इन कड़ियों को जोड़ना शुरू किया, तो इस अंतर्राज्यीय गिरोह का सच सामने आया।
एडिशनल डीसीपी सेंट्रल ने बताया कि पूछताछ में जो खुलासा हुआ है, कि  यह गैंग फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फर्जी लॉटरी के लुभावने विज्ञापन पोस्ट करता था। जब कोई इनके झांसे में आकर संपर्क करता, तो उसे महज 50 में एक फर्जी लॉटरी टिकट व्हाट्सएप पर भेज दिया जाता था। इसके बाद शुरू होता था असली खेल। पीड़ित को फोन करके यह बधाई दी जाती थी कि उसने 12 लाख की बंपर लॉटरी जीत ली है। इस बड़ी रकम को पाने के लालच में लोग इनके जाल में फंस जाते थे। फिर यह गैंग टीडीएस, जीएसटी, एनओसी, इनकम टैक्स क्लीयरेंस और आरबीआई अप्रूवल के नाम पर अलग-अलग किस्तों में पैसे अपने फर्जी खातों में ट्रांसफर करवा लेता था।यह गिरोह दक्षिण भारत के लोगों को ही अपना शिकार बनाते थे। चूंकि गिरोह के अधिकांश सदस्य कर्नाटक से थे, इसलिए वे पीड़ितों से उनकी स्थानीय भाषा में बात करते थे ताकि किसी को शक न हो। विश्वास जीतने के लिए ये लोग रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और इनकम टैक्स विभाग के फर्जी सर्टिफिकेट तक बनाकर व्हाट्सएप पर भेज देते थे। पकड़े जाने से बचने के लिए ये आरोपी नोएडा में बैठकर अपना नेटवर्क चलाते थे। इनका मानना था कि पीड़ित दूर दराज के राज्यों में हैं, इसलिए पुलिस उन तक आसानी से नहीं पहुंच पाएगी। ठगी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सिम कार्ड और बैंक खाते इन्हें एक अन्य व्यक्ति द्वारा उपलब्ध कराए जाते थे, और काम पूरा होते ही ये सिम कार्ड और मोबाइल बदल देते थे। इनके पास से घटना में प्रयुक्त 20 मोबाइल फोन और डेबिट कार्ड बरामद हुए हैं।

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