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दिल्ली राजनीतिक राष्ट्रीय हाइलाइट्स

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से की मुलाकात, कहा- मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज करना गैरकानूनी


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
नई दिल्ली:मध्य प्रदेश में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन को निर्वाचन अधिकारी द्वारा खारिज किए जाने के फैसले के खिलाफ कांग्रेस का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल बुधवार को केंद्रीय चुनाव आयोग पहुंचा। कांग्रेस नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों से मुलाकात कर इस निर्णय को पूरी तरह गैर-कानूनी व लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ बताया और तथ्यों पर आधारित विस्तृत ज्ञापन सौंपा।प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, वरिष्ठ अधिवक्ता और सांसद डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश, कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला, दीपा दासमुंशी, स्वयं मीनाक्षी नटराजन, विवेक तन्खा, मोहम्मद अली खान और उमर होदा शामिल थे।
मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में कांग्रेस के कानून, आरटीआई और मानवाधिकार विभाग के अध्यक्ष डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने निर्वाचन अधिकारी के फैसले पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पूरी तरह विकृत और कानूनी रूप से गलत है, जिसका किसी भी आधार पर समर्थन नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि निर्वाचन अधिकारी ने जिस आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज किया है, उसका कानून में कोई अस्तित्व ही नहीं है। उनके खिलाफ ऐसा कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं था, जिसका खुलासा कानूनन नामांकन पत्र में करना आवश्यक होता।वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि कोर्ट से मीनाक्षी नटराजन को केवल एक नोटिस आया था, जिसमें उनसे यह पूछा गया था कि अदालत इस मामले का संज्ञान ले या नहीं। उन्होंने कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेना एक बेहद प्राथमिक चरण होता है, जिससे यह तय होता है कि मामला आगे चलेगा या नहीं। जब तक अदालत संज्ञान नहीं लेती, तब तक कोई भी आपराधिक मामला शुरू ही नहीं होता। उन्होंने बताया कि इस मामले में मजिस्ट्रेट ने अभी संज्ञान तक नहीं लिया है। नटराजन का पक्ष सुनने के बाद वह संज्ञान लेंगे। इसके बाद जांच होगी, चार्जशीट होगी और फिर जाकर आरोप तय होंगे।उन्होंने आगे कहा कि मजिस्ट्रेट ने संज्ञान तक नहीं लिया है, लेकिन निर्वाचन अधिकारी ने यह मान लिया कि नटराजन के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित है।उन्होंने आगे बताया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33ए के अनुसार उम्मीदवार को केवल उन मामलों का खुलासा करना होता है, जिनमें अपराध सिद्ध होने पर दो साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो और जिनमें आरोप तय किए जा चुके हों।उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे नामांकन खारिज करना लोकतंत्र और चुनाव में समान अवसर के सिद्धांत के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यह संविधान के मूल ढांचे की भावना को भी आघात पहुंचाता है।कांग्रेस नेता ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग को याद दिलाया कि उसके पास निर्वाचन अधिकारी के फैसले को पलटने या उसे निरस्त करने का पूरा अधिकार क्षेत्र है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि आयोग पहले भी हरियाणा और गुजरात के ऐसे मामलों में हस्तक्षेप कर चुका है, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि इस मामले में चुनाव आयोग असहाय या अधिकारविहीन है।

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