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हरियाणा पुलिस का नया ‘क्राइम इंटेलिजेंस मॉडल’: पिछले 10 वर्षों में जघन्य अपराधों में संलिप्त अपराधियों की डिजिटल निगरानी।


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
चंडीगढ़: अपराध और अपराधियों के खिलाफ अपनी रणनीति को और अधिक वैज्ञानिक, तकनीक आधारित तथा प्रभावी बनाते हुए हरियाणा पुलिस ने एक नई पहल शुरू की है। राज्य के अपराध की दृष्टि से संवेदन शील जिलों रोहतक, झज्जर, सोनीपत और फरीदाबाद के लिए गठित विशेष रोहतक-झज्जर-सोनीपत-फरीदाबाद (आरजेएसएफ) यूनिटे पिछले दस वर्षों में जघन्य अपराधों में शामिल अपराधियों का विस्तृत डाटाबेस तैयार कर उनकी निरंतर निगरानी कर रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य संगठित अपराध को जड़ से खत्म करना, अपराधियों की गतिविधियों पर समय रहते नजर रखना तथा संभावित अपराधों को घटित होने से पहले रोकना है। इस पहल पर विचार विमर्श हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान किया गया। यह बैठक पंचकूला सेक्टर-6 में आयोजित की गई जिसमें पुलिस मुख्यालय की वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस आयुक्त, पुलिस अधीक्षक तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक के दौरान रोहतक रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सिमरदीप सिंह ने आरजेएसएफ यूनिट की कार्यप्रणाली और उपलब्धियों पर प्रेजेंटेशन दी। उन्होंने बताया कि पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल के निर्देशानुसार इस यूनिट की शुरुआत सबसे पहले रोहतक जिले में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की गई थी। प्रारंभिक चरण में प्राप्त उल्लेखनीय परिणामों के बाद इस मॉडल को झज्जर, सोनीपत और फरीदाबाद जिलों में भी लागू किया गया। अब यह यूनिट चार जिलों में अपराध नियंत्रण और अपराधियों की निगरानी के लिए एक विशेष इंटेलिजेंस आधारित तंत्र के रूप में कार्य कर रही है। इसे भविष्य में अन्य जिलों में भी लागू करने की योजना है।आरजेएसएफ यूनिट ने पिछले दस वर्षों के दौरान हत्या, हत्या के प्रयास तथा अन्य गंभीर अपराधों में शामिल 10,892 अपराधियों का विस्तृत डाटाबेस तैयार किया है। इस डाटाबेस में प्रत्येक अपराधी का आपराधिक इतिहास, गतिविधियां, संपर्क, सामाजिक पृष्ठभूमि तथा वर्तमान स्थिति का विस्तृत विवरण सहित कई अन्य तथ्य शामिल किये गए हैं। यूनिट द्वारा इन अपराधियों का केवल रिकॉर्ड तैयार नहीं किया गया, बल्कि उन्हें विभिन्न श्रेणियों में बांटते हुए उनके जोखिम स्तर का भी आकलन किया गया है। इससे पुलिस को यह समझने में मदद मिल रही है कि कौन से अपराधी दोबारा अपराध कर सकते हैं और किन व्यक्तियों के संगठित आपराधिक गिरोहों के संपर्क में आने की संभावना अधिक है।आरजेएसएफ यूनिट की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह केवल वर्तमान अपराधियों पर ही नहीं, बल्कि उन व्यक्तियों पर भी नजर रख रही है जिन्हें संगठित आपराधिक गिरोह अपने नेटवर्क में शामिल करने का प्रयास कर सकते हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार गैंगस्टर गिरोह छोटे अपराधियों, जमानत पर बाहर आए आरोपियों या आपराधिक प्रवृत्ति के युवाओं को अपने नेटवर्क में शामिल करने की कोशिश करते रहते हैं। यूनिट ऐसे व्यक्तियों की पहचान कर उनकी गतिविधियों का विश्लेषण कर रही है ताकि उन्हें अपराध की दुनिया में और अधिक सक्रिय होने से पहले चिन्हित किया जा सके। इस रणनीति का उद्देश्य अपराध होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय अपराध की संभावना को पहले ही समाप्त करना आरजेएसएफ यूनिट अपराधियों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक, मानव स्रोतों और फील्ड इंटेलिजेंस का समन्वित उपयोग कर रही है। प्रत्येक क्षेत्र में विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो अपराधियों के वर्तमान पते, सामाजिक गतिविधियों, संपर्कों और आपराधिक नेटवर्क की जानकारी एकत्र करती हैं। तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से अपराधियों के व्यवहार में आने वाले बदलावों का अध्ययन किया जाता है। अपराधियों से संबंधित प्रत्येक तथ्य का सूक्ष्म विश्लेषण किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप कई महत्वपूर्ण मामलों को सुलझाने में सफलता भी मिली है।पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कहा कि अपराधी किसी एक जिले तक सीमित नहीं रहते। इसलिए आरजेएसएफ यूनिट द्वारा की गई कार्यवाही भविष्य में राज्य के अन्य जिलों के साथ भी साझा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी अपराधी की गतिविधियों की जानकारी पहले से उपलब्ध होगी तो पुलिस समय रहते आवश्यक कदम उठा सकेगी। इससे अपराध की रोकथाम, निगरानी तथा अंतर-जिला समन्वय को और अधिक मजबूती मिलेगी। बैठक में हरियाणा स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की उपलब्धियों की भी समीक्षा की गई। STF के पुलिस अधीक्षक वसीम अकरम ने बताया कि गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत वर्ष 2024 में 323, वर्ष 2025 में 470 तथा वर्ष 2026 में 28 मई तक 148 गैंग सदस्यों एवं अपराधियों को एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार किया गया।इस प्रकार पिछले तीन वर्षों में STF ने कुल 941 गैंग सदस्यों को गिरफ्तार कर संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है।हरियाणा STF ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय गैंगस्टरों के खिलाफ भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। STF के गठन के बाद से अब तक 22 वांछित गैंगस्टरों को दूसरे देशों से डिपोर्ट अथवा प्रत्यर्पित कर भारत वापस लाया जा चुका है। विशेष रूप से वर्ष 2026 में अब तक 9 गैंगस्टरों की भारत में वापस लाना सुनिश्चित किया गया है, जो इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। हरियाणा पुलिस के प्रयासों के परिणामस्वरूप 14 अन्य गैंगस्टरों को विभिन्न देशों में हिरासत में लिया जा चुका है तथा उनकी भारत लाने के लिए कानूनी, राजनयिक तथा प्रशासनिक प्रक्रियाएं जारी हैं। बैठक को संबोधित करते हुए पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कहा कि बदलते अपराध स्वरूप और संगठित आपराधिक गिरोहों की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए पुलिस को पारंपरिक पुलिसिंग से आगे बढ़कर इंटेलिजेंस आधारित और डेटा संचालित रणनीति अपनानी होगी। उन्होंने कहा कि अपराधियों का विस्तृत डाटाबेस तैयार कर उनकी निरंतर निगरानी करना अपराध नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. सिंघल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जघन्य अपराधों में संलिप्त व्यक्तियों, सक्रिय गैंग सदस्यों तथा उनके सहयोगियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाए और जिलों के बीच सूचनाओं का प्रभावी आदान-प्रदान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अपराध की संभावनाओं को पहले ही समाप्त करना है। संगठित अपराध, गैंगस्टर नेटवर्क और कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त एवं समन्वित कार्रवाई जारी रखी जाएगी।

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