
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को संसद में सवाल उठाया कि मोदी सरकार सदन में एलपीजी संकट पर चर्चा क्यों नहीं होने दे रही है। मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि सत्ता पक्ष जब चाहे बिल लाता है, जब चाहे चर्चा के लिए तैयार होता है और जब चाहे तब बयान देता है। खरगे ने बताया कि उन्होंने नियम 176 के तहत एलपीजी संकट पर अल्पकालिक चर्चा की मांग करते हुए एक नहीं, बल्कि दो बार पत्र लिखा, लेकिन इस पर चर्चा के लिए सरकार के पास समय नहीं है।

खरगे ने कहा कि पूरी दुनिया में एलपीजी व गैस जैसी आवश्यक वस्तुओं को लेकर संकट है और भारत में भी लगातार कीमतें बढ़ रही हैं, फिर भी सरकार इस मुद्दे पर चर्चा क्यों नहीं करा रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के सुझावों को सरकार खारिज कर देती है और जो वह चाहती है, उसे ही पेश करती है और जबरदस्ती ध्वनि मत के जरिए वह पारित घोषित कर दिया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यही लोकतंत्र है?कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि सदन में नए अध्यक्ष के आने के बाद विपक्ष को न्याय मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समय की कमी कोई मुद्दा नहीं है; जो भी मामला उठाया जाता है, उसे चर्चा के लिए पूरा समय दिया जाना चाहिए।

खरगे ने पश्चिम एशिया संकट पर हुई सर्वदलीय बैठक में नेता प्रतिपक्ष के शामिल न होने को लेकर सत्ता पक्ष के आरोपों पर भी करारा पलटवार किया। उन्होंने पूछा कि उस बैठक में प्रधानमंत्री कहां थे? उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष ने अपना प्रतिनिधि भेजा था। अगर प्रधानमंत्री बैठक में मौजूद नहीं थे, तो क्या नेता प्रतिपक्ष से यह उम्मीद की जाती है कि वह अधिकार-विहीन अन्य मंत्रियों का भाषण सुनने के लिए वहां जाएं।
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