
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने केरलम में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मंगलवार को कहा कि लेफ्ट फ्रंट (सीपीएम) अब विचारधारा छोड़कर कॉर्पोरेट पार्टी बन चुकी है और केरलम में पहली बार भाजपा व लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के बीच एक साझेदारी देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि आम तौर पर ऐसी उम्मीद नहीं की जाती कि धुर दक्षिणपंथी भाजपा और वामपंथी दल एक साथ आ जाएं, क्योंकि उनकी विचारधाराएं एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत हैं। केरलम के कन्नूर, कल्लाची और पेरम्बरा में विशाल जनसभाओं को संबोधित करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने आक्रामक अंदाज में दोनों दलों के बीच मिलीभगत के सबूत देते हुए कहा कि लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की मुख्य पार्टी सीपीएम के नेताओं ने सबरीमाला मंदिर से सोना चुराकर उसे पीतल से बदल दिया, लेकिन केंद्रीय एजेंसियों ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। हिंदुत्व के तथाकथित रक्षक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरलम आकर इस पर एक शब्द नहीं बोला, क्योंकि वे चाहते हैं कि राज्य में एलडीएफ चुनाव जीते।

मिलीभगत का एक अन्य प्रमाण देते हुए राहुल गांधी ने बताया कि भाजपा-आरएसएस का विरोध करने वाले विपक्षी नेताओं पर सत्ता पक्ष द्वारा बेरहमी से हमला किया जाता है, लेकिन भ्रष्टाचार को लेकर केरलम के मुख्यमंत्री पर कोई कार्रवाई नहीं होती और उनके बच्चों से भी पूछताछ नहीं होती। उन्होंने कहा कि भाजपा चाहती है कि सीपीएम सत्ता में रहे क्योंकि वह उसे नियंत्रित कर सकती है, जबकि यूडीएफ और कांग्रेस को नियंत्रित नहीं किया जा सकता। मोदी जानते हैं कि पूरे देश में सिर्फ कांग्रेस ही उन्हें चुनौती दे सकती है; सीपीएम राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें कभी चुनौती नहीं दे सकती।

विशाल जनसमूह के बीच राहुल गांधी ने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को लेकर भी प्रधानमंत्री मोदी को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ व्यापार समझौता कर भारत का भविष्य अमेरिका को सौंप दिया है। उन्होंने कहा कि एपस्टीन फाइलों और अडानी समूह पर अमेरिका में चल रहे केस के दबाव में नरेंद्र मोदी ने यह समझौता किया है। उन्होंने बताया कि लगभग 35 लाख एपस्टीन फाइल अभी जारी नहीं की गई हैं, अमेरिका उन्हें सार्वजनिक करने और मोदी की छवि ध्वस्त करने की धमकी दे रहा है। उन्होंने आगे कहा कि डोनाल्ड ट्रंप इस बात को भी भली-भांति समझते हैं कि अडानी ही भाजपा की वित्तीय संरचना है। यही कारण है कि उन्होंने अमेरिका में अडानी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दायर किया है; लेकिन यह मुकदमा अडानी नहीं, मोदी और भाजपा को निशाना बनाने के लिए दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा, यही वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप भारत के प्रधानमंत्री के बारे में अपमानजनक बातें कहते हैं कि जब भी वे चाहें, वह नरेंद्र मोदी को तबाह कर सकते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि जब उन्होंने संसद में ये मुद्दे उठाए, तो उन्हें चार घंटे तक बोलने नहीं दिया गया और अंततः प्रधानमंत्री वहां से भाग खड़े हुए। उन्होंने कहा कि अमेरिकी खेती के लिए भारतीय बाजार खोलने से भारत के रबर, मक्का, फल और सोयाबीन किसान बर्बाद हो जाएंगे। इसके अतिरिक्त मोदी सरकार द्वारा हर साल नौ लाख करोड़ रुपये के अमेरिकी उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता से भारत के छोटे व मध्यम उद्योग खत्म हो जाएंगे। देश की ऊर्जा संप्रभुता अमेरिका के हवाले किए जाने पर भी हमला बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत को तेल खरीदने के लिए अमेरिका से अनुमति लेनी पड़ती है और मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध के कारण आने वाले दिनों में इस फैसले के नतीजे देशवासियों को भुगतने पड़ेंगे। राहुल ने जोर देकर कहा कि जिस तरह डोनाल्ड ट्रंप मोदी को नियंत्रित करते हैं, उसी तरह प्रधानमंत्री केरलम के मुख्यमंत्री को नियंत्रित करते हैं। मुख्यमंत्री जानते हैं कि उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने की चाबी मोदी के पास है,इसीलिए वे उनके खिलाफ कभी कुछ नहीं बोलते।कांग्रेस नेता ने यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की गारंटियां भी गिनाईं और जनता से यूडीएफ उम्मीदवारों को वोट देने की अपील की। इस अवसर पर कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, के सुधाकरन आदि वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
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