
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़:हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने अंबाला निवासी श्रीमती सुरजीत कौर के नए प्रॉपर्टी आईडी जारी करने संबंधी प्रकरण में सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने मामले की समीक्षा के दौरान प्रशासनिक प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाने पर बल दिया।आयोग के संज्ञान में आया कि शिकायतकर्ता की अपीलें प्रथम अपीलीय प्राधिकारी (एफजीआरए) स्तर पर निरस्त कर दी गई थीं।

तत्पश्चात आयोग द्वारा 09.02.2026 को पारित अंतरिम आदेश के बाद संबंधित संपत्ति को अधिकृत श्रेणी में दर्शाया गया।पूर्व में 04.02.2026 को नगर निगम द्वारा प्रस्तुत उत्तर में प्लॉट को अधिकृत नहीं बताया गया था।

हालांकि, आयोग द्वारा विस्तृत तथ्यों की मांग किए जाने के उपरांत यह स्पष्ट किया गया कि संपत्ति गांव की सीमा एवं अधिकृत क्षेत्र की सीमा पर स्थित है।आयोग ने अपने अवलोकन में यह भी उल्लेख किया कि हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम, 2014 के अंतर्गत एफजीआरए एवं एसजीआरए को अपीलों के निस्तारण हेतु 30 कार्य दिवस का समय निर्धारित है।

आयोग ने सुझाव दिया कि नागरिकों की शिकायतों का समाधान यथासंभव प्रारंभिक स्तर पर ही सुनिश्चित किया जाए, ताकि उन्हें उच्च स्तर तक जाने की आवश्यकता न पड़े।आयोग ने 09.10.2025 को अपील निरस्त करने वाले तत्कालीन एफजीआरए तथा 01.12.2025 को अपील निरस्त करने वाले अधिकारी को हरियाणा सेवा का अधिकार (प्रबंधन) विनियम, 2015 के विनियम 10 के अंतर्गत कारण बताओ नोटिस जारी किया है।दोनों अधिकारियों से अधिनियम की धारा 17(1)(डी) के तहत स्पष्टीकरण मांगा गया है कि राज्य सरकार को विभागीय कार्रवाई की संस्तुति क्यों न की जाए।

आयोग ने शिकायतकर्ता को हुई असुविधा को ध्यान में रखते हुए अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार 5,000 रुपये का मुआवजा प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। यह राशि प्रारंभिक रूप से नगर निगम अंबाला के कोष से अदा की जाएगी, जिसे नियमानुसार संबंधित अधिकारियों से वसूल किया जा सकेगा।आयोग ने निर्देश दिया है कि यदि 13.03.2026 तक मुआवजा अदा नहीं किया जाता है, तो अधिनियम की धारा 17(2) के तहत आगे की कार्यवाही की जाएगी तथा आवश्यकता नुसार अतिरिक्त दंड एवं मुआवजा भी निर्धारित किया जा सकता है।

साथ ही, आयुक्त, नगर निगम अंबाला को 16.03.2026 तक अनुपालना रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित तत्कालीन एफजीआरए को भी आदेश की प्रति प्रेषित कर 09.03.2026 तक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा गया है।उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि नागरिक सेवाओं में लापरवाही या अनावश्यक विलंब करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्यवाही की जा रही है और भविष्य में भी की जाती रहेगी।आयोग ने दोहराया कि राज्य सरकार की मंशा नागरिक सेवाओं को समयबद्ध, पारदर्शी एवं प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराने की है, और सभी अधिकारी उसी भावना के अनुरूप कार्य करें।
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