Athrav – Online News Portal
चंडीगढ़ हरियाणा

चंडीगढ़ ब्रेकिंग:हरियाणा में लंबित म्यूटेशन निपटाने के लिए ‘जलसा-ए-आम’ अभियान शुरू।


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
चंडीगढ़:जन सुविधाओं को सुदृढ़ करने और नागरिक-केंद्रित शासन को मजबूती देने की दिशा में हरियाणा सरकार ने समयबद्ध राज्यव्यापी अभियान ‘जलसा-ए-आम’ शुरू किया है। इसके तहत सभी लंबित म्यूटेशन मामलों का निपटान किया जाएगा। साथ ही एग्रीस्टैक के क्रियान्वयन, डिजिटल राजस्व सुधारों, भूमि विभाजन मामलों के निस्तारण, अंतर-राज्य सीमा चिह्नांकन तथा व्यापक शीतलहर तैयारियों को गति दी जाएगी।इन उपायों की समीक्षा एवं घोषणा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने आज यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपायुक्तों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में की।जलसा-ए-आम अभियान जनवरी माह के शनिवारों  10, 17, 24 और 31 जनवरी को आयोजित किया जाएगा, ताकि म्यूटेशन मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके। डॉ. मिश्रा ने अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए, ताकि अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित हो सके। वर्तमान में राज्य में 143 तहसीलों और 7,104 गांवों में 1,89,635 म्यूटेशन आवेदन प्रक्रियाधीन हैं।

उपायुक्तों को 10 दिनों से अधिक समय से लंबित 50,794 मामलों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं, जिनमें फरीदाबाद, पलवल और अंबाला पर विशेष फोकस रहेगा। जनता की असुविधा को कम करने के लिए राज्य ऑटो-म्यूटेशन की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसके लिए मौजूदा बैकलॉग का प्राथमिकता से निपटान आवश्यक है।भूमि विभाजन के लंबे समय से लंबित मामलों पर जोर देते हुए डॉ. मिश्रा ने पंजाब भूमि राजस्व अधिनियम की प्रतिस्थापित धारा 111ए के सख्त अनुपालन के निर्देश दिए, जो त्वरित निस्तारण का प्रावधान करती है। निस्तारण में तेजी लाने के लिए प्रत्येक सहायक कलेक्टर (द्वितीय श्रेणी) को प्रति माह न्यूनतम 12 विभाजन मामलों का निपटान करने का लक्ष्य दिया गया है, जबकि कम कार्यभार वाले तहसीलदारों को प्रति माह 20 मामलों का लक्ष्य सौंपा गया है।जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए डॉ. मिश्रा ने त्रि-स्तरीय निगरानी तंत्र स्थापित करने के निर्देश दिए, जिसके तहत जिला, मंडल और राज्य स्तर पर मासिक समीक्षा की जाएगी।

उन्होंने वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) तंत्र शुरू करने के भी निर्देश दिए, जिसके अंतर्गत सेवानिवृत्त राजस्व अधिकारियों को अनुबंध के आधार पर गांव-स्तरीय शिविरों में सहमति-आधारित समाधान हेतु नियुक्त किया जाएगा। प्रत्येक सफलतापूर्वक सुलझे मामले पर 10,000 रुपये का मानदेय स्वीकृत किया गया है, जिसे विवादित पक्षकारों द्वारा समान रूप से साझा किया जाएगा। उपायुक्तों को अधिक संख्या में लंबित राजस्व मामलों वाले गांवों में ADR शिविर आयोजित करने हेतु सेवानिवृत्त राजस्व अधिकारियों को पैनल में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। डिजिटल राजस्व प्रशासन की प्रगति की समीक्षा करते हुए डॉ. मिश्रा ने बताया कि हरियाणा में 60 लाख से अधिक भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। पेपरलेस रजिस्ट्रेशन प्रणाली के शुभारंभ के बाद से 83,379 संपत्ति विलेख पेपरलेस मोड में पंजीकृत किए जा चुके हैं। कुल 1,17,931 विलेखों में से 90,711 को स्वीकृति मिली है, जो 76.9 प्रतिशत की स्वीकृति दर दर्शाता है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन पंजीकरण मामलों को दो से अधिक बार वापस किया गया हो, उन्हें समयबद्ध समाधान के लिए स्वतः वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा जाए। 5 जनवरी, 2026 तक 6,351 जियो-रेफरेंस्ड गांवों में 60.43 लाख ततिमा रिकॉर्ड पूरे किए जा चुके हैं। महेंद्रगढ़ जिले में 99.7 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि भिवानी और जींद जिलों में क्रमशः 3.82 लाख और 4.28 लाख रिकॉर्ड पूरे किए जा चुके हैं। शेष जिलों को 31 जनवरी 2026 तक कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। एग्रीस्टैक के तहत 98 लाख से अधिक किसानों के लिए डेटा बकेट तैयार किए जा चुके हैं, जिनमें से 5.12 लाख नामांकन पूरे हो चुके हैं। डॉ. मिश्रा ने निर्देश दिए कि एग्रीस्टैक शिविरों में भूमि स्वामियों की PPP-ID और आधार सीडिंग एक साथ की जाए और इसे एक माह के भीतर पूर्ण किया जाए। पीएम-किसान लाभार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्हें कृषि विभाग द्वारा भेजे जाने वाले एसएमएस अलर्ट के माध्यम से जुटाया जाएगा।उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि कृषि, राजस्व और CRID विभागों के अधिकारी फील्ड-स्तरीय शिविरों में एक साझा मंच पर कार्य करें, ताकि आधार-PPP सीडिंग और राजस्व अभिलेखों का अद्यतन निर्बाध रूप से हो सके। डॉ. मिश्रा ने लंबित अनुशासनात्मक कार्यवाहियों के शीघ्र निस्तारण तथा राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के तहत मध्यस्थता मामलों में न्यायालय-निर्देशित समय-सीमाओं के कड़ाई से पालन पर भी जोर दिया। हरियाणा–उत्तर प्रदेश सीमा पर 1,221 में से 535 सीमा स्तंभ अब तक स्थापित किए जा चुके हैं। सोनीपत जिले में 74.6 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है, इसके बाद पलवल और करनाल जिले हैं। शेष कार्य 18 फरवरी 2026 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। डॉ. मिश्रा ने बताया कि राज्य में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के दिशानिर्देशों के अनुरूप कोल्ड वेव एक्शन प्लान लागू किया गया है। चिकित्सा सामग्री और गर्म कपड़ों से सुसज्जित जिला-स्तरीय आपात प्रतिक्रिया टीमें सक्रिय कर दी गई हैं, जो 24 घंटे के भीतर प्रतिक्रिया देंगी।उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे विशेषकर अकेले रहने वाले बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों वाले परिवारों जैसे संवेदनशील पड़ोसियों का ध्यान रखें। सामुदायिक केंद्रों, ग्राम पंचायतों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों से हाइपोथर्मिया और फ्रॉस्टबाइट के शुरुआती लक्षणों की पहचान पर जागरूकता शिविर आयोजित करने का आग्रह किया गया है। उन्होंने अत्यधिक ठंड के कारण किसी भी संकटग्रस्त व्यक्ति की सूचना आपात हेल्पलाइन 112 पर देने की अपील की। 

Related posts

इतना बड़ा बवाल केवल एक दिन में नहीं हो सकता, इसके लिए किसी न किसी ने लोगों एवं हथियारों को इकट्‌ठा कर प्लानिंग की-विज

Ajit Sinha

चंडीगढ़ ब्रेकिंग: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नायब सैनी ने प्रदेश चुनाव समिति की घोषणा की हैं -लिस्ट पढ़े।

Ajit Sinha

सीएम ने कर्मचारियों, पेंशनभोगियों को परेशानी-मुक्त सेवाएं मुहैया करवाने हेतु तीन निजी अस्पतालों को पैनल में शामिल करने की स्वीकृति प्रदान की।

Ajit Sinha
5 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
error: Content is protected !!
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x