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अपराध पंचकूला फरीदाबाद

फरीदाबाद के 2 सीरियल जमानती पंचकूला कोर्ट में झूठा शपथ पत्र देने के मामले में गिरफ्तार।


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
पंचकूला: अदालत को झूठा शपथ पत्र देकर गुमराह करने जैसे गंभीर अपराध में डीसीपी सृष्टि गुप्ता के नेतृत्व में पंचकूला पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो युवकों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। अदालत के आदेश पर यह कार्रवाई सेक्टर-1 पुलिस चौकी की टीम द्वारा की गई, जिसमें चौकी इंचार्ज सब-इंस्पेक्टर राम मेहर सिंह, एएसआई अरविंद एवं एएसआई राजीव शामिल रहे। मामले की शुरुआत तब हुई जब  न्यायाधीश मनमीत कौर घुम्मन की अदालत में चेक बाउंस के दो अलग-अलग मामलों में आरोपित सीतराम मिश्रा की जमानत के लिए सोहेल खान पुत्र अब्दुल खान और जितेन्द्र पुत्र संतराम, दोनों निवासी दयाल नगर, जिला फरीदाबाद, बतौर जमानती पेश हुए। अदालत की कार्रवाई  के दौरान जब दोनों से पूछा गया कि क्या वे पहले कभी किसी अदालत में जमानती के तौर पर पेश हुए हैं, तो दोनों ने स्पष्ट शब्दों में ‘नहीं’ कहा। न्यायाधीश द्वारा बार-बार पूछे जाने के बावजूद उन्होंने इस तथ्य से इनकार किया।

अदालत को उनके उत्तर पर संदेह हुआ, जिसके बाद विस्तृत जांच करवाई गई। जांच में सामने आया कि सोहेल खान इससे पहले फरीदाबाद और गुरुग्राम की विभिन्न अदालतों में कुल 9 बार अलग-अलग मामलों में बतौर जमानती पेश हो चुका है। वहीं, जितेन्द्र भी पूर्व में 3 बार बतौर जमानती विभिन्न मामलों में अदालत में पेश हुआ था। इस खुलासे ने स्पष्ट कर दिया कि दोनों ने जानबूझकर अदालत को झूठी जानकारी दी और तथ्यों को छुपाया।इस गंभीर लापरवाही और अदालत को गुमराह करने के कृत्य पर अदालत ने तुरंत संज्ञान लेते हुए पुलिस को कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद सेक्टर-7 थाने में दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और सेक्टर-1 पुलिस चौकी की टीम ने 11 अगस्त को दोनों आरोपितों  को गिरफ्तार कर लिया। आज, 12 अगस्त को उन्हें अदालत के आदेशानुसार न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

डीसीपी पंचकूला सृष्टि गुप्ता ने मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा, “किसी भी व्यक्ति को, जब तक आरोपित  बरी न हो जाए, किसी अन्य मामले में जमानती के रूप में अदालत में पेश होने की अनुमति नहीं है। अदालत में झूठी जानकारी देना, तथ्य छुपाना या गलत तथ्य पेश करना न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर बाधा उत्पन्न करता है। यह एक दंडनीय अपराध है जिसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। आमजन से अपील है कि अदालत एवं पुलिस की कानूनी कार्रवाई  में सहयोग करें और सत्य तथ्यों को ही प्रस्तुत करें।”

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