
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
फरीदाबाद: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि महिला जनप्रतिनिधि बदलाव की केवल साक्षी नहीं, बल्कि बदलाव की शिल्पकार हैं। महिलाएं जब निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी करती हैं तो उनकी आवाज के साथ परिवार, समाज और राष्ट्र की आकांक्षाएं भी निर्णय के केंद्र तक पहुंचती हैं। महिला जनप्रतिनिधियों की सक्रिय और प्रभावी भागीदारी लोकतंत्र को अधिक संवेदनशील, समावेशी और जवाबदेह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मंगलवार को फरीदाबाद स्थित सूरजकुंड में राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘She Is A Change Maker’ कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर बल्लभगढ़ विधायक मूलचंद शर्मा, बड़खल विधायक धनेश अदलखा, नगर निगम महापौर प्रवीण बत्रा जोशी, हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन श्रीमती उषा प्रियदर्शिनी, ओडिशा विधानसभा की स्पीकर सुरमा पाढ़ी भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार राजीव जेटली मौजूद रहे। इस अवसर पर पुलिस आयुक्त सतेंद्र कुमार गुप्ता, उपायुक्त आयुष सिन्हा, नगर निगम कमिश्नर यशेंद्र सिंह, एडीसी अंजली श्रोत्रिय, सीईओ जिला परिषद शिखा, नगर निगम ज्वाइंट कमिश्नर गौरव अंतिल, एवं विभिन्न राज्यों से आई महिला विधायक और जनप्रतिनिधि सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति एवं अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यशाला में 20 राज्यों तथा 2 केंद्र शासित प्रदेशों की महिला विधायक एवं विधान परिषद सदस्य शामिल हुईं। इस दौरान विभिन्न विषयों पर विचार-मंथन, नवाचार, विधायी कार्यप्रणाली, नेतृत्व, संवाद, नीति निर्माण और जनप्रतिनिधियों की प्रभावी भूमिका से जुड़े विभिन्न सत्र आयोजित किए गए।मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजय राहटकर तथा आयोग की पूरी टीम का विशेष रूप से आभार व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि महिला जनप्रतिनिधियों के विधायी ज्ञान, नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल और नीति निर्माण में प्रभावी भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में आयोग का यह प्रयास सराहनीय है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला की थीम अपने आप में एक शक्ति शाली संदेश देती है। यह केवल एक शीर्षक नहीं, बल्कि एक विचार और संकल्प है कि महिलाएं बदलाव की साक्षी नहीं, बल्कि उसकी शिल्पकार हैं। उन्होंने कहा कि महिला जनप्रतिनिधि केवल अपने निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं, बल्कि वे समाज को दिशा देने वाली शक्ति, लोकतंत्र को संवेदनशील बनाने वाली आवाज और देश के भविष्य को आकार देने वाली नेतृत्व क्षमता का प्रतिनिधित्व करती हैं।मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने देश के विभिन्न राज्यों से आई महिला विधायकों का हरियाणा की ऐतिहासिक एवं पवित्र भूमि पर स्वागत और अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि यह वही भूमि है, जहां से भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की पवित्र धरती पर मानव समाज को कर्म, ज्ञान और कर्तव्य का संदेश दिया। हरियाणा की इस ऐतिहासिक भूमि पर देश के विभिन्न राज्यों की महिला जन प्रतिनिधियों का एक साथ आना भारत की लोकतांत्रिक विविधता, नारी शक्ति और राष्ट्र निर्माण के सामूहिक संकल्प का जीवंत संगम है। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों में विभिन्न राज्यों से आई महिला जनप्रतिनिधियों ने अपने अनुभव, विचार और कार्यप्रणालियां साझा की हैं। अलग-अलग राज्यों में किए जा रहे सफल नवाचार दूसरे राज्यों के लिए प्रेरणा बन सकते हैं। अच्छी कार्यप्रणाली किसी सीमा में बंधी नहीं रहती, बल्कि एक-दूसरे से सीखने के माध्यम से सुशासन को मजबूत करती है।मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि विधानसभा केवल कानून बनाने का स्थान नहीं है, बल्कि यह जनता की आवाज को नीति में बदलने का महत्वपूर्ण मंच है। एक प्रभावी विधायक की पहचान केवल इस बात से नहीं होती कि वह सदन में कितना बोलता है, बल्कि इससे होती है कि वह कितनी गहराई से विषयों को समझता है, तथ्यों का कितनी मजबूती से अध्ययन करता है और जनसमस्याओं के कितने व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं को तथ्यों के साथ सदन में उठाना, विधेयकों पर गंभीरता से चर्चा करना और सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करना एक सजग जनप्रतिनिधि का मूल दायित्व है। महिला विधायक की भूमिका इससे भी व्यापक है, क्योंकि जब एक महिला विधायक सदन में बोलती है तो उसकी आवाज में केवल एक निर्वाचन क्षेत्र की अपेक्षाएं नहीं होतीं, बल्कि उस मां की चिंता, बेटी के सपने और महिलाओं के संघर्ष एवं आकांक्षाओं की आवाज भी शामिल होती है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि जब महिलाओं की आवाज निर्णय प्रक्रिया में शामिल होती है तो नीतियों में संवेदना, निर्णयों में समावेशिता और शासन में न्याय की भावना मजबूत होती है। महिलाओं की भागीदारी केवल लोकतंत्र की तस्वीर नहीं बदलती, बल्कि लोकतंत्र के चरित्र को भी मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि जब किसी गांव की महिला सरपंच निर्णय लेने की मेज तक पहुंचती है तो केवल एक महिला उस मेज तक नहीं पहुंचती, बल्कि उसके साथ उस गांव की हजारों महिलाओं की आवाज भी पहुंचती है। इसी सोच के साथ हरियाणा में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देकर उनकी भागीदारी को मजबूत किया गया है। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी की प्रभावी भागीदारी के बिना विकास की तस्वीर पूरी नहीं हो सकती। गांव की बेटी और बहू आज परिवार के साथ-साथ पूरे गांव के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। जहां महिला नेतृत्व होता है, वहां पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलता है।मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए अनेक योजनाएं और नीतियां लागू की गई हैं। जन-धन खातों से लेकर मुद्रा योजना, उज्ज्वला योजना और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर काम हुआ है। उन्होंने कहा कि जब महिला आर्थिक रूप से मजबूत होती है, उसकी शिक्षा आगे बढ़ती है और उसे अपने निर्णय लेने की क्षमता मिलती है, तभी महिला सशक्तिकरण वास्तव में धरातल पर दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लंबे समय से लंबित महिला आरक्षण से जुड़े ऐतिहासिक निर्णय को आगे बढ़ाते हुए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के माध्यम से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को नई दिशा दी है। यह महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक प्रभावी भागीदारी देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं और बेटियों के आर्थिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। ‘दीनदयाल लाडो लक्ष्मी’ योजना के तहत बहन-बेटियों को हर माह 2,100 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। योजना के तहत अब तक 10 किस्तों में करीब 2 हजार करोड़ रुपये की राशि लाभार्थी महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचाई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि ‘हर घर-हर गृहिणी’ योजना के माध्यम से प्रदेश के लगभग 15 लाख परिवारों को मात्र 500 रुपये में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना के तहत अब तक 340 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी लाभार्थियों को प्रदान की जा चुकी है। सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश की बहनों को महंगाई से राहत देने के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य और सम्मान की भी रक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों का सकारात्मक प्रभाव स्टार्टअप और उद्यमिता के क्षेत्र में भी दिखाई दे रहा है। आज हरियाणा के स्टार्टअप्स में महिलाओं की भागीदारी 50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 60 प्रतिशत तक ले जाना है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की प्रतिभा, कला और संस्कृति को उचित मंच प्रदान करने के लिए प्रदेश में 500 महिला सांस्कृतिक केंद्र स्थापित किए गए हैं।मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा के लिए यह गर्व की बात है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2015 को पानीपत की ऐतिहासिक धरती से ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान की शुरुआत की थी। उस समय प्रदेश का लिंगानुपात चिंता का विषय था, लेकिन निरंतर जागरूकता और सामाजिक प्रयासों से इसमें उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में बेटियों को अवसर दिए गए तो उन्होंने अपनी प्रतिभा और क्षमता को हर क्षेत्र में सिद्ध करके दिखाया। खेल के मैदान से लेकर सेना, विज्ञान, शिक्षा, चिकित्सा, प्रशासन और राजनीति तक हर क्षेत्र में हरियाणा की बेटियों ने अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि जब बेटियों को अवसर मिलता है तो वे उस विश्वास को और ऊंचा करने का कार्य करती हैं। बेटियां हर लक्ष्य को प्राप्त कर सकती हैं, यह उन्होंने अपनी उपलब्धियों से सिद्ध किया है।मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि तकनीक और सोशल मीडिया ने जनप्रतिनिधियों और जनता के बीच संवाद की पूरी तस्वीर बदल दी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से जनप्रतिनिधि अपनी बात कुछ ही क्षणों में लाखों लोगों तक पहुंचा सकते हैं। लेकिन हर शक्ति के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। उन्होंने कहा कि तथ्यहीन सूचनाएं, गलत सूचनाओं का प्रसार, ऑनलाइन दुर्व्यवहार और डिजिटल हिंसा आज नई चुनौतियां हैं। इसलिए महिला जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे तकनीक को केवल संवाद का माध्यम न बनाकर जनसेवा, पारदर्शिता और जवाबदेही का प्रभावी माध्यम बनाएं तथा ऐसा सुरक्षित डिजिटल वातावरण तैयार करने में योगदान दें, जहां हर महिला निर्भय होकर अपनी बात रख सके।मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि ‘चेंज मेकर’ का संदेश तभी सार्थक होगा, जब कार्यशाला में हुए विचार-विमर्श का प्रभाव नीतियों और जनजीवन में दिखाई दे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महिला जनप्रतिनिधियां यहां प्राप्त अनुभवों को अपने-अपने राज्यों में प्रभावी रूप से लागू करेंगी और लोकतंत्र को अधिक संवेदनशील, समावेशी एवं परिणामकारी बनाने में योगदान देंगी। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी महिला जनप्रतिनिधियों को सफल कार्यशाला के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महिलाओं की आवाज केवल आवाज नहीं, बल्कि जनमन का विश्वास है। महिलाएं अपनी पहचान के साथ भारत की नई पहचान बनाने की क्षमता रखती हैं और परंपरा को साथ लेकर भविष्य की ओर बढ़ते हुए राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया के. राहटकर ने कहा कि दो दिवसीय ‘She Is A Change Maker’ कार्यक्रम का उद्देश्य महिला जनप्रतिनिधियों की नेतृत्व क्षमता और प्रभावी जनप्रतिनिधित्व को सशक्त करना है। कार्यक्रम में केंद्र शासित प्रदेश सहित करीब 22 राज्यों की महिला जनप्रतिनिधियों ने भाग लेकर महिला केंद्रित कानून, आर्थिक सशक्तिकरण, गवर्नेंस, लीडरशिप और पब्लिक रिप्रजेंटेशन जैसे विषयों पर चर्चा की। उन्होंने महिला विधायकों से कार्यक्रम से मिले ज्ञान और अनुभवों को अपने राज्यों में लागू करने तथा बने नेटवर्क को सक्रिय रखते हुए महिलाओं के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए कार्य करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और हरियाणा सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि महिला नेतृत्व सुशासन और राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

