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अशोक गहलौत और जयराम रमेश ने आज संयुक्त प्रेस वार्ता में क्या कहा , सुने इस वीडियो में

अजीत सिन्हा / नई दिल्ली
जयराम रमेश ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा- नमस्कार साथियों। आज राजस्थान के मुख्यमंत्री, श्री अशोक गहलोत जी, जो हमारे कांग्रेस संगठन के पिछले 40 सालों से एक बड़े महत्वपूर्ण स्तंभ रहे हैं, वो आज आपको संबोधित करेंगे।अशोक गहलोत ने कहा कि हमारे साथी जयराम रमेश जी और तमाम मेरे पत्रकार मित्रों, आप जो हालात देख रहे हैं देश में, वो चिंताजनक हैं। जिस रुप में एक तरफ राहुल गांधी जी से 5 दिन तक 50 घंटे पूछताछ की गई, वो भी आज तक कभी ऐसा हुआ नहीं और राहुल गांधी जी ने भी जिस रुप से ईडी को फेस किया, वो भी बेमिसाल है। 50 घंटे लगातार पूछताछ करना, लंच में जाने के लिए भी अलाऊ नहीं करना, रात को 12:30, 12:45 बजे तक रोके रखना, ये तमाम जो रिकॉर्ड बन रहे हैं, पहली बार बन रहे हैं और ईडी के अंदर भी और ईडी के बाहर भी। जिस प्रकार पुलिस का रवैया था, वो भी बेमिसाल था।

आज तक ऐसा रवैया पुलिस का कभी सामने नहीं आया। पॉलिटिकल मूवमेंट होते हैं और उसको फेस करती है, विपक्षी पार्टी। ये पहली बार है कि पुलिस टारगेट कर-करके कांग्रेस नेताओं को, विशेष रुप से महिला कांग्रेस की नेताओं को, हमारी वरिष्ठ नेताओं को चुन-चुन करके उनके साथ मिसबिहेव किया गया, कई जगह पिटाई भी हो गई और जिस प्रकार पूरी दिल्ली के बॉर्डर पर ले जाया गया उनको थाने के अंदर, रात को 12-12, 1-1 बजे छोड़ा गया, ये तमाम पहली बार पुलिस का आतंक देख रहे हैं, हम लोग और ये एक चिंता की स्थिति है। मैं समझता हूं कि ये पुलिस का रिहर्सल है देश के लिए, जब तानाशाही आएगी पूरी तरह, तब किस प्रकार का व्यवहार होगा, किस प्रकार इन्हें करना है, उसका रिहर्सल करने का पुलिस को जो मौका दिया गया, वो बहुत खतरनाक है। ये कोई दुश्मनी नहीं होती है, राजनीति के अंदर। अपना-अपना काम करते हैं पक्ष-विपक्ष। ले जाते हैं, कोर्ट अरेस्ट देते हैं, जो विपक्ष होता है, वो खुद अपने आपको समर्पित करता है, अरेस्ट के लिए, उसको कहते हैं कोर्ट अरेस्ट।

इस केस के अंदर खुद आगे आकर हम गिरफ्तारी दे रहे थे, उनको व्यवहार वैसा ही करना चाहिए था, जो आज तक होता आया है, सरकारें किसी की रही हों। पहली बार है कि उनके साथ में दुश्मनों की तरह व्यवहार किया गया, जैसे कि देश के नागरिक नहीं हैं। वही माहौल देखने को मिला 5 दिनों तक।

मैं मीडिया के साथियों को धन्यवाद देना चाहूंगा, उनकी मेहनत को, उनके हौसले को क्योंकि, उन्होंने भी 5 दिन तक जो संघर्ष देखा है, जिस रुप में और जो उनकी पिटाई भी हुई है कई जगह पर, दुर्व्यवहार भी हुआ है हमारे सामने। टीवी में देख रहे थे, सोशल मीडिया में देखा हमने, और तो और, तो इतिहास में ऐसा भी कभी नहीं हुआ कि कांग्रेस के हैड क्वार्टर में जाकर, अंदर घुस जाए पुलिस और पिटाई करके बाहर लाए मीडिया वालों को भी और आम लोगों को भी। ऐसा भी संभवत: कभी नहीं हुआ।

हमारा देश एक फेडरल स्टेट है। सरकार अलग-अलग पार्टियों की होती हैं। अगर आपके दिल्ली के व्यवहार को देखकर राज्य सरकार में भी जो विपक्ष होता है, वो बीजेपी होती है, आंदोलन करती है। अभी भी आंदोलन किया राजस्थान के अंदर। तो क्या हम लोग भी आपकी तरह बीजेपी के जो हैड क्वार्टर स्टेट के अंदर है, उसके अंदर हमारी पुलिस घुसे, दुर्व्यवहार करे, कार्यकर्ताओं को पीट कर बाहर निकाल दे, ये शोभा देता है क्या, अच्छा है क्या? ये कौन सी परंपरा पैदा कर रहे हैं ये लोग? बहुत खतरनाक परंपराएं स्थापित कर रही है बीजेपी, इसलिए हम बार-बार कहते हैं कि देश किस दिशा में जा रहा है। मैं बहुत गंभीरता से कहना चाहूंगा, 50 साल का मेरा अनुभव राजनीति का है, 42 साल मुझे पार्लियामेंट में आए हुए हो गए, 5 बार मैं मेंबर पार्लियामेंट रहा हूं, तीन बार केंद्रीय मंत्री रहा हूं इंदिरा गांधी जी के साथ, राजीव गांधी जी के साथ में, नरसिम्हा राव जी के साथ, तीन बार मैं प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष रहा हूं, तीन बार एआईसीसी का महामंत्री रहा हूं और तीन बार मुख्यमंत्री रहा हूं। ये मैं इसलिए अपना बैकग्राउंड बता रहा हूं, ये मैं आपको रिमाइंड करा दूं कि मैं ये जो बोल रहा हूं, बहुत ही सोच- समझ कर बोल रहा हूं। जो पूरा देश सुन रहा होगा, युवाओं को सुनना चाहिए विशेष रुप से। देश किस दिशा में जा रहा है, किसी को नहीं मालूम। देश किस दिशा में जाएगा किसी को नहीं मालूम।

इस रुप में आज ये पूरा मुल्क चल रहा है, जो बहुत ही चिंताजनक स्थिति है। इसे हमें समझना पड़ेगा और इसका मुकाबला कैसे करें, जब तक जनता साथ नहीं देगी, तब तक राजनीतिक पार्टियां अकेले कुछ नहीं कर सकती हैं। जनता को सत्य का साथ देना चाहिए और सत्य कांग्रेस के साथ में है, क्योंकि कांग्रेस के प्रोग्राम, पॉलिसी और प्रिंसिपल इस संविधान के साथ में मिले हुए हैं और मैं तो यहाँ तक कहूंगा कि कांग्रेस के जो प्रोग्राम, पॉलिसी या प्रिंसिपल है, वो और जो देश की स्थिति है हमारी, अलग-अलग धर्म के लोग, अलग-अलग जाति, वर्गों के लोग, अलग-अलग भाषाओं के लोग, यहाँ रहते हैं। इन सबको साथ लेकर चलना एक बहुत बड़ी चुनौती होती है, जो आज तक 76 साल तक कांग्रेस चलाती आई है। इसलिए देश एक रहा, अखंड रहा। पाकिस्तान की तरह तानाशाही शासन नहीं आया। धर्म के नाम पर जो आज राजनीति चल रही है, उसके लिए मैं विशेष रुप से कहना चाहूंगा, ये हमें रिमाइंड कराना पड़ेगा आम जनता को भी कि धर्म के नाम पर ही आजादी के वक्त में ही दो टुकड़े हुए थे देश के, हिंदुस्तान-पाकिस्तान बना था। तो पाकिस्तान तो एक धर्म के लोगों का मुल्क था। हमारा मुल्क सर्व धर्म समभाव की भावना वाला मुल्क था। तो क्या कारण है कि हम तो एकजुट रहे, अखंड रहे, चाहे इंदिरा गांधी जी ने जान दे दी, राजीव गांधी जी के जमाने में, राहुल जी तो बहुत बच्चे थे उस वक्त में। उन्होंने देखा अपनी दादी को भी और पिता जी की शहादत को देखा। पर राजीव गांधी जी जिस तरह शहीद हो गए, सरदार बेअंत सिंह जी ने आतंकवादियों को नेस्तोनाबूद कर दिया। आखिर में वो भी शहीद हो गए। कितने लोग शहीद हुए थे आपको मालूम है। कितनी घटनाएं होती थी उस जमाने के अंदर।

तो मैं पूछना चाहूंगा इन बीजेपी के, आरएसएस नेताओं से कि आप कब तक हिंदू धर्म के नाम पर लोगों को भड़काते रहेंगे? उदाहरण हमारे सामने है, हमारा पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान हमसे अलग हुआ धर्म के नाम पर, तो क्या कारण है कि पाकिस्तान के अलग दो टुकड़े हो गए इंदिरा गांधी जी के जमाने में। 90 हजार सैनिकों को इंदिरा गांधी जी ने सरेंडर करवा दिया, दुनिया के इतिहास में ऐसी मिसाल कहीं नहीं मिलेगी। वो अलग बात है कि मोदी जी आज तक इंदिरा गांधी जी का नाम तक नहीं लेते हैं। पर मैं विशेष रुप में कहना चाहूंगा आपको कि पाकिस्तान, बांग्लादेश क्यों बना? जब मुस्लिम लोग थे वहाँ पर, मुस्लिम राष्ट्र था, तो एक धर्म के नाम पर मुल्क बनना अलग बात है, पर मुल्क कायम रहना दूसरी बात है, जो हमने देखा है। मैं तो खुद बॉर्डर पर गया था शरणार्थियों की सेवा करने के लिए 1971 के समय में भी बांग्लादेश गया था। मुझे मालूम है कि क्या हालत थे। तो मुझे बता दीजिए कि दो मुल्क क्यों बने एक धर्म के नाम के बावजूद? दो मुल्क कैसे बन गए जब एक धर्म के लोग थे, पाकिस्तान और आज जो बांग्लादेश है, तत्कालीन पाकिस्तान था। इसका मतलब है, धर्म के नाम पर मुल्क बन सकते हैं, तो मुल्क एक रहेगा, अखंड रहेगा, ये कोई गारंटी नहीं है।

आज ये हिंदू धर्म की बात करके लोगों को भड़का रहे हैं। हिंदू राष्ट्र की बात कर रहे हैं। अरे, अमित शाह जी बोल गए खाली हिंदी को लेकर दो शब्द। पूरा दक्षिण उठ खड़ा हुआ, अमित शाह जी को शब्द वापस लेने पड़े कि मेरे मायने ये नहीं थे, अभी एक महीने पहले की बात थी। जो भाषा के नाम पर भड़क सकते हैं देश के लोग, धर्म के नाम पर जब ये खुद ही भड़का रहे हैं लोगों को, तो आप सोचिए कि इनकी सोच क्या है ये? क्या धर्म के नाम पर, हिंदू धर्म के नाम पर ये हिंदू राष्ट्र बनाकर देश को एक व अखंड रख पाएंगे? यही लोग बाद में बात करेंगे कि ये तो शेड्यूल कास्ट के लोग हैं। आज तो शेड्यूल कास्ट वालों को गुमराह किया जा रहा है, गले लगाया जा रहा है, आप भी हिंदू हो हमारी तरह। ट्राइबल को कहा जा रहा है, आप हिंदू हो। पर इनकी आत्मा को पूछूं, मैं बचपन से ही इनको वॉच कर रहा हूं, जनसंघ के रुप में कि जनता पार्टी में मर्ज हो गए थे, ये लोग, जब इंदिरा गांधी जी को जेल भेजा था तब और अब भारतीय जनता पार्टी के रुप में है, सत्ता में आ गए हैं। कभी भी इन्होंने शेड्यूल कास्ट को गले नहीं लगाया था। अंबेडकर जी की बात छोड़ दीजिए, गांधी जी को इन्होंने कभी एक्सेप्ट नहीं किया था।

तो आज जिस प्रकार से अपना रुप बदला इन्होंने, गांधी जी की फोटो लगाते हैं, सरदार पटेल जी की मूर्ति लगाई है मोदी जी ने। पूछो इनको कि सरदार पटेल जी ने तो आपके आरएसएस को बैन किया था। आरएसएस ने माफी मांगी थी कि हम जिंदगी में कभी राजनीति में भाग नहीं लेंगे, सांस्कृतिक संगठन रहेंगे। उस रुप में उन्होंने माफी मांगी उस वक्त में। आज उनकी मूर्ति लगा रहे हैं, खाली वोटों की राजनीति करने के लिए।

कांग्रेस मुक्त भारत बना देंगे। अरे, आप क्या कांग्रेस मुक्त भारत बनाएंगे, इनकी सात पीढ़ियां आ जाएंगी, तो ये कांग्रेस मुक्त भारत नहीं बनेगा। ये कांग्रेस और देश की जो भावना है, वो एक सी है, ठीक है सत्ता में आए, नहीं आए, कई कारण होते हैं, जो आप देख रहे हैं कि धर्म के नाम पर जो हालात बन गए हैं देश के अंदर, जो भावना आ गई, कब तक रहेगी वो? महंगाई, भयंकर बेरोजगारी से तो हाहाकार मचा हुआ है देश के अंदर। आर्थिक स्थिति गर्त में जा रही है, पता नहीं किस दिशा में हम जाएंगे। आने वाले वक्त में क्या फ्यूचर है, इस देश के नौजवानों का, वो आपने देख लिया, अभी अग्निपथ को लेकर।

आप बताइए कोई शासन, गुड गवर्नेंस इसे कहते हैं! आप किसी स्कीम को गुप्त रखो, अग्निपथ को, अचानक आप युवाओं के सामने उसको पेश कर दो। जिन्होंने एग्जाम दे दिए, फिजिकल टेस्ट दे दिया। इंतजार कर रहे थे नौकरी का, अचानक पता चले नई स्कीम आ गई। उसी की वजह से आज आगजनी हुई, तोड़-फोड़ हुई, हम उसको समर्थन नहीं करते हैं। हम युवाओं से अपील करते हैं कि आप अपनी बात कहो, शांतिपूर्ण तरीके से कहो और अहिंसा के तरीके से कहो, कोई दिक्कत नहीं उसके अंदर, पर हिंसा नहीं करनी चाहिए। ये भड़का रहे हैं उल्टा कि जिन्होंने भाग लिया आंदोलन में, उसको अग्निपथ के अंदर भर्ती नहीं करेंगे हम लोग, पुलिस सर्टिफिकेट मांगेगे।

तो ये युवाओं को भी भड़काने का काम कर रहे हैं और ये जो स्कीम आई है, उसमें जितने रिटायर्ड जनरल, कर्नल, मेजर जो भी हैं, वो खुलकर विरोध कर रहे हैं। उनके 25-25, 30-30 साल के अनुभव हैं, वो विरोध क्यों कर रहे हैं और मैं भी देख रहा था एक परमवीर चक्र, कल हमारे जयराम रमेश जी बता रहे थे, जो उनको पुरस्कार मिला, कैप्टन बाना सिंह जी को वो कह रहे हैं- “Save the country, Agnipath scheme will badly damage us, India is going through a crucial stage, youngsters are the future of our motherland”. इस देश को बचाइए, अग्निपथ योजना हमें बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाएगी। हमारा देश बहुत नाजुक स्थिति में पहुंच गया है। हमारे युवा देश का भविष्य हैं। ऐसे उदाहरण एक नहीं है, अनेकों हैं। जनरल बख्शी जी, रोज 5 साल से मैं देख रहा हूँ, कांग्रेस के बारे में, यूपीए गवर्मेंट के बारे में क्या नहीं बोलते हैं, आपको भी मालूम होगा, उन्हीं जनरल बख्शी से मैंने सुना है कि अग्निपथ को लेकर वो विरोध क्यों कर रहे हैं। और ऊपर से ये कल-परसों और भड़काया, हम इसको विदड्रो नहीं करेंगे। ये बोलने का तरीका डेमोक्रेसी में गलत है। ये आपके अहम, घमंड और तानाशाही प्रवृत्ति का द्योतक है। फासिस्टवादी प्रवृत्ति का द्योतक है। ऐसा कभी नहीं कहा जाता। आप डेलीगेशन बुलाओ फौजियों का, रिटायर्ड अधिकारियों को बुलाओ, आप कहो, चलो हम पोस्टपोन करते हैं, पार्लियामेंट कमेटी में डिस्कस नहीं कर पाएंगे, डिफेंस कमेटी को देंगे, कुछ तो कहो। तो युवाओं को लगता है कि हमारी बात सुनी गई है, आप उल्टा भड़काने का काम करते हैं। ये जो सरकार की अप्रोच है, वो भी तानाशाहीपूर्ण है, फासिस्ट एक तरह से है। इसलिए मैं कह रहा हूँ कि डेमोक्रेसी इस देश में खत्म हो रही है, संविधान की धज्जियां उड़ रही हैं, हम लोग सब चिंतित हैं।

तो कहने की तो बहुत सारी बातें हैं, क्योंकि ये जो राहुल जी के साथ जो कुछ किया गया है, आप बताइए मुझे, जिस प्रकार राहुल गांधी जी को 5 दिन तक 50 घंटे बुलाया गया, ऐसा कभी आज तक हुआ है। और तो और बिना मनी के मनी लॉन्ड्रिंग केस बना रहे हैं, जबरदस्ती बना रहे हैं। जब कोई भी संगठन, जो हमारा एक अखबार था, आजादी के 1937 में शुरु हुआ, 1942 से 1945 तक अंग्रेजों ने बैन लगा दिया था, इस अखबार पर। बचपन से हम नेशनल हेराल्ड को पढ़ते आए हैं और धीरे-धीरे कमजोर होता गया। मैं कई लोगों को जानता हूं जो उनके संवाददाता थे, 15-15 सालों तक तनख्वाह नहीं मिली। तब भी जुड़े हुए थे, क्योंकि जाएं तो जाएं कहां। जैसे आप लोगों का भी देखा, अभी कोरोना के बाद में संकट आया। आपके कई मालिकों ने देश के अंदर किसी की छटनी कर दी, किसी की तनख्वाह कम कर दी। जिसको 80 हजार तनख्वाह मिल रही है, 50 हजार अगर मिले तो, कितनी बेइज्जती है, आप सोच सकते हो। हो सकता है, आप में से कोई लोग विक्टिम हो उसका, मगर बोल नहीं रहे हो, क्योंकि जाएं तो जाएं कहां। जाएं तो जाएं कहां वाली बात है।

तो वो अखबार, जिसको हम वापस चालू करना चाहते थे, आप बात को समझने की कोशिश कीजिएगा। मैंने खुद सोनिया जी से रिक्वेस्ट की, मेरे जैसे कई लोग होंगे देश के अंदर जिन्होंने रिक्वेस्ट की होगी कि हमको नेशनल हेराल्ड अखबार को मजबूत करना चाहिए, पुनः औऱ हम अपनी बात ढंग से कह सकें, क्योंकि मीडिया वाले दबाव के अंदर हैं, वो लोग पूरी बात छापते नहीं हैं, दिखाते नहीं हैं, ईडी का, सीबीआई का, इंकम टैक्स का उनको डर है, ये स्थिति है, सब जानते हैं। आप सबकी, आप सबकी मतलब, यहाँ बैठे हुए लोगों की नहीं कह रहा हूँ, पूरे देशभर के पत्रकारों की मीडिया वालों की आत्मा बोलती है, आप नहीं बोलते हो, ठीक है। तो हम लोगों ने कहा कि अखबार वापस से मजबूत बने। और वो तो ऐसी स्थिति में था कि 15-10 सालों से तनख्वाह नहीं दे पा रहा था, तो तो पूरी स्कीम बनाई गई कि वापस रिवाइव कैसे किया जाए। सौ बार में, किश्तों में पैसा दिया होगा, नेशनल हेराल्ड को, एजेएल कंपनी को, उनको मजबूत करने के लिए कोई न कोई तरीका निकाला, 90 करोड़ रुपए दिए गए। 90 करोड़ में से करीब 67 करोड़ रुपए तो खाली वीआरएस देने में लगाया गया, कि नए सिरे से शुरु करें, क्योंकि पुराने लोग तो कुछ काम कर नहीं पा रहे हैं, क्योंकि वो तो खुद जाना चाह रहे हैं, तो कोई तरीका निकालते हैं, रिवाइव करने के लिए, कंपनी को रिवाइव करने की बात होती है, वही कंपनी को रिवाइव करने की बात थी। निकाला गया तरीका, 67 करोड़ लगभग खर्च हो गए उसके अंदर, 30-35 करोड़ रुपए जो सरकारी जमीन होती है, टैक्स, बिजली, पानी जो भी है, वो सब कुछ चुकाया गया, सरकार को चुकाए गया हैं। नई कंपनी बनाई गई, जिससे कि पूरी तरह मॉनीटरिंग हो सके। ढंग से निकल सके अखबार और लोगों को हम सेवा के लिए अपील कर सकें।

अब आप बताइए, एक ऐसा माहौल बना दिया इन लोगों ने, चंदा देने वाला गुनहगार है कांग्रेस को, पूरा चंदा आज बीजेपी को मिल रहा है। लूट रहे हैं, बीजेपी वाले देश को, एक तरफ करप्शन करके। आप बिलीव नहीं कर सकते, आरएसएस, बीजेपी के नेता लोग, इनको मजा आ गया, राज का। राज पहली बार मिला है। वाजपेयी जी के वक्त में इतनी छूट नहीं थी, अब पूरी छूट है, लूटने की। जमकर पैसा खा रहे हैं, जमकर ये राजनीति कर रहे हैं, अपने ऑफिसेस बना रहे हैं, पूरे हिंदुस्तान के अंदर, 350 ऑफिस बन भी गए हैं, इनके। इन हालातों में देश चल रहा है। फिर भी संघर्ष करते-करते आगे बढ़ते गए। इन्होंने क्रिमिनल केस करवा दिया, वो अलग जमानत हुई, सोनिया जी की, राहुल जी की। जिस तरह से सब कुछ त्याग दिया, सोनिया गांधी जी प्राईम मिनिस्टर नहीं बनीं वो, उनको जिस रुप में आपने कोर्ट में पेश करवाया आप सोच सकते हो कि इनकी सोच क्या है। फिर आपने 2015 में केस खत्म हो गया, ये आपका क्लोज कर दिया, करीब-करीब इसको, इसी ईडी ने, उस 2015 के केस को आप वापस 7 साल, 8 साल बाद लाकर रिवाइव कर रहे हो और बुलाकर आप बयान ले रहे हो। कल वो अभिषेक मनु सिंघवी कह रहे थे, एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई इसके अंदर। आप 5 दिन तक, 50 घंटे बैठाओगे किसी नागरिक को, राहुल गांधी कितने बड़े नेता हैं, हमारी पार्टी के, एक नागरिक भी तो हैं देश के। क्या इस प्रकार आप बिहेव कर रहे हो देश के अंदर, वो लोग आगे कह सकते हैं, दिल्ली में, ये जो राहुल गांधी हमारे पॉपूलर लीडर हैं, हजारों लोग यहाँ पर आ गए, आज देश के अंदर जहाँ ईडी छापा डाल रही है, वहाँ क्या स्थिति बनती होगी। इन स्थितियों में देश चल रहा है। इसलिए मैं कहना चाहूँगा, मैं माफी चाहता हूँ, मैं कुछ लंबा बोल गया होऊँगा, पर मेरे दिल की भावना बहुत सारी है। रोज आप लोग देखते होंगे, मैं बोलता रहता हूँ, मीडिया के सामने, कहने की आवश्यकता नहीं है। पर आप मीडिया वाले हो, मीडिया वाले भी हमारे पॉलिटिकल लीडर की तरह ही होते हैं, देश के लिए कुछ करना चाहते हो, इसलिए आप इसमें आए हो। आप भी कोई व्यापारी, इंडस्ट्रियालिस्ट, नौकरी कुछ कर सकते थे, आपने चुना है, वो जहाँ संघर्ष भी है, कमिटमेंट भी है और कुछ सेवा करने का जज्बा भी है। तो मैं इस रुप में देखता हूँ, बचपन से आप लोगों को। मुझे खुशी है कि आपने दमखम के साथ 5 दिन तक इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, यही बात कहकर मैं अपनी बात को समाप्त करता हूँ।

श्री जयराम रमेश ने जोड़ा कि मैं सिर्फ एक चीज कहना चाहता हूँ कि 15 मई, 2022 को उदयपुर में कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा की घोषणा की थी। आरएसएस और बीजेपी की विभाजनकारी विचारधारा औऱ नीतियों के खिलाफ, धर्म के आधार पर, जाति के आधार पर, भाषा के आधार पर, प्रांत के आधार पर जो समाज को बांटा जा रहा है, उसके खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने ये ऐलान किया कि 2 अक्टूबर, 2022 से, कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत जोड़ो यात्रा निकाली जाएगी। बीजेपी का जवाब क्या है, मोदी सरकार का जवाब क्या है, भारत जोड़ो यात्रा को लेकर, जब कांग्रेस कह रही है, भारत जोड़ो, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री लगे हुए हैं, राहुल तोड़ो। ये षड़यंत्र है। सोनिया गांधी तोड़ो, राहुल तोड़ो, कांग्रेस तोड़ो औऱ कांग्रेस कह रही हैं कि हम भारत जोड़ो यात्रा में 2 अक्टूबर से कांग्रेस संगठन निकलेगा, कांग्रेस नेतृत्व निकलेगा, इसकी तैयारी हो रही है औऱ इसको काउंटर करने के लिए, सोनिया गांधी तोड़ो, राहुल तोड़ो, कांग्रेस तोड़ो, अशोक गहलोत तोड़ो, तो इसके खिलाफ आज 24, अकबर रोड़ पर हमारे विधायक मौजूद हैं, हमारे सांसद मौजूद हैं और इस षड़यंत्र के खिलाफ हम हमारी आवाज उठा रहे हैं। सारी संस्थाएं लगी हुई हैं। पुलिस लगी हुई है, ईडी लगी हुई है, सीबीआई तो है ही, इंकम टैक्स है, सरकार की हर एक संस्था, जो संवैधानिक संस्थाएं हैं, उनको मोदी सरकार की ये जो राजनीति है, बदले की राजनीति, ये वैंडेटा पॉलिटिक्स है, कोई शासन की राजनीति नहीं है, ये गुड गवर्नेंस की राजनीति नहीं है, ये मैक्सिमम वैंडेटा, मिनिमम गवर्मेंट है। तो इसके खिलाफ हम आज आवाज उठा रहे हैं। सारा दिन हमारे विधायक और सांसद यहाँ मौजूद हैं। आप देख रहे हैं, आप लोग खुद महसूस कर चुके हैं, किस तकलीफ से आपको यहाँ आना पड़ा, मैं आपसे माफी मांगता हूँ, आपको कुछ कठिनाई हुई। ये हमारे कारण नहीं है। हमारे कई सांसद, कई विधायक भी रोके गए हैं, हमारे ही ऑफिस में प्रवेश करने से रोका गया है। हम स्पीकर से मिले हैं। राज्यसभा के अध्यक्ष से मिले हैं, हम महामहिम राष्ट्रपति जी तक गए हैं। हम उम्मीद करते हैं कि मीडिया के द्वारा हमारी आवाज जनता तक पहुंचेगी। कांग्रेस भारत जोड़ो में लगी रहेगी। उनकी सोनिया गांधी तोड़ो, राहुल गांधी तोड़ो की राजनीति को हम सफल नहीं होने देंगे।

एक प्रश्न पर कि 23 तारीख को सोनिया गांधी जी को ईडी से मिलने जाना है, क्या स्थिति है, उसको लेकर, श्री अशोक गहलोत ने कहा कि अभी वो हॉस्पीटल से आई हैं, काफी दिनों के बाद में और जिस तरह की प्रॉब्लम है, आपके सामने आए हैं, तो मुझे नहीं लगता कि उनको जाना चाहिए वहाँ पर। उनको कनवे करना चाहिए कि मैं व्यक्तिगत रुप से उपस्थित होने की स्थिति में नहीं हूँ और मुझे ऐसी जानकारी मिली है कि उन्होंने ये कहा है कि मैं कॉपरेट करूँगी, ईडी को, परंतु मैं अभी नहीं आ सकती हूँ।

एक अन्य प्रश्न पर कि राहुल जी से जो पूछताछ चल रही थी, ईडी के सूत्रों के मुताबिक उसका पहला चरण पूरा हो गया है, आप लोगों को क्या कम्यूनिकेट किया गया है, श्री गहलोत ने कहा कि आप लोग ईडी के सूत्रों की बात ही क्यों करते हो। ईडी की खुद की क्रेडिबिलिटी बहुत कम हो रही है। मैं बार-बार रिक्वेस्ट कर रहा हूँ, ईडी के डायरेक्टर से टाइम मांग रहा हूँ मैं, सीबीआई के डायरेक्टर से टाइम मांग रहा हूँ मैं, और सीबीडीटी के चेयरमैन से टाइम मांग रहा हूँ मैं, कि मैं नागरिक भी हूँ औऱ मुख्यमंत्री भी हूँ, मुझे टाइम दीजिए। मैं आपको आकर बताना चाहता हूं कि देशवासियों की भावना आपके प्रति क्या बन गई है। आपकी कितनी क्रेडिबिलिटी कम होती जा रही है। बख्शों इन एजेंसियों को, प्रीमियर एजेंसी देश की हैं, टाइम फटाफट आ गया मेरे पास, कब आना है बताइए, आधे घंटे बाद मेरे को दूसरा फोन आ गया, तो आप सोच सकते हो कि इनकी क्रेडिबिलिटी नीचे जा रही है। इनको कहो कि अपने परिवार वालों से पूछें कि हम जो कर रहे हैं, वो ठीक कर रहे हैं, क्या? मैं समझता हूँ कि इनके खुद के फैमिली वाले भी कहेंगे कि आप गलत काम कर रहे हो, ये इनकी स्थिति है। दबाव है ऊपर से तो इनको मजबूरी में नौकरी बचानी है, तो करना पड़ता है, पोस्टिंग के लिए करना पड़ता है। मेरा मानना है कि इनमें बहुत अच्छे लोग भी हैं, प्रोफेशनल लोग भी हैं, बहुत अच्छा काम कर रहे हैं, पर दबाव के अंदर काम कर रहे हैं। ये नीचे वाले लोग बताते हैं पब्लिक को कि साहब मजबूरी में आकर हम क्या करें। तो स्थिति बहुत नाजुक है।

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