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वीडियो देखें: कांग्रेस पार्टी ने आज घरेलु गैस सिलिंडर के दामों में की गई बढ़ौतरी को लेकर केंद्र सरकार जमकर साधा निशाना।

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली: कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि नमस्कार साथियो। 65 घंटे, 3 देश, 20 ड्रेसेस, 60 फोटो शूट, लौट कर आ गए साहब। लौटने के बाद सिलेंडर घरेलू, जो डोमेस्टिक सिलेंडर है, उसकी कीमत 50 रुपए और बढ़ा दी, तो दिल्ली में अब आप सबको बधाई हो कि 1,000 रुपए नहीं हुआ अभी भी, 999 रुपए 50 पैसे। इतनी तो है कि उन्होंने 1,000 नहीं होने दिया, तो अभी भी कुछ छुट्टे बचेंगे अपनी जेब में।मैं जब इस प्रेस वार्ता के बारे में प्रणव भाई से चर्चा कर रहा था, तो कहा कि अगरबत्ती लगानी है, तो नींबू। नींबू और महंगे थे, तो मैंने फिर आलू और लौकी यहाँ लगाए और उस पर मैंने अगरबत्ती लगाई। मोदी साहब ने आपको याद होगा पेट्रोल पंप पर बड़ी-बड़ी होर्डिंग लगाकर कहा था कि सब्सिडी सरेंडर कर दीजिए। Give up subsidy, सबसे आह्वान किया। आज ये स्थिति पैदा कर दी कि ये सिलेंडर सरेंडर करने के दिन आ गए हैं। ये हकीकत है मोदी साहब की सरकार की।

कांग्रेस सरकार ने गरीब, मध्यम वर्ग इन सबका ध्यान रखते हुए कीमतों को काबू में रखने के लिए कि हमारे आपकी जेब पर ज्यादा बोझ ना डालें, सब्सिडी दी। 2012-13 में एलपीजी पर कांग्रेस सरकार जो सब्सिडी देती थी, वो थी 39,558 करोड़ रुपए की। 2013-14 में कांग्रेस सरकार जाने से पहले का आंकड़ा है ये। 46,458 करोड़ की सब्सिडी दी थी। The Congress party, when it was in power ensured that the burden of high prices does not fall on the middle class, or on the poor section of the society and therefore there was a subsidy in place on cooking gas. In 2012-13, the subsidy bill on LPG was Rs. 39,558 crores and before we demitted office in 2013-14, the subsidy on LPG went up to 46,458 crores. This is data as far as our government is concerned. ये आंकड़े हमारी सरकार के हैं।

अब मोदी सरकार आई, आते ही बड़े-बड़े नारे दिए। Give up your subsidy, पूरे विश्व में डंका बजाया अपना कि साहब देखिए हमने इतना बड़ा आह्वान किया है और लोग मान रहे हैं हमारी बात। 2015-16 में वो सब्सिडी जो हम छोड़ कर गए थे 46,458 करोड़ की वो घटाकर 18 करोड़ कर दी और 2016-17 में वो जीरो कर दी, शून्य।

अब हम मार्च से लेकर अब तक 37 दिन हो गए हैं इस वित्तीय वर्ष की, अभी तक आपको अंडर रिकवरी और सब्सिडी के आंकड़े नहीं दिखे होंगे, जारी ही नहीं किए, क्योंकि कुछ है ही नहीं दिखाने के लिए और लगातार आप वजन, बोझ मिडिल क्लास के ऊपर, गरीब तबके के ऊपर डाले चले जा रहे हैं। जबकि यह आंकड़े स्पष्ट है कि जो 23 करोड़ लोगों को यूपीए ने गरीबी रेखा से ऊपर उठाया था, ना केवल वो 23 करोड़ वापस गरीबी रेखा के नीचे चले गए हैं, 14 करोड़ उसमें और बढ़ चुके हैं। जबकि आपको मालूम है कि आपकी नीतियों के चलते आज घर चलाना मुश्किल हो गया है, ईएमआई देना मुश्किल हो गया है। यहाँ तक कि सब्जी, तरकारी, तेल खरीदना भी दूभर हो गया है।
Pawan Khera said- You are aware of the hardships that the people of India are facing. You are aware of the price rise. You are aware of the data and it’s not our data, it’s the world bank data, 23 million people were brought out of the BPL, not only have those 23 million gone back under the BPL, you added 14 million more. ऐसे में सरकार का दिल बड़ा होना चाहिए। बड़ा तो छोड़िए यहां तो दिल ही नहीं दिख रहा है। Governments are expected to show a large heart, especially when the people are facing such profound hardships. आप निरंतर, पेट्रोल-डीजल तो हम बताते ही रहते हैं, आप निरंतर अब रसोई गैस में भी डाका डालने लग गए।हमारी यह मांग है कि 2014 में जो सिलेंडर 414 रुपए का था, आज वो 999 रुपए 50 पैसे का आपने कर दिया, 585 रुपए 50 पैसे की आपने इसमें बढ़ोतरी की है पिछले 7 साल में। कृपा करके जिस देश ने आपको इतना कुछ दिया, उसको कुछ राहत दीजिए और ये रोल बैक कीजिए। 2014 के स्तर पर आप लाने की स्थिति में हैं, आप लाइए या तो आपको सरकार चलाना आता नहीं है या आपमें से जिनको सरकार चलाना आता है, आप उनको चुप रखते हैं, उनकी बात नहीं सुनते। जो भी कारण हो, देश राहत की भीख मांग रहा है।शर्म आनी चाहिए ऐसी सरकार को, जो विश्व में जा-जाकर बोलती है कि हमें इतनी सीटें मिली, हमसे पहले ये था, हमसे पहले कुछ था ही नहीं हिंदुस्तान में। साहब आपसे पहले हिंदुस्तान में इतनी बड़ी बेरोजगारी नहीं थी, इतनी महंगाई नहीं थी, इतनी त्राहि-त्राहि नहीं थी, जितनी अब आपकी वजह से हुई है। जितना जल्दी आप ये बात समझेंगे, देश को उतनी ही जल्दी आप राहत दिला पाएंगे। ये तो मैंने आपको डोमेस्टिक यूज की 14.2 किलो की सिलेंडर की बात की।

कमर्शियल की हालत आप जानते हैं क्या है। कमर्शियल सिलेंडर भी अभी 1 मई को 104 रुपए बढ़ा दिए उस पर। तो आप लगातार चोट पहुंचा रहे हैं।

You are attacking every single household of the country. Whether it is commercial gas, small businesses are dependent on this. So, it is a ripple effect on lot of other prices. Either you have no understanding of how to run a country, how to govern a country. Of course, that’s not even a question any more, everybody is watching the way you falter, but, a country which has given you so much of recognition, two victories, you owe it to the country, that when the country needs relief, you should be there to give that relief.
एक प्रश्न पर कि लगातार महंगाई बढ़ रही है, आप सड़कों पर कब आएंगे? पवन खेड़ा ने कहा कि हम सड़कों पर कब नहीं दिखते आपको? मुझे तो ये बात आज तक समझ में नहीं आती, हम आपको सड़कों के अलावा दिखते कहाँ हैं, ये बताइए। हमारे तमाम राज्यों की इकाइयां निरंतर सुबह से शाम तक यही मुद्दे उठाती हैं। आज मैंने एक ट्वीट किया कि 12 बजे मैं ये प्रेस वार्ता कर रहा हूं, मैंने विषय नहीं बताया था। मैं नीचे जवाब देख रहा था। किसी का जवाब आया, बड़ा सहानुभूति पूर्वक उसने लिखा, जिसने भी लिखा कि आप क्यों खून जला रहे हैं। 2000 भी हो जाएंगे, कुछ लोग तो अंधे हो गए हैं, वो देंगे वोट। नहीं, बात वो नहीं। हम खून जलाएंगे, हम ये मुद्दे उठाएंगे। पूरा भरोसा है इस देश को लोगों पर हमें कि वो धर्मांध नहीं हैं। वो नफरत की आग में नहीं झुलसेंगे। यही मुद्दे हैं, जिनके आधार पर एक जिम्मेदार राजनीतिक पार्टी को अपनी राजनीति करनी चाहिए। जो गैर जिम्मेदार हैं, वो भले सरकार में हों, भले वो 303 सीटें लेकर आए हों, भले कई राज्यों में उनकी सरकार आ गई हो। वो गैर जिम्मेदार हैं, वो देश के खिलाफ काम कर रहे हैं। यह बात पत्रकारों को समझ में आ गई है, मुझे मालूम है कि आ गई है। मजबूरियां होती हैं कई बार आप नहीं दिखा पाते। जो चैनल पिछले 4 दिन से चला रहे थे 65 दिन, 65 घंटे, तीन देश, बताएं ना। सात साल 585 रुपए, बताएं ना। 45 साल का बेरोजगारी का रिकोर्ड तोड़ा, फ्लैश करो ना। यह हम सब पर इस देश का कर्ज है, आप पर भी, मुझ पर भी, प्रणव भाई पर भी, हम सब पर यह कर्ज है। मोदी जी नहीं मानते होंगे, हम मानते हैं। इसलिए हम ये मुद्दे उठाएंगे, सड़कों पर हम हैं, लगातार हैं। एक अन्य प्रश्न पर कि इन सब मुद्दों पर सरकार को कोई फर्क क्यों नहीं पड़ता है? श्री खेड़ा ने कहा कि नहीं ये श्रद्धांजलि है। ये सिलेंडर की श्रद्धांजलि सभा है। देखिए, अगर हम ये ना करें, माफ कीजिएगा, हमें तो नींद नहीं आएगी। जिनको यह सब करके नींद आ जाती है, वह जो सरकार में बैठे हैं, उनका जमीर वो जानें। हम अपने जमीर के प्रति जवाबदेह हैं। We are answerable to our conscience. If we don’t do it, we will not be able to sleep. Because these are the issues that have brought all of us into politics.
एक अन्य प्रश्न पर कि बीजेपी क्यों इसे छोटा मुद्दा मानती है? खेड़ा ने कहा कि बीजेपी इसे और ऐसे तमाम मुद्दों को छोटा दिखाना चाहती है। इसलिए वो अपने मुद्दे लेकर आती है। पिछले सात साल में बीजेपी ने इन मुद्दों से बचने के लिए और अपने आपको बचाने के लिए हमारे और आपके शब्दकोश में हर साल नया शब्द डाला – टुकड़े-टुकड़े गैंग, लव जिहाद, झटका हलाल, हनुमान चालीसा बनाम अजान, बुलडोजर। ये तमाम मुद्दे क्यों खड़े किए जा रहे हैं? हजारों साल से ये सभ्यता है, सैकड़ों साल से हम इकट्ठे जी रहे हैं। आज क्या आवश्यकता पड़ गई कि जो सरकार में बैठे हैं, वही समाज को अशांत कर रहे हैं? क्योंकि अगर वो ये मुद्दे नहीं उठाएंगे, तो समाज इनके विरुद्ध अशांत हो जाएगा। इन मुद्दों पर अशांत हो जाएगा। ये घबराहट, ये भय, ये डर मोदी जी को और संघ को मजबूर करता है कि वो मुझे और आपको लड़ाएं।कोविड के संदर्भ में पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री खेड़ा ने कहा कि ठीक बोल रहे हैं आप। गवर्नमेंट की तरफ से जब राहुल गांधी जी ने समय से पहले चेता दिया था सरकार को कोविड पर, तब भी कोई रिएक्शन नहीं आया था। उल्टा रिएक्शन आया था, हंसी उड़ाई गई थी राहुल गांधी की, अरे आपको क्या मालूम कोई कोविड नाम की चीज ही नहीं है, यूंही आप लोगों को डरा रहे हैं। तो रिएक्शन तो छोड़िए, एन एक्शन जो भारत सरकार का रहा कोविड के दौरान प्रथम वेव और दूसरी वेव दोनों में, आज उसका नतीजा हम भुगत रहे हैं। हर परिवार में कोई ना कोई गया है। लोगों ने सफर किया है। मुँह नहीं दिखा सकते मोदी साहब अपने ही देश के लोगों को, अपने ही प्रेस के मित्रों को, कोविड के मुद्दे पर ये चैलेंज है। हम चुनौती देते हैं, हमें तो आप पसंद नहीं करते, मत करिए। प्रेस के मित्रों के सामने बैठ जाइए, कोविड पर 5 सवालों के जवाब दे दीजिए, 5 छोड़िए 2 सवालों के जवाब दे दीजिए। मान जाएंगे कि मोदी जी का कोई 56 इंच का सीना है। नहीं, हिम्मत नहीं है। तो दूसरे मित्र ने पूछा कि मुद्दा क्यों नहीं बीजेपी इसको मानती महंगाई को, कोविड को भी मुद्दा नहीं मानती। कोविड होने से पहले भी कोविड को मुद्दा नहीं मान रहे थे। कोविड के दौरान भी ताली, थाली करते हुए उस मुद्दे को छोटा बनाने की कोशिश कर रहे थे। कोविड के बाद जब इतने लोग चले गए, तब उस मुद्दे को दबाने के लिए फिर वही शुरु। हिंदू-मुसलमान शुरु। इनका जो तर्क है, इनका जो प्ले ग्राउंड है, वो वही है। समाज को कैसे विभाजित रखता और व्यस्त रखना और अगर समाज व्यस्त नहीं रहेगा, तो समाज मोदी जी को व्यस्त कर देगा, ये चुनौती है।
गुजरात को लेकर पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री पवन खेड़ा ने कहा कि कोविड की न्याय यात्रा को देखा गुजरात में, वहीं बैठकर देखा, आप तो वहीं के हो आपने भी देखा होगा, उसका दवाब भी देखा सरकार पर। वही सरकार, जो आंकड़े छिपा रही थी, कुछ हद तक झुकी और वो आंकड़े उन्होंने थोड़े दिखाए। वो अलग बात है कि वो 4 लाख की बात अभी तक नहीं कर पाए, सरकार ने नहीं की, क्योंकि नीयत में खोट है। लेकिन ऐसी बात नहीं है, कांग्रेस पार्टी गुजरात में कई मुद्दों पर, क्योंकि मैं वहाँ लगातार जाता हूँ, मुझको दिखता है, सड़क पर आती है, आपने खुद बोला, जिग्नेश मेवाणी वाले प्रकरण में आधी रात को हम लोग सब जाग रहे थे, जब उनको उठाकर ले जाया जा रहा था।इसी से संबंधित एक अन्य प्रश्न पर कि ऐसे मुद्दों पर कांग्रेस खुद बाहर आई है, के उत्तर में खेड़ा ने कहा कि हमेशा आती है। पेपर लीक के मुद्दे पर, 16 बार गुजरात में पेपर लीक हुआ। शायद पिछले हफ्ते 16 था, हो सकता है, अब 18 हो गया हो, मुझे नहीं मालूम क्योंकि हर हफ्ते लीक होता है, उन मुद्दों को भी उठाने वाली एक ही पार्टी है। वो अलग बात है कि, माफी चाहता हूँ, लेकिन राष्ट्रीय मीडिया कई बार दबाव के चलते, भय के चलते दिखा नहीं पाता होगा। स्थानीय मीडिया अभी भी दिखाता है।

पंजाब के संदर्भ में पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में खेड़ा ने कहा कि एक मजाक बना दिया है देश का। जो पंजाब चला रहे हैं उन्होंने भी, जो केन्द्र में बैठे हैं, उन्होंने भी। देश की आज हंसी उड़ रही है। हम एक परिपक्व लोकतंत्र के नाम से जाने जाते थे पूरे विश्व में। शर्म आती है अब ये देखते हुए जो तथाकथित फेडरलिज्म, कहाँ से वो फेडरलिज्म? ये होता है फेडरलिज्म कि एक पुलिस दूसरी पुलिस को अपहरणकर्ता बता रही है। ये पुलिस है, किसी की निजी आर्मी नहीं है। कल मैं टीवी पर देख रहा था रिटायर्ड पुलिस वालों का दर्द। अच्छे-अच्छे ऑफिसर बैठे थे टीवी पर, सेवा निवृत। उनकी पीड़ा उनकी आंखों और उनके शब्दों में झलक रही थी और हमें बड़ा अफसोस हो रहा था कि हम जब विश्व में जाते हैं अलग-अलग देशों में, बड़े गर्व के साथ कहते हैं कि We have come from a most mature democracy. कहाँ है मैच्योरिटी, परिपक्वता उस लोकतंत्र की खत्म कर दी दो अपरिपक्व लोगों ने। एक प्रधानमंत्री हैं और दूसरे यहाँ के मुख्यमंत्री।एक अन्य प्रश्न के उत्तर में खेड़ा ने कहा कि देखिए, नियम, कानून से सरकार चलती हैं। कहीं भी कोई कानून का उल्लंघन करते हुए पाया जाए, उसके खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए। उसमें हमें मुझे नहीं लगता कोई सवाल भी उठता है। कोई भी हो, सीएम की बात तो नहीं आई कल, लेकिन मैं वैसे कह रहा हूं कि नियम कानून के हिसाब से ही सब कुछ चलता है। कल मैं भी देख रहा था, झारखंड के सीएम ने भी यही कहा कि अगर नियम कानून से हटकर कुछ हुआ हो, तो कानून अपनी कार्यवाही करे।

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