
अरविन्द उत्तम की रिपोर्ट
ग्रेटर नोएडा के थाना बिसरख पुलिस को चाइल्ड हेल्पलाइन से एक इनपुट मिला कि एक निजी अस्पताल में चंद रुपयों की खातिर एक बच्ची का सौदा किया जा रहा था। पुलिस और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए इस गिरोह का भंडाफोड़ किया है और बच्ची को सकुशल रेस्क्यू कर लिया है। इस मामले में अस्पताल की मालकिन सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

मासूम अब सुरक्षित गोद में और सौदा करने वाले यशिका गर्ग, गजेन्द्र सिंह, रंजीत सिंह पुलिस की गिरफ्त में, सेंट्रल नोएडा डीसीपी ने बताया कि 21 मार्च चाइल्ड हेल्पलाइन से एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को सूचना थी कि बिसरख थाना क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में बच्ची को गैर-कानूनी तरीके से गोद दिलाने का गोरख धंधा चल रहा है। अस्पताल का ही एक कर्मचारी इस काम के लिए 2 लाख 60 हजार रुपये की मोटी रकम मांग रहा है।

डीसीपी सेंट्रल नोएडा ने बताया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए AHTU और बिसरख पुलिस ने तुरंत एक संयुक्त टीम का गठन किया। टीम ने शिकायतकर्ता से संपर्क साधा और जाल बिछाकर अस्पताल पर छापा मारा। पुलिस की इस मुस्तैदी से न केवल बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया गया, बल्कि इस काले कारोबार में शामिल तीन अहम चेहरों निजी अस्पताल की मालकिन यशिका गर्ग, ऑपरेशन थियेटर टेक्नीशियन रंजीत सिंह और अस्पताल का सफाई कर्मी गजेन्द्र सिंह को गिरफ्तार किया. बरामद की गई बच्ची को बाल कल्याण समिति (CWC) के सामने पेश किया गया, जिसके आदेशानुसार उसे फिलहाल ‘साईं कृपा शेल्टर होम’ भेज दिया गया है। थाना बिसरख में आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि क्या इस अस्पताल से पहले भी नवजातों की खरीद-फरोख्त की गई है।
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