
अरविन्द उत्तम की रिपोर्ट
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जेपी ग्रुप के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 400 करोड़ की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच्ड कर लिया है। यह कार्रवाई जयप्रकाश सेवा संस्थान और पेज 3 बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी संपत्तियों पर की गई है। ईडी की जांच में जो धोखाधड़ी का मामला सामने आया है वह मनी के डायवर्सन का है. जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड और जेपी इन्फ्राटेक लिमिटेड ने 25,000 से अधिक घर खरीदारों से लगभग 14,599 करोड़ जुटाए थे।जिनका इस्तेमाल निर्माण के बजाय अन्य ग्रुप संस्थाओं जैसे जेपी हेल्थकेयर और जेपी स्पोर्ट्स इंटरनेशनल को डायवर्ट कर दिया गया।

ईडी के अनुसार, इस पूरे फंड डायवर्जन की योजना और क्रियान्वयन में जेपी इन्फ्राटेक के पूर्व एमडी मनोज गौड़ की केंद्रीय भूमिका रही है। मनोज गौड़ को 13 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी द्वारा जब्त संपत्तियों में जयप्रकाश सेवा संस्थान अचल संपत्तियां (ट्रस्ट से जुड़ी) संयुक्त रूप से 400 करोड़ के करीब है. पेज 3 बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड और हनी कटियाल संयुक्त संपत्तिया 400 करोड़ करीब है. यह मामला दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज कई प्राथमिकियों (FIR) से जुड़ा है। नोएडा में जेपी विश टाउन और जेपी ग्रीन्स परियोजनाओं के घर खरीदारों ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और विश्वासघात के आरोप लगाते हुए शिकायतें दर्ज कराई थीं। कई खरीदारों ने 2010 में घर बुक किए
थे और वे आज भी कब्जे का इंतजार कर रहे हैं।
वर्तमान स्थिति यह है कि ईडी की यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है। जहां जेपी इंफ्राटेक का अधिग्रहण सुरक्षा ग्रुप द्वारा किया जा चुका है, वहीं जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण के लिए अडानी इंटरप्राइजेज की बोली को लेनदारों ने मंजूरी दे दी है। फिलहाल ईडी इस मामले में धन के प्रवाह और अन्य लाभार्थियों की विस्तृत जांच कर रही है और आने वाले समय में और भी संपत्तियां कुर्क की जा सकती हैं।
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