अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस ने प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शाही स्नान से रोके जाने और उनके साथ हुए दुर्व्यवहार की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने कहा कि खुद को हिंदुओं का मसीहा बताने वाली भाजपा सरकार हिंदु संतों का अपमान कर रही है और आज हालात यह हैं कि शंकराचार्य को अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका है और अनशन पर बैठने को मजबूर होना पड़ा हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई संवेदनशील प्रतिक्रिया नहीं आई है।कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी के मीडिया व पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन एवं पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों और पुलिस के बीच हुई झड़प का वीडियो दिखाते हुए आरोप लगाया कि भाजपा नेता न काम के हैं, न राम के; वे सिर्फ सत्ता और धन के हैं। यही भाजपा का असली चेहरा है, जिसे जनता के सामने लाना जरूरी है।कांग्रेस नेता ने कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले 40 वर्षों से नियमित रूप से शाही स्नान करते आ रहे हैं और यह पहली बार है जब उन्हें इस अखंड धार्मिक परंपरा से रोका गया है। उन्होंने कहा कि मौनी अमावस्या का शाही स्नान एक अखंड परंपरा है, जिसमें विघ्न डालना असुरों का काम माना जाता है।

खेड़ा ने कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्वयं सार्वजनिक रूप से भगदड़ की आड़ में उनके खिलाफ किसी साज़िश की कोशिश की आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि जिस राज्य में तथाकथित ‘ट्रिपल इंजन सरकार’ है, वहां एक शंकराचार्य खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद से शंकराचार्य जी अनशन पर बैठे हैं, लेकिन सरकार में किसी को फर्क नहीं पड़ रहा है। शंकराचार्य के साथ हुए दुर्व्यवहार को शर्मनाक बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए, अन्यथा वे ‘सनातनी’ नहीं, ‘धनातनी’ कहलाएंगे। पवन खेड़ा ने कहा कि भाजपा सरकार पिछले 12 वर्षों से केंद्र में सत्ता में है और हिंदुओं के नाम पर राजनीति करती रही है, लेकिन आज वही सरकार शंकराचार्य एवं उनके समर्थकों के साथ दुर्व्यवहार कर रही है, उनके शिष्यों को बाल पकड़कर घसीटा जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि शाही स्नान जैसी सदियों पुरानी परंपरा को रोकने का दुस्साहस किसी सरकार को कैसे हुआ, जबकि इस परंपरा को न मुगलों ने रोका था और न ही अंग्रेजों ने।खेड़ा ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का अपराध केवल इतना है कि वे कमियों पर सवाल उठाते हैं, सरकार की आलोचना करते हैं, अयोध्या में आधे-अधूरे राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा पर आपत्ति जताते हैं, महाकुंभ में अव्यवस्थाओं और कोविड काल के दौरान गंगा में तैरती लाशों का उल्लेख करते हैं।कांग्रेस नेता ने सरकार की दोगली प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को जेड-प्लस सुरक्षा दी जाती है, वहीं दूसरी ओर शंकराचार्य के समर्थकों के साथ मारपीट की जाती है। शंकराचार्य को उनकी पालकी पर जाने तक की अनुमति नहीं दी जाती। उन्होंने सवाल किया कि क्या मोहन भागवत शंकराचार्य से बड़े हो गए हैं?
वहीं वाराणसी में देवी अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति तोड़े जाने और योगी सरकार द्वारा उसके वीडियो को एआई-जनरेटेड बताए जाने पर खेड़ा ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि यह एआई नहीं, बल्कि सरकार की बेहयाई है। अहिल्याबाई के वंशजों द्वारा ज्ञापन दिए जाने के बावजूद सरकार द्वारा इसे नकारना झूठ की राजनीति का हिस्सा है।खेड़ा ने उदयपुर के कन्हैया लाल हत्याकांड का भी जिक्र करते हुए केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि तत्कालीन गहलोत सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पीड़ित परिवार को सहायता प्रदान की थी और मामला एनआईए को सौंप दिया था, लेकिन 12 साल से केंद्र में बैठी सरकार अब तक हत्यारों को सजा नहीं दिला पाई है।खेड़ा ने यह भी याद दिलाया कि महाकुंभ के दौरान बड़े-बड़े अमीर लोगों के लिए अलग व्यवस्थाएं की गई थीं। उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए आस्था व्यापार है और व्यापार ही उसकी आस्था है; भाजपा नेता धर्म के पीछे छिपकर सबको मूर्ख बनाते हैं और सिर्फ अमीरों के हितों का ध्यान रखते हैं।
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