अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को चेतावनी दी कि मध्य-पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण भारत में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल से जुड़ा गंभीर संकट पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की दोषपूर्ण विदेश नीति के कारण भारत की ऊर्जा सुरक्षा कमजोर हुई है और किसी दूसरे देश का राष्ट्रपति यह तय कर रहा है कि भारत किससे तेल खरीदे। लोकसभा में राहुल गांधी ने केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के कुख्यात यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ संबंधों को लेकर मोदी सरकार पर तीखा प्रहार किया और पुरी की बेटी को जॉर्ज सोरोस से पैसा मिलने का खुलासा किया। उन्होंने कहा की पेट्रोलियम मंत्री खुद स्वीकार कर चुके हैं कि वे जेफरी एपस्टीन के मित्र थे। उन्होंने एक दस्तावेज का हवाला देते हुए यह भी कहा कि हरदीप पुरी की बेटी को अरबपति जॉर्ज सोरोस से पैसा मिला है। इस दौरान राहुल गांधी के वक्तव्य पर सत्तापक्ष ने बौखलाहट में व्यवधान शुरू कर दिया और उन्हें बोलने नहीं दिया गया।
ऊर्जा संकट का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि अभी तो यह शुरुआत है और मध्य-पूर्व युद्ध से भारत पर गंभीर असर पड़ने वाले हैं। उन्होंने बताया कि दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति जिस प्रमुख समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से होती है, वह बंद हो गया है। उन्होंने आगाह किया कि इसका भारत पर विशेष रूप से असर पड़ेगा क्योंकि देश में तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है। उन्होंने मौजूदा स्थिति की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि देश में कई जगह रेस्टोरेंट बंद हो रहे हैं, लोगों में एलपीजी की कमी को लेकर घबराहट है। अभी भी थोड़ा समय है, मोदी सरकार को तुरंत इस संकट को दूर करने के लिए तैयारी शुरू करनी चाहिए। अगर तैयारी नहीं की, तो फिर करोड़ों भारतीयों का भारी नुकसान होगा। ऊर्जा सुरक्षा को किसी भी देश की बुनियाद बताते हुए उन्होंने हैरानी जताई कि मोदी सरकार ने यह अनुमति क्यों दी कि किसी दूसरे देश का राष्ट्रपति यह तय करे कि भारत किससे तेल खरीदे, किससे गैस खरीदे, वह रूस से तेल खरीद सकता है या नहीं और विभिन्न तेल आपूर्तिकर्ताओं के साथ हमारे संबंध कैसे हों।

संसद में अपने वक्तव्य से पहले पत्रकारों से बातचीत में राहुल गांधी ने कहा कि कम्प्रोमाइज्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को दांव पर लगा दिया और अमेरिकी दबाव में वह स्वतंत्र रूप से फैसले नहीं ले पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अमेरिका में चल रहे अडानी केस और एपस्टीन फाइल्स की वजह से घबराए हुए हैं और इसीलिए सदन में भी नहीं आ रहे। प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि घबराने (पैनिक) की जरूरत नहीं है, लेकिन हकीकत यह है कि अमेरिकी दबाव में वह खुद घबराए हुए हैं। सरकार की गलत प्राथमिकताओं की तरफ इशारा करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि अगर ईरान के स्तर पर यह समस्या सुलझ जाती है, तब भी यह समस्या खत्म नहीं होगी, क्योंकि दुनिया और उसका ढांचा बदल रहा है। इसलिए सरकार को देश के हितों की रक्षा के लिए हिंदुस्तान को केंद्र बनाकर सोचना होगा। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री इस समय अमेरिकी दबाव में फंसे हुए हैं, लेकिन फिर भी उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी ऊर्जा सुरक्षा के बारे में निर्णय हम ही लें।
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