अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस ने कहा है कि भाजपा सरकार ने उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को बदहाल कर दिया है और छात्र पढ़ाई,कोचिंग एवं हॉस्टल का खर्च उठाने के लिए स्वास्थ्य जोखिम में डालकर महीने में दो से चार बार अपना खून तक बेचने को मजबूर हो रहे हैं। पार्टी ने प्रदेश में चरमराती शिक्षा व्यवस्था, छात्रवृत्ति न मिलने, पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में घोटालों और छात्रों की बढ़ती आत्महत्याओं पर भाजपा सरकार से जवाब मांगा है। कांग्रेस ने कहा कि शिक्षा की बढ़ती लागत और परीक्षाओं में लगातार हो रही गड़बड़ियों ने युवाओं के भविष्य को संकट में डाल दिया है।

कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान उत्तर प्रदेश के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक अभय दुबे ने एक दैनिक समाचार पत्र के स्टिंग ऑपरेशन का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में छात्र इस कदर आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं कि उन्हें पढ़ाई, कोचिंग और हॉस्टल का खर्च उठाने के लिए अपना खून तक बेचना पड़ रहा है।

गौतम ने कहा कि प्रयागराज में इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन ब्लड बैंक के आसपास सक्रिय दलाल छात्रावासों में रह रहे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को चिन्हित कर फर्जी दस्तावेजों के सहारे उन्हें खून बेचने के दलदल में धकेल रहे हैं। उन्होंने बताया कि छात्र महीने में दो से चार बार तक अपना खून बेच रहे हैं और एक यूनिट खून के बदले उन्हें 4,000 से 5,000 रुपये दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि पुरुषों को तीन महीने एवं महिलाओं को छह महीने में केवल एक बार रक्तदान करना चाहिए, वरना एनीमिया और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है। गौतम ने अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़े वर्गों के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति के आवेदनों को जानबूझकर खारिज करने या लंबित रखने के कारण पात्र विद्यार्थियों को सहायता नहीं मिलने समेत अन्य समस्याओं पर भी सवाल उठाए । उन्होंने बताया कि प्रदेश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के करीब पांच लाख विद्यार्थी छात्रवृत्ति से वंचित रह गए, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हुई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023-24 में उत्तर प्रदेश को अनुसूचित जाति की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए केंद्र से मिलने वाला हिस्सा 674 करोड़ 83 लाख रुपये था, जो 2024-25 में घटकर 366 करोड़ 02 लाख रुपये रह गया। कांग्रेस नेता ने वर्ष 2018 से लेकर अब तक उत्तर प्रदेश में हुए प्रमुख पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में घोटालों के मामलों की लंबी सूची भी सामने रखी और छात्रों की बढ़ती आत्महत्याओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई पूरी करने के लिए आर्थिक संघर्ष करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों के कारण उनकी वर्षों की मेहनत पर पानी फिर रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा की बढ़ती लागत और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों की दोहरी मार युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर रही है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में हर महीने औसतन 132 छात्र आत्महत्या कर रहे हैं। वहीं, अभय दुबे ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि शिक्षा के बदले खून का सौदा करने वाले नरपिशाच उत्तर प्रदेश और केंद्र की सत्ता में बैठे हैं। इस घृणित पाप के लिए देश उन्हें माफ नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि एक तरफ छात्र अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए खून बेच रहे हैं, तो दूसरी तरफ पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं के घोटालों से उनका भविष्य छीना जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई परीक्षाओं के पेपर लीक होने के तार सत्ता में शामिल लोगों से जुड़े हुए मिले हैं। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाते हुए कहा कि जिस राज्य में एक भी परीक्षा शुचितापूर्ण ढंग से न हो पा रही हो और युवाओं को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए अपने शरीर का खून तक बेचना पड़ रहा हो, वहां की सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
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