अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी कहा है कि भारत का डेटा दुनिया में सबसे कीमती है, लेकिन मोदी सरकार व्यापार समझौते के जरिए इसे अमेरिका को सौंप रही है। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी ताकत को समझते हुए ही वैश्विक स्तर पर बातचीत करनी चाहिए। केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित टेक्नोपार्क में आईटी पेशेवरों और उद्यमियों के साथ संवाद के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि भारत के पास प्रतिभाशाली मानव संसाधन, विविधता और मजबूत इंजीनियरिंग तथा मेडिकल क्षमता है। इन ताकतों के आधार पर भारत लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखते हुए विश्वस्तरीय उत्पादन और औद्योगिक व्यवस्था खड़ी कर सकता है और सही नीतियों व दूरदृष्टि के साथ चीन से मुकाबला कर सकता है।
राहुल गांधी ने मौजूदा आर्थिक ढांचे की आलोचना करते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था कुछ बड़े व्यवसायिक समूहों के नियंत्रण में सिमटती जा रही है। उनके अनुसार बड़े उद्योगपति मुख्यतः विदेशी उत्पाद बेच रहे हैं, जिससे घरेलू विनिर्माण और स्थानीय उत्पादकों को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को “उत्पादन विरोधी” बताते हुए कहा कि इससे रोजगार सृजन की रीढ़ माने जाने वाले छोटे और मध्यम उद्योग प्रभावित हुए हैं। गांधी ने कहा कि मौजूदा कर व्यवस्था उत्पादन आधारित राज्यों को नुकसान पहुंचाती है, जबकि उपभोग आधारित राज्यों को अपेक्षाकृत लाभ मिलता है। कांग्रेस नेता ने कहा कि नौकरियां दुनिया से खत्म नहीं होतीं, बल्कि एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित होती हैं। उनके अनुसार देशों के बीच आज प्रतिस्पर्धा इस बात को लेकर है कि वे अपने नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर किस तरह आकर्षित करते हैं, जिसके लिए बेहतर कनेक्टिविटी, अवसंरचना और मजबूत औद्योगिक नीति आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि टिकाऊ रोजगार मुख्यतः उत्पादन क्षेत्र से आता है, न कि केवल उपभोग से। आईटी क्षेत्र अवसर पैदा करता है, लेकिन भारत जैसे बड़े देश में व्यापक स्तर पर रोजगार देने की क्षमता विनिर्माण उद्योगों में है। गांधी ने कहा कि ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और शिपबिल्डिंग जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की क्षमता है, हालांकि वर्तमान में इन क्षेत्रों में चीन का मजबूत औद्योगिक वर्चस्व है।उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में देशों को अपनी नीतियां नए औद्योगिक रुझानों के आधार पर बनानी होंगी। गांधी के अनुसार पहले ब्रिटेन ने स्टीम इंजन और कोयले के जरिए तथा बाद में अमेरिका ने पेट्रोलियम के नियंत्रण से औद्योगिक शक्ति हासिल की। अब वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा का केंद्र इलेक्ट्रिक मोटर, बैटरी और ऑप्टिक्स जैसे क्षेत्रों में है, जिनमें चीन अग्रणी है।गांधी ने चेतावनी दी कि पर्याप्त रोजगार सृजन नहीं होने पर समाज में असंतोष और टकराव बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए रोजगार सृजन किसी भी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि गरीबों को मिलने वाली सहायता को अक्सर “रेवड़ी” कहकर आलोचना की जाती है, जबकि बड़े उद्योगपतियों को सस्ती जमीन, कर रियायतें और ऋण माफी मिलने पर उसे विकास बताया जाता है। गांधी ने सवाल किया कि एक ही देश में दो अलग-अलग मानदंड क्यों अपनाए जाते हैं।संवाद के दौरान एक प्रश्न के उत्तर में गांधी ने कहा कि यदि वे राजनीति में नहीं होते, तो संभवतः एयरोस्पेस क्षेत्र में कोई उद्यम कर रहे होते। उन्होंने कहा कि वे अपने पिता और चाचा की तरह पायलट हैं और विमानन उनके परिवार की परंपरा का हिस्सा रहा है।
Related posts
0
0
votes
Article Rating
Subscribe
Login
0 Comments
Oldest
Newest
Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments

