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गुडगाँव हरियाणा

अपने-पराए के भेद से उठकर समाज की भलाई का कार्य करें लोक सेवक : मनोहर लाल


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
गुरुग्राम:हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि लोक सेवा से जुड़े सभी अधिकारी व कर्मचारी अपने व पराए  के भेद से ऊपर उठकर समाज की भलाई के लिए कार्य करें। प्रदेश के साढ़े तीन लाख अधिकारियों के कर्मचारियों के मन में जनसेवा की भावना विकसित करने के लिए अब सामान्य कार्मिक प्रशिक्षण के साथ नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने यह बात बुधवार को गुरुग्राम के सेक्टर- 44 स्थित अप्रैल हाउस में हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान (हिपा), गुरुग्राम द्वारा आयोजित नैतिकता शिविर को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित करते हुए कही। इससे पहले उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।

मनोहर लाल ने कार्यक्रम में उपस्थित गुरुग्राम जिला के अधिकारियों व कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सभी अधिकारी लोकहित में समर्पित होकर लोक सेवक के रूप में करें। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े एक संस्मरण का जिक्र करते हुए बताया कि वर्ष 2013 में प्रधानमंत्री बनने से पूर्व जब उनसे सबसे बड़ी चुनौती का सवाल पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया था कि राजनीति और उससे जुड़े लोगों की छवि को बदलने का लक्ष्य लेकर वह चलेंगे। प्रधानमंत्री बनने के उपरांत उन्होंने इस लक्ष्य को प्राप्त करके भी दिखाया। वर्तमान सरकार पर किसी प्रकार का दाग न होना इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है।उन्होंने इस बात पर खुशी जाहिर करते हुए बताया कि हरियाणा में सरकारी अधिकारी व कर्मचारी के आचरण में पवित्रता लाने की दिशा में आज एक बड़े कार्यक्रम की शुरुआत हो रही है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य यह है कि सरकारी सेवा में आने के उपरांत लोक सेवक के मन में यह संस्कार होना चाहिए कि उन्हें समाज की सेवा की जिम्मेवारी मिली है। नैतिकता बताई तो जा सकती है लेकिन इसे समझाया नहीं जा सकता। यह तो ऐसा भाव है जिसे जीवन में लाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े आठ वर्ष के कार्यकाल में उन्हें इस बात का गर्व है कि समाज की सेवा के माध्यम से प्रदेश को आगे बढ़ाने का कार्य किया। इसी सोच पर आगे बढ़ते हुए छोटी-छोटी बातों का ध्यान कर हम अपने प्रदेश को अच्छा-दिव्य व गौरवशाली बनाने में सक्षम होंगे।इससे पहले गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने भी नैतिकता के विषय को गीता के विभिन्न श्लोकों व महाभारत से जुड़े प्रसंगों के साथ बड़े ही सहज भाव से कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को समझाया। उन्होंने समुद्र और बादल का एक उदाहरण देकर बताया कि समुद्र नदियों का जल बटोर लेता है लेकिन उसके एक गिलास पानी से इंसान की प्यास नहीं बुझती। वहीं प्रकृति का वरदान बरसात में देने का भाव छिपा है जिसके चलते बादलों से बरसने वाली हर बूंद मानवता का कल्याण करती है। उन्होंने नैतिकता शिविर के आयोजन को सार्थक बताते हुए हरियाणा सरकार की प्रशंसा की और गीता की उपदेश स्थली हरियाणा को इस तरह प्रेरक कार्यक्रम नई लोकप्रियता दिलाएगा।कार्यक्रम को रामकृष्ण मिशन के स्वामी सर्वलोकानंद ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सुशासन के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही व विश्वसनीयता का होना बेहद आवश्यक है। इसके लिए निस्वार्थ का भाव नैतिकता की आधारशिला है जोकि मानवीय जीवन का केंद्रबिंदु भी है। उन्होंने नैतिकता शिविर का प्रदेश के मानव संसाधन के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। अच्छे मानव संसाधन से ही देश आगे बढ़ता है।मुख्य सचिव संजीव कौशल ने नैतिकता शिविर के आयोजन व हिपा द्वारा आरंभ कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हरियाणा देश में ऐसा पहला राज्य है जहां से आचरण में नैतिकता व पवित्रता लाने की सोच का कार्यक्रम शुरू हुआ है। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम से प्रदेश के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को जोड़ा जाएगा। वहीं हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान, गुरुग्राम की महानिदेशक चंद्रलेखा  मुखर्जी ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का आभार जताया और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।  

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