अजीत सिन्हा/नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के सिंगूर में 830 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि कल वे मालदा में थे और आज उन्हें हुगली की जनता से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विकसित भारत के लिए पूर्वी भारत का विकास आवश्यक है और इस लक्ष्य को लेकर केंद्र सरकार निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि बीते एवं वर्तमान के कार्यक्रम इस संकल्प को और मजबूत करते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा किया कि इस दौरान उन्हें पश्चिम बंगाल के विकास से संबंधित सैकड़ों करोड़ रुपये की परियोजनाओं की आधारशिला रखने और उनका उद्घाटन करने का अवसर मिला।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कल देश की पहली वंदेभारत स्लीपर ट्रेन पश्चिम बंगाल से चलाई गई। उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल को लगभग आधा दर्जन नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का लाभ भी मिला है। उन्होंने यह उल्लेख किया कि आज तीन और अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि इन ट्रेनों में से एक ट्रेन उनके सांसदीय क्षेत्र वाराणसी और बंगाल के बीच संपक्त को और मजबूत करेगी।

उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली और तमिलनाडु के लिए भी अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें लॉन्च की गई हैं। प्रधानमंत्री ने यह कहा कि पिछले 24 घंटे पश्चिम बंगाल की रेल कनेक्टिविटी के लिए अभूतपूर्व रहे हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बंगाल में जलमार्ग विकास की अपार संभावनाएं हैं और केंद्र सरकार इस दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि बंदरगाह आधारित विकास के लिए आवश्यक अवसंरचना के निर्माण के लिए सहायक है। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले ही बंदरगाहों एवं नदी-जलमार्गों से संबंधित परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया गया है। उन्होंने कहा कि ये पश्चिम बंगाल और भारत के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि ये वह स्तंभ हैं जिन पर पश्चिम बंगाल को विनिर्माण, व्यापार एवं परिचालन का एक प्रमुख केंद्र बनाया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने इन परियोजनाओं के लिए सभी लोगों को बधाई दी।केंद्रीय मंत्री सरबानंदा सोनोवाल ने इस अवसर पर कहा,“830 करोड़ रुपये की अवसंरचना परियोजनाओं का शुभारंभ पश्चिम बंगाल में जलमार्ग एवं रेल आधारित परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ये परियोजनाएं माल ढुलाई को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएंगी, बहुआयामी संपर्क को मजबूत करेंगी तथा आधुनिक, सुरक्षित और ऊर्जा-कुशल परिवहन प्रणालियों के माध्यम से यात्रियों की सुगम यात्रा सुनिश्चित करेंगी, साथ ही पूरे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधि और रोजगार अवसर को बढ़ावा देगी।”केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सरबानंदा सोनोवाल ने इस अवसर पर अंतर्देशीय जलमार्गों के पुनरुद्धार एवं पुनर्जीवन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व के बारे में बोलते हुए कहा,“दशकों तक, भारत के अंतर्देशीय जलमार्ग अपनी अपार क्षमता के बावजूद काफी हद तक अनछुए रहे। प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, इस क्षेत्र को एक आधुनिक, कुशल एवं किफायती परिवहन माध्यम में व्यापक रूप से रूपांतरित किया गया है। आज, अंतर्देशीय जलमार्ग भारत के बहुआयामी लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभर रहे हैं जिससे सड़कों और रेलवे पर भीड़ कम हो रही है, लॉजिस्टिक्स लागत घट रही है और पूरे देश में सतत विकास को गति मिल रही है।”नदी आधारित लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने एवं स्थायी अंतर्देशीय जल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए एक बड़े प्रयास के तहत, बंदरगाहों और अंतर्देशीय जलमार्गों के क्षेत्र में 552 करोड़ रुपये के परियोजनाएं शुरू की गईं, जो पारंपरिक माल मार्गों के भीड़-भाड़ को कम करने और बहुमुखी कनेक्टिविटी का विस्तार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पूरे देश में स्थायी विकास को बढ़ावा देना।एक प्रमुख उपलब्धि बालागढ़ में विस्तारित बंदरगाह द्वार प्रणाली का उद्घाटन हा, जिसे श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह प्राधिकरण (एसएमपीए) द्वारा विकसित किया गया है। कोलकाता से लगभग 45 समुद्री मील ऊपर की ओर स्थित इस सुविधा का उद्देश्य कोलकाता डॉक प्रणाली पर भीड़भाड़ को कम करना और अंतर्देशीय जलमार्गों के माध्यम से माल की कुशल आवाजाही को सक्षम बनाना है।बालागढ़ सुविधा में 2.7 मिलियन टन प्रति वर्ष की अनुमानित क्षमता के साथ कंटेनरीकृत और कोयला कार्गो को संभालने में सक्षम दो बर्थ के साथ एक आधुनिक बार्ज टर्मिनल शामिल है। टर्मिनल राष्ट्रीय जलमार्ग -1 (गंगा-भागीरथी-हुगली) के साथ निर्बाध रूप से एकीकृत है और सड़क और रेल संपर्क द्वारा समर्थित है, जो पूर्वी क्षेत्र में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स को मजबूत करता है।साइट पर सहायक संरचना में हाल ही में निर्मित रोड ओवरब्रिज और उन्नत ड्रेज़िंग सुविधाएं शामिल हैं, जो पूरे साल निरंतर नौवहन एनं कार्गो जहाजों के लिए बेहतर टर्नअराउंड समय को सक्षम बनाती हैं।स्वच्छ परिवहन पहल के भाग के रूप में, प्रधानमंत्री ने 50 यात्री क्षमता वाली हाइब्रिड इलेक्ट्रिक एल्यूमिनियम कैटामरण का भी उद्घाटन किया, जो हरित आंतरिक जल परिवहन की दिशा में एक प्रमुख मील का पत्थर है। यह नौका 12 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की गई है और उन्नत लिथियम-टाइटेनेट बैटरी प्रौद्योगिकी द्वारा संचालित है, जो कोलकाता में आंतरिक जलमार्गों पर यात्रियों की आवाजाही के लिए ऊर्जा-कुशल और पर्यावरणीय रूप से स्थायी विकल्प प्रदान करती है।सोनोवाल ने आगे कहा, “पश्चिम बंगाल हमेशा से भारत के समुद्री व्यापार का प्रवेश द्वार रहा है और प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में, राज्य एक बार फिर पूर्वी भारत के विकास के इंजन के रूप में उभर रहा है। मजबूत बंदरगाहों, अंतर्देशीय जलमार्गों और रेल संपर्क के साथ, पश्चिम बंगाल देश के शेष भाग और पूर्वोत्तर के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बन रहा है, जो पूर्वी भारत को भारत की अगली विकास यात्रा का केंद्र बनाने के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को बल देता है।”ये पहलें सरकार की व्यापक दृष्टि के अनुरूप हैं, जो आंतरिक जलमार्गों का उपयोग लागत-कुशल, पर्यावरण-अनुकूल और भरोसेमंद परिवहन के रूप में करने के साथ-साथ बंदरगाह-प्रधान विकास को बढ़ावा देने और सड़क एवं रेल नेटवर्क पर दबाव कम करने की दिशा में है।रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करते हुए, प्रधानमंत्री ने 280 करोड़ रुपये के रेलवे अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन किया और क्षेत्रीय और लंबी दूरी की यात्रा को सुधारने के लिए नई यात्री सेवाओं का शुभारंभ किया। प्रमुख पहलों में15-किमी जयरामबाती–बरोगोपीनाथपुर–मयनापुर रेल सेक्शन का कमीशनिंग शामिल थी, जो 83-किमी तारकेश्वर–बिष्णुपुर रेल परियोजना का हिस्सा है और बैंकुरा जिले में सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की उम्मीद है। जयरामबती और मयनापुर के बीच एक नई यात्री ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया, जिससे दैनिक यात्रियों और छात्रों को लाभ होगा। इसके अलावा, राष्ट्रीय संपर्क को बढ़ावा देने के लिए तीन अमृत भारत एक्सप्रेस सेवाएं शुरू की गईं – संतरागाछी को तांबरम से, हावड़ा को आनंद विहार टर्मिनल से और सियालदह को बनारस से जोड़ना – जिससे देश भर में आर्थिक, सांस्कृतिक और धार्मिक गलियारों को मजबूती मिलेगी।सिंगुर से वर्चुअल रूप से आयोजित उद्घाटन भारतीय सरकार की पश्चिम बंगाल और पूर्वी क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स, गतिशीलता और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल, सी वी आनंद बोस, केंद्रीय मंत्री, सरबानंद सोनोवाल, शांतनु ठाकुर, सुकांत मजूमदार समेत अन्य गणमान्य व्यक्ति इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री मोदी सरकार के अवसंरचना विकास के समग्र और भविष्य-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती हैं, जो सतत अंतरतटीय जल परिवहन को आधुनिक रेल संचार के साथ जोड़ती हैं। साथ मिलकर, इनसे लॉजिस्टिक लागतों में कमी, भीड़-भाड़ में राहत, यात्री गतिशीलता में सुधार और पश्चिम बंगाल की भारत के मुख्यभूमि और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के बीच व्यापार और संपर्क के लिए महत्वपूर्ण प्रवेशद्वार के रूप में भूमिका को मजबूत करने की उम्मीद है।
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