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अपराध नोएडा

निठारी कांड के आरोपियों सुरेन्द्र कोली और मनिंदर सिंह पंढेर की फांसी की सजा रद्द होने से आहत है निठारी के पीड़ित परिवार


अरविन्द उत्तम की रिपोर्ट 
नोएडा: नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड में इलाहाबाद हाई कोर्ट से निठारी कांड के आरोपियों सुरेंद्र कोली और मनिंदर सिंह पंढेर को बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्र व जस्टिस एस एच ए रिजवी की खंडपीठ ने निठारी कांड के आरोपियों को ट्रायल कोर्ट से मिली फांसी की सजा को रद्द कर दिया। दोषी सुरेंद्र कोहली की 12 मामलों में मिली फांसी और मनिंदर सिंह पुंडीर को दो मामलों में मिली फांसी की सजा को रद्द कर दोनों को निर्दोष करार दिया है। ऐसे में अब सीबीआई  इस सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट का रुख अख्तियार कर सकती है।

नोएडा के सेक्टर 31 स्थित निठारी गाँव से सटे डी-5 कोठी में 2005 से 2006 के हुए खौफनाक और इस दिल दहला देने वाले 2005 से 2006 के बीच हुए नोएडा के निठारी कांड में सीबीआई ने 16 मामले दर्ज किए थे। इसको लेकर एजेंसी ने चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें सुरेंद्र कोहली को हत्या, अपहरण, बलात्कार और सबूत मिटाने का मुल्जिम बनाया था,जब कि आरोपी मनिंदर सिंह पंढेर को मानव तस्करी का भी आरोपी बनाया गया था। निठारी कांड के दोनों मुख्य आरोपियों को निचली अदालत से मिली फांसी की सजा बरकरार रखने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच में अपीलें दायर की थी। और दलील दी कि इन घटनाओं का कोई चश्मदीद मौजूद नहीं है. उन्हें सिर्फ वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर ये सजा सुनाई गई है.

आज दोषी सुरेंद्र कोहली की 12 मामलों में  मिली फांसी और मनिंदर सिंह पुंडीर को दो मामलों में मिली फांसी की सजा को रद्द कर दिया है कोर्ट ने इन दोनों केशव में सुरेंद्र कोहली और इंदर सिंह पंढेर को मनिंदर सिंह पंढेर को निर्दोष करार दिया है। इस सजा के रद्द होने से मृतक ज्योति का मां काफी आहत महसूस कर रही है. तेरह साल पुराना यह मामला उस समय सुर्खियां बना था, सेक्टर-31 स्थित निठारी गाँव से वर्ष 2006 में एकाएक कर 17 बच्चों के लापता होने की जांच कर रही सेक्टर 20 थाने की पुलिस को जांच के दौरान निठारी गांव की कोठी नंबर डी-5 से एक नरकंकाल मिला था। वहीं, कोठी के पास नाले से बच्चों के अवशेष बरामद किए गए थे। चर्चाओं में आने के बाद यह पूरा मामला से देश भर में सनसनी  फैल गयी थी। यहां से मानव शरीर के हिस्सों के पैकेट मिले थे। नरकंकालों को नाले में फेंका गया था। जिसके बाद इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी. उत्तराखंड का रहने वाला सुरेंद्र कोली डी-5 कोठी में मोनिंदर सिंह पंढेर का नौकर था। परिवार के पंजाब चले जाने के बाद दोनों कोठी में रह रहे थे।

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