Athrav – Online News Portal
गुडगाँव राष्ट्रीय हरियाणा हाइलाइट्स

हरियाणा सरकार की न्याय के प्रति संवेदनशीलता राज्य में न्यायिक ढांचे को मजबूत कर रही है: मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
गुरुग्राम: भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित न्यायिक परिसरों का निर्माण न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने के प्रति हरियाणा सरकार की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता का स्पष्ट प्रमाण है। राज्य सरकार के सक्रिय सहयोग से हरियाणा में न्यायिक अवसंरचना को महत्वपूर्ण रूप से सुदृढ़ किया जा रहा है और न्याय टावर जैसी न्यायिक इमारतें न्याय प्रशासन के लिए अधिक अनुकूल वातावरण बनाने में योगदान देंगी। भारत के मुख्य न्यायाधीश रविवार को गुरुग्राम में न्याय टावर के उद्घाटन समारोह में उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे।भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने रविवार को गुरुग्राम में ‘टावर ऑफ जस्टिस’ न्यायिक परिसर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल, केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा, न्यायमूर्ति हरसिमरन सिंह सेठी, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की भवन समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति दीपक सिब्बल और न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ उपस्थित थे। इसी कार्यक्रम के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने वर्चुअल माध्यम से नूह जिले में स्थित तावडू और पुन्हाना न्यायिक परिसरों की आधारशिला भी रखी।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने न्याय के टावर के निर्माण में योगदान देने वाले श्रमिकों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि यह अवसर उनके लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने याद दिलाया कि जनवरी 2017 में, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में सेवा करते हुए, उन्हें इस न्यायिक परिसर की आधारशिला रखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम, जो कभी मुख्य रूप से कृषि के लिए जाना जाता था, आज उद्योग, नवाचार और निवेश का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। फॉर्च्यून 500 कंपनियों में से आधे से अधिक के क्षेत्रीय कार्यालय गुरुग्राम में हैं, जबकि 1,500 से अधिक भारतीय कंपनियां और स्टार्टअप शहर में कार्यरत हैं। व्यापार और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के साथ, संपत्ति, प्रौद्योगिकी, अनुबंध और रोजगार से संबंधित विवाद भी बढ़ गए हैं। वर्तमान में, गुरुग्राम की अदालतें 24,000 से अधिक दीवानी विवादों, लगभग 1,000 वाणिज्यिक विवादों और परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत एक लाख से अधिक मामलों का निपटारा कर रही हैं। ये आंकड़े न्यायिक प्रणाली की बढ़ती जिम्मेदारी को दर्शाते हैं। ऐसे समय में, न्याय का यह टावर केवल एक आधुनिक इमारत नहीं है, बल्कि न्याय तक पहुंच को अधिक प्रभावी बनाने का एक साधन है। उन्होंने कहा कि अदालतों का वास्तविक महत्व उनकी भव्य इमारतों में नहीं, बल्कि इस बात में निहित है कि वे नागरिकों और न्याय के बीच की दूरी को कितनी प्रभावी ढंग से कम करती हैं। यह परिसर इसी दृष्टिकोण का प्रतीक है।न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि अतिरिक्त न्यायालयों के निर्माण से अधिक मामलों की सुनवाई में सुविधा होगी, लंबित मामलों का निपटारा तेजी से होगा और न्यायिक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, विशेष रूप से वाणिज्यिक विवादों और परक्राम्य लिखत अधिनियम के अंतर्गत आने वाले मामलों में। उन्होंने कहा कि प्राथमिकता हमेशा एक ऐसी न्यायिक प्रणाली स्थापित करने की होनी चाहिए जो कुशल और निष्पक्ष दोनों हो। न्याय में तेजी आवश्यक है, लेकिन यह संवैधानिक मूल्यों की कीमत पर कभी नहीं होनी चाहिए। आधुनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, परिसर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और सुव्यवस्थित न्यायिक अभिलेख कक्ष जैसी सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। परियोजना की एक अन्य महत्वपूर्ण विशेषता प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र है, जो उच्च न्यायालय की देखरेख में कार्य करेगा।उन्होंने आगे कहा कि उद्देश्य एक ऐसी न्यायपालिका का निर्माण करना है जो आधुनिक होने के साथ-साथ मानवीय भी हो, तकनीकी रूप से उन्नत होने के साथ-साथ संवैधानिक मूल्यों में दृढ़ हो और प्रत्येक मामले के पीछे छिपे मानवीय जीवन को समझने के लिए पर्याप्त संवेदनशील हो। मामलों के शीघ्र निपटान पर ध्यान केंद्रित करते हुए, यह सुनिश्चित करने के लिए समान प्रयास किए जाने चाहिए कि आर्थिक, सामाजिक या प्रक्रियात्मक बाधाओं के कारण कोई भी नागरिक न्याय से वंचित न रह जाए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि न्याय का यह टावर केवल एक भव्य संरचना बनकर नहीं रहेगा, बल्कि प्रत्येक नागरिक के लिए निष्पक्ष, प्रभावी और करुणामय न्याय का प्रतीक बनकर उभरेगा।

Related posts

राहुल बोले- प्रधानमंत्री मोदी अरबपतियों के लिए काम करना बंद कर देश की जनता के लिए काम करें

Ajit Sinha

जुआ और सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए हरियाणा सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक 2025 सर्वसम्मति से पारित, लगाम

Ajit Sinha

भाजपा की संगठनात्मक बैठक में आगामी कार्य योजनाओं पर मंथन, ’द इमरजेंसी डायरीज़’ पुस्तक का भी विमोचन

Ajit Sinha
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
error: Content is protected !!
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x