Athrav – Online News Portal
अपराध हरियाणा

हरियाणा में पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति (पीएमएस) योजना करोड़ों के घोटाला के संबंध में एक केस दर्ज किया गया है: डा. के.पी सिंह

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़:हरियाणा राज्य सतर्कता ब्यूरो के महानिदेशक, डॉ. के.पी. सिंह ने कहा कि ब्यूरो द्वारा प्रदेश में पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति (पीएमएस) योजना घोटाला के संबंध में एक मामला दर्ज किया गया है। डॉ. सिंह, जो आज पंचकूला में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे, ने कहा कि राज्य सरकार ने अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए पीएमएस योजना में छात्रवृत्ति की राशि में करोडो रुपए के गबन संबंधी रिपोर्ट मिलने के बाद ब्यूरो को जांच सौंपी थी। उन्होंने कहा कि इस मामले में भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के तहत मंगलवार को एक एफआईआर दर्ज की गई है।

केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 1981 में शुरू की गई योजना को 2015 से पहले ऑफ़लाइन लागू किया जा रहा था। इस योजना को वर्ष 2016 से ऑनलाइन किया गया था। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यह पाया गया कि पीएमएस योजना के तहत लाभार्थियों के आधार नंबर से छेडछाड कर फर्जी खातों में धन हस्तांतरित करके पात्र छात्रों की राशि का गबन राज्य के विभिन्न जिलों में किया जा रहा था। ब्यूरो के अधिकारियों ने सोनीपत, रोहतक और झज्जर जिले में पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण किया, जहां जांच में पता चला कि लगभग 26 करोड़ रुपए की राशि अपात्र लाभार्थियों के बीच वितरित की गई है। जांच से यह भी पता चला कि छात्रों के आधार नंबर व खाता नंबर बदलकर अन्य खातों में पैसा जमा किया गया था। उन्होंने कहा कि जब बैंक ने योजना से संबंधित खातों में मिसमैच पाया, तो बैंक की शिकायत पर संबंधित विभाग ने इस मामले की जांच की, जिसके बाद ब्यूरो को पूरे मामले की जांच का जिम्मा सौंपा गया। अब तक की पडताल में पाया गया कि घोटालेबाजों ने फर्जी संस्थानों, आधार कार्ड नंबर बदलकर व फर्जी छात्रों के नाम पर भी छात्रवृति योजना के तहत राशि लेकर गबन किया है।



एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि अब तक की जांच में लगभग 30-40 प्रतिशत छात्र फर्जी पाए गए हैं और फर्जी संस्थानों की संख्या 25-30 प्रतिशत है। ब्यूरो द्वारा 2015 के बाद पीएमएस योजना के तहत दी गई राशि की जांच की जा रही है। 2015 से पहले की योजना के ऑफ़लाइन मोड में अनियमितताओं से इंकार नहीं किया जा सकता। पहले हम ऑनलाइन मोड के विवरण की पूरी तरह से जाँच और विश्लेषण करेंगे। आगे अगर अनियमितता पाई जाती है तो और मामले भी दर्ज किए जाएंगे। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में अब तक निजी क्षेत्र के पांच व्यक्तियों, सोनीपत, रोहतक और झज्जर जिलों के जिला कल्याण अधिकारी व दो उप निदेशक स्तर के अधिकारियों सहित हेडक्वार्टर में लेखा अनुभाग में तैनात अन्य कर्मियों की संलिप्तता पाई गई है। अन्य जिलो में भी पीएमएस योजना के तहत छात्रवृत्ति के गबन संबंधी अनियमितताओं का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, सतर्कता आर.सी. मिश्रा व पुलिस अधीक्षक, सतर्कता ब्यूरो, मनबीर सिंह भी उपस्थित थे।

Related posts

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले प्रदेश में अव्यवस्था थी, हमने इसको बदलने का काम किया है।

Ajit Sinha

फरीदाबाद: दोस्त के पास नहीं था मोबाइल, इस लिए दोस्तों ने छीन कर दिया गिफ्ट, क्राइम ब्रांच, सेंट्रल ने किया अरेस्ट

Ajit Sinha

‘रॉ’ अफसर बनकर ठगी करने वाला ‘नटवरलाल’ गिरफ्तार, करोड़ों की ठगी का प्लान, इस महाठग ने महिला जज से शादी कर ली।

Ajit Sinha
error: Content is protected !!