अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़: राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर हरियाणा पुलिस द्वारा लागू की गई सीसीटीवी एवं एएनपीआर परियोजना ने एक वर्ष के भीतर यातायात अनुशासन, सड़क सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन से जहां यातायात नियमों के उल्लंघन पर सख्त नियंत्रण स्थापित हुआ है, वहीं आमजन में नियमों के प्रति जागरूकता में भी स्पष्ट सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने बताया कि वर्ष-2025 के दौरान एनएच-44 पर एएनपीआर कैमरों के माध्यम से कुल 4,84,617 ऑनलाइन चालान जारी किए गए। वर्ष 2025 में ओवर-स्पीडिंग के कुल 6,64,054 चालान तथा वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के उपयोग पर 12,126 चालान किए गए, जबकि वर्ष-2024 में यह संख्या 6,733 थी। इन सख्त कार्रवाइयों के परिणामस्वरूप यातायात नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है और लोगों में नियमों के पालन की प्रवृत्ति बढ़ी है।

उन्होंने बताया कि परियोजना के प्रारंभिक चरण में वर्ष 2025 के फरवरी और मार्च माह के दौरान लगभग 50,000 ऑनलाइन चालान प्रति माह किए जा रहे थे, जबकि निरंतर सख्त प्रवर्तन, तकनीक आधारित निगरानी और व्यापक जन-जागरूकता अभियानों के सकारात्मक परिणामस्वरूप वर्तमान में यह संख्या घटकर औसतन 30,000 चालान प्रति माह रह गई है। प्रति माह लगभग 20,000 चालानों की यह कमी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आमजन अब यातायात नियमों को गंभीरता से ले रहा है और स्वेच्छा से उनका पालन कर रहा है, जो इस परियोजना की प्रभावशीलता को दर्शाता है।इतना ही नहीं, इस परियोजना ने अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। केंद्रीय नियंत्रण कक्ष की सहायता से चोरी, डकैती एवं झपटमारी के 38 मामलों का सफलतापूर्वक खुलासा किया गया है। इसके अलावा 50 संदिग्ध एवं अपराध में लिप्त वाहनों के अलर्ट संबंधित जिलों को भेजे गए, जिनमें से 5 वाहनों को समय रहते पकड़ लिया गया, जिससे अपराधियों की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगा है।अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक , ट्रैफिक एंड हाइवे हरदीप दून ने बताया कि यह परियोजना 25 जनवरी 2025 को करनाल स्थित केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से प्रारंभ की गई थी, जिसके तहत कुंडली बॉर्डर (सोनीपत) से लेकर शंभू बॉर्डर (अंबाला) तक एनएच- 44 के प्रमुख एवं संवेदनशील बिंदुओं पर 72 एएनपीआर, 18 एविडेंस तथा 38 सर्विलांस कैमरों सहित कुल 128 अत्याधुनिक कैमरे स्थापित किए गए हैं। इन कैमरों को हरियाणा पुलिस के इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से जोड़ा गया है।इस परियोजना की सफलता के पीछे एआई आधारित उच्च सटीकता वाले कैमरे, मजबूत आईटी ढांचा तथा केंद्रीय नियंत्रण कक्ष, करनाल में 24×7 कार्यरत प्रशिक्षित पुलिस एवं तकनीकी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जो परियोजना को निरंतर सुचारू रूप से संचालित कर रही है।डीजीपी ने बताया कि सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए लागू कैशलेस उपचार योजना के अंतर्गत अब तक 4,181 व्यक्तियों को 1.5 लाख रुपये तक का निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया गया है। ‘गोल्डन आवर’ में जीवन रक्षा की यह योजना हरियाणा पुलिस, स्वास्थ्य विभाग एवं अनुबंधित अस्पतालों के बेहतर समन्वय का सफल उदाहरण है।आमजन से अपील करते हुए पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने वाहन चालकों से निर्धारित गति सीमा का पालन करने, लेन ड्राइविंग का ध्यान रखने, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग न करने तथा हेलमेट और सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से प्रयोग करने की अपील की। डीजीपी ने कहा कि हरियाणा पुलिस तकनीक के माध्यम से यातायात व्यवस्था को सुरक्षित और सुचारू बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है, लेकिन इन प्रयासों की वास्तविक सफलता तभी संभव है जब नागरिक स्वयं नियमों का पालन करें। थोड़ी सी सावधानी न केवल स्वयं के जीवन की रक्षा करती है, बल्कि दूसरों के जीवन को भी सुरक्षित बनाती है।
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