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भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में हरियाणा पुलिस की प्रभावशाली भागीदारी- डीजीपी अजय सिंघल ने रखा ‘सॉवरेन एआई’ पर दूरदर्शी विज़न

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
*चंडीगढ़:हरियाणा के पुलिस महानिदेशक(डीजीपी) अजय सिंघल ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026  में राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में ‘सॉवरेन एआई’ की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए। इस शिखर सम्मेलन का आयोजन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार द्वारा केपीएमजी इंडिया के सहयोग से किया गया। समिट का विषय “ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सॉवरेन एआई: डिजिटल संप्रभुता की ओर भारत की राह ” रहा, जिसमें देश-विदेश के नीति-निर्माताओं और सुरक्षा विशेषज्ञों ने भाग लिया।डीजीपी सिंघल ने कहा कि इंटरनेट और मोबाइल क्रांति के बाद अब एआई एक अत्यंत शक्तिशाली तकनीक के रूप में उभर रहा है, जो शासन और सुरक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। यह केवल कार्यों को तेज करने का माध्यम नहीं, बल्कि शासन, सुरक्षा और समाज की संरचना को पुनर्परिभाषित करने वाली परिवर्तनकारी शक्ति है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि एआई का विकास स्वदेशी, सुरक्षित और विश्वसनीय आधार पर नहीं हुआ, तो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी प्रणालियाँ जोखिम में पड़ सकती हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने एआई के पाँच स्तर—ऊर्जा, चिप्स, अवसंरचना, मॉडल और एप्लीकेशन—का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल एप्लीकेशन स्तर पर आत्मनिर्भर होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बिजली, चिप्स, डेटा और सर्वर सहित पूरी तकनीकी व्यवस्था देश के नियंत्रण में और सुरक्षित होनी चाहिए, ताकि किसी भी संकट के समय सुरक्षा तंत्र निर्बाध रूप से कार्य करता रहे। डीजीपी ने चिंता व्यक्त करते हुआ कहा कि एआई के दुरुपयोग से संवेदनशील डेटा की चोरी, आपात सेवाओं में बाधा, एल्गोरिद्मिक हेरफेर, डीपफेक और साइबर हमलों जैसी चुनौतियाँ तेजी से बढ़ सकती हैं,इसलिए कानून-प्रवर्तन एजेंसियों का तकनीकी रूप से सशक्त और प्रशिक्षित होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हरियाणा पुलिस तकनीक-आधारित स्मार्ट पुलिसिंग को प्राथमिकता देते हुए साइबर अपराध और डिजिटल खतरों से निपटने के लिए निरंतर उन्नयन कर रही है। साथ ही एआई आधारित जांच और खुफिया तंत्र के विकास में सार्वजनिक–निजी सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सहयोग मजबूत कानूनी ढांचे, जवाबदेही और पारदर्शिता के साथ होना चाहिए, तथा एआई के उपयोग में सुरक्षा,जनविश्वास और वैधता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।डीजीपी ने कहा कि सॉवरेन एआई राष्ट्रीय सुरक्षा की एक महत्वपूर्ण रणनीतिक आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को ऐसा एआई ढांचा विकसित करना होगा जो स्वदेशी, सुरक्षित और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप हो। सॉवरेन एआई का अर्थ है ऐसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणाली जिसे देश स्वयं विकसित, नियंत्रित और संचालित करें, ताकि डेटा, तकनीक और सर्वर पर बाहरी नियंत्रण न रहे तथा राष्ट्रीय सुरक्षा और गोपनीयता पूरी तरह सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि आज लिए गए निर्णय ही भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था की दिशा तय करेंगे।

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