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गुडगाँव

हरेरा ने आज अडानी एम2के प्रोजैक्ट्स एलएलपी’ और रियल एस्टेट एजेंट  ‘नवीन एसोसिएट्स’ को किया नोटिस जारी, कार्रवाई के निर्देश।

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
चंडीगढ़: हरियाणा रियल एस्टेट रेग्यूलेटरी अथॉरिटी (हरेरा), गुरुग्राम ने रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा क्रमश: 3, 9 और 10 के उल्लंघन के लिए प्रमोटर ‘मैसर्ज अडानी एम2के प्रोजैक्ट्स एलएलपी’ और रियल एस्टेट एजेंट ‘नवीन एसोसिएट्स’ को नोटिस जारी किया है। साथ ही, प्राधिकरण ने उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू करने का भी निर्देश दिया है जिसमें उल्लंघन का दंड प्रमोटर के खिलाफ 12 करोड़ रुपये और रियल एस्टेट एजेंट के खिलाफ 2.7 करोड़ रुपये तक जुर्माना हो सकता है। हरेरा, गुरुग्राम के चेयरमैन डॉ. के.के. खंडेलवाल की अध्यक्षता और श्री समीर कुमार की सदस्यता वाली प्राधिकरण पीठ द्वारा गंभीरतापूर्वक विचार करने उपरान्त यह नोटिस जारी किया गया है। डॉ. खंडेलवाल ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्राधिकरण के संज्ञान में आया है कि प्रमोटर मैसर्ज अडानी एम2के प्रोजेक्ट्स एलएलपी ने न तो पंजीकरण के लिए आवेदन किया है और न ही उसके द्वारा बनाई जा रही संपत्ति के विवरण से जुड़े जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं। रेरा अधिनियम की धारा 59 (2) के तहत परियोजना के पंजीकरण के बारे में दिशा-निर्देशों की अनुपालना न करने से उसके खिलाफ स्पष्ट रूप से आपराधिक कार्रवाई की जानी बनती है।

प्राधिकरण ने प्रमोटर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और रेरा अधिनियम की धारा 3 और धारा 59 के तहत, बेची गई संपत्ति से संबंधित रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया है। हरेरा, गुरुग्राम के चेयरमैन डॉ. के.के. खंडेलवाल के मुताबिक प्रमोटर रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 3 के तहत प्राधिकरण के पास परियोजनाओं को पंजीकृत करवाए बिना अपनी रियल एस्टेट परियोजनाओं में इकाइयों का विज्ञापन / मार्केटिंग / बिक्री कर रहे हैं। यह सब ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफ़लाइन भी किया जा रहा है। अधिनियम की धारा-3 में कहा गया है कि ‘कोई भी प्रमोटर रियल एस्टेट रेग्यूलेटरी अथॉरिटी के पास रियल एस्टेट परियोजना को पंजीकृत करवाए बिना किसी भी प्लानिंग एरिया में किसी भी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट या इसके किसी भाग में, जैसा भी मामला हो, किसी भी तरह से किसी प्लॉट, अपार्टमेंट या बिल्डिंग का विज्ञापन, बुकिंग, बिक्री या बिक्री की पेशकश या खरीदने के लिए लोगों को आमंत्रित नहीं करेगा।’उन्होंने बताया कि रियल एस्टेट अधिनियम में ऐसी सभी वाणिज्यिक और आवासीय रियल एस्टेट परियोजनाओं, जहां जमीन 500 वर्ग मीटर या आठ अपार्टमेंट से अधिक है, के लिए रियल एस्टेट रेग्यूलेटरी (रेरा) के पास पंजीकरण करवाना अनिवार्य किया गया है ताकि परियोजना-मार्केटिंग और निष्पादन में अधिक से अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने बताया कि यह देखने में आया है कि ‘मैसर्ज अडानी एम2के प्रोजैक्ट्स एलएलपी’ तथा ऐसे अन्य प्रमोटर इस श्रेणी में आने और अपनी संपत्ति की समान विशिष्टियों के बावजूद अपनी परियोजनाओं का पंजीकरण करवाने की बजाय अवैध कार्यों में संलिप्त हैं। 

डॉ. खंडेलवाल ने प्रमोटरों के इस तरह के दुर्भावनापूर्ण और गैर-पेशेवर आचरण पर अपनी कड़ी नाराजगी और असंतोष जाहिर करते हुए कहा कि ऐसे प्रमोटरों को दंडित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह भी देखा गया है कि न केवल प्रमोटर्स बल्कि रियल एस्टेट एजेंट भी इस तरह की अनैतिक गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। वे न केवल अपंजीकृत परियोजनाओं को बेचने की कोशिश करते हैं, बल्कि प्राधिकरण के पास खुद को पंजीकृत भी नहीं करवाते। अधिनियम कहा गया है कि कोई भी रियल एस्टेट एजेंट स्वयं या अपनी एसोसिएशन को रियल एस्टेट प्राधिकरण (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 9 और 10 के के तहत पंजीकृत करवाए बिना किसी भी परियोजना के विज्ञापन / मार्केटिंग/ बिक्री में भाग नहीं ले सकता। उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट उद्योग के तीसरे हितधारक होने के नाते रियल एस्टेट एजेंट इस क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो प्रमोटर और खरीदारों/उपभोक्ताओं के बीच एक कड़ी का काम करते हैं। वह ऐसा व्यक्ति है जो अपार्टमेंट या प्लॉट, जैसा भी मामला हो, की बिक्री प्रक्रिया को सरल बनाने के क्रम में प्रमोटर के प्रतिनिधि के रूप में आम जनता तक पहुंचता है और खरीदारों के प्रति भरोसा और विश्वास पैदा करता है ताकि वे ‘सपनों के घर’ की आस में अपनी मेहनत की कमाई का निवेश कर सकें। इसी तरह, एजेंट के लिए यह जरूरी है कि वह प्रमोटर का एक ऐसा सच्चा और वैध प्रतिनिधि हो, जो प्राधिकरण के पास कानूनी रूप से पंजीकृत हो और जिसे बाद में, खरीदारों को परियोजना से संबंधित कोई गलत जानकारी देने पर जिम्मेदार ठहराया जा सके।

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