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मणिपुर में जातीय और धर्म के आधार पर भयंकर हिंसा हुई, हथियारों की जमकर लूट हुई , 2000 मकानों को जला दिए गए-कांग्रेस


नई दिल्ली /अजीत सिन्हा
पूर्व कांग्रेस सांसद डॉ. अजय कुमार ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रेस वार्ता को शुरू करने से पहले मैं आपको दो वीडियो दिखाना चाहूँगा। (वीडियोज़ दिखाए गए)
3,4,5 मई को मणिपुर में दो कम्युनिटी आमने सामने आईं और ये पहली बार, मुझे लगता है देश के इतिहास में कि इस प्रकार की हिंसा हुई, आप सभी परिपक्व पत्रकार हैं, जातीय आधार पर और धर्म के आधार पर, लेकिन खासतौर से जातीय आधार पर भयंकर हिंसा हुई और उस दिन इस देश के प्रधानमंत्री जी बेंगलुरु में जाकर 25 किलोमीटर की चुनावी रैली कर रहे थे। गृहमंत्री जी 3 तारीख को, जब 54 हजार लोग विस्थापित हुए थे, तो गृहमंत्री जी पॉलिटिकल रैली कर रहे थे, मीटिंग हो रही थी। यदि ऐसी घटना फरीदाबाद, साउथ दिल्ली, बेंगलुरु, जयपुर में अगर होती तो पूरे देश के चैनल्स वहाँ पहुंचकर कम से कम आप लोग इस सरकार से सवाल करते। लेकिन क्योंकि ये मामला मणिपुर का है और उत्तर पूर्वी भारत का है, तो न इस केन्द्र सरकार और न मेन स्ट्रीम मीडिया में किसी तरह की न्यूज कवरेज हुई।

यदि पंचायत वाले सीरियल का कोई सीन होता तो डायलॉग ऐसे चलते। ‘मणिपुर में दंगा चलत रहा, देख रहा न विनोद, लेकिन साहिब दुनिया घूमताबा, कैसा प्रधानमंत्री बा कि देश के बारे में चिन्‍ता नी के, सिर्फ कपड़ा बदलता और झप्‍पी देत रही’। ये है स्थिति इस देश की। एक उच्‍च स्‍तरीय मीटिंग गृह मंत्री जी ने बुलाई, उसमें निष्‍कर्ष इतना ही हुआ, ये निष्‍कर्ष वहां से जो उस मीटिंग से निकला, उन्‍होंने एक ही टिप्‍पणी दी जो, क्‍योंकि सार्वजनिक रूप से न कोई प्रेस कॉन्‍फ्रेंस हुआ है, न तो आपको बताया गया, न कुछ, लेकिन जो वहां के नेता लोग ने बताया कि ‘ज्‍यादा राजनीति मत करो अभी’, यानि अभी तक जो कर रहे थे वो ठीक है, कोई चिंता नहीं है। इस प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के माध्‍यम से मैं स्‍पष्‍ट रूप से आपको बताना चाहूंगा कि जो स्थिति है मणिपुर में, वो पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी का क्रिएशन है।17 मई को मल्लिकार्जुन खरगे जी, कांग्रेस के प्रेसीडेंट ने एक डेलीगेशन को जाने का आदेश दिया था मुकुल वासनिक जी के नेतृत्‍व में, उसमें सुदीप रॉय बर्मन जी, जो त्रिपुरा के विधायक हैं और हम थे, हम लोग वहां पहुंचे 18 तारीख को।तो स्‍पष्‍ट रूप से हम लोगों को ये जनता के बीच में जब हम अलग-अलग सिव‍िल सोसायटी से लेकर समाज के अलग-अलग लोगों से हमारी मुलाकात हुई थी तो स्‍पष्‍ट रूप से सामने ये बात आई कि कभी भी मैतेई समाज और कुकी समाज के बीच में कभी इस तरह का झगड़ा कभी था ही नहीं, जब से भारतीय जनता पार्टी को ये समझ में आ गया कि दोनों समाज का ध्रुवीकरण कराके, बांटकर के अपनी राजनैतिक रोटी ये लोग सेक सकते हैं तो इनके लिए सिर्फ सत्ता पाना ही सब कुछ है, उनको कोई मतलब नहीं है देश से, कोई मतलब नहीं है… खासतौर से ऐसे प्रदेश में जो बॉर्डरिंग स्‍टेट है, जो पहले से बहुत सेंसिटिव रहा है।तो लगातार बीरेन सिंह जी की प्रदेश सरकार ने अलग-अलग तरीके से दरारें पैदा की, कभी कुकी समाज के लोगों को फोरेस्‍ट से खाली कराया गया, फोरेस्‍ट एक्‍ट के नाम पर, कभी चर्च तोड़े गए, कभी मैतेई और कुकी के बीच में भाषा, ऐसे शब्‍दों का प्रयोग हुआ जो हमेशा जो उनको टोकने का कोशिश किया, इल्‍लीगल माइग्रेंट्स, नार्कोज़, पॉपी कल्‍टीवेटर, इस तरह के शब्‍द जो आप अपने देश के अनुसूचित जनजाति के लोग को इस तरह जो है, ओछी टिप्‍पणी, बीरेन सिंह ने दिया और ये जो टेंशन जो दोनों समुदाय के बीच में था, वो स्‍पष्‍ट रूप से सबको दिखाई दे रही थी।3 तारीख को उपराष्‍ट्रपति जी जाते हैं और 3 तारीख को शाम से ये प्रॉब्‍लम शुरू हुई, किसी तरह की तैयारी नहीं है, जब जुलूस निकाले जाते 3 तारीख को तो उसको स्‍थगित किया जाता है, क्‍योंकि ये चाहते थे कि वहां पर लॉ एंड ऑर्डर खराब हो जाए और उस पर कोई चर्चा नहीं हो रही थी, क्‍योंकि कर्नाटका का चुनाव था, न्‍यूज पेपर और टीवी में कवरेज दिखाने… वो लोग कोशिश कर रहे थे आप लोग रिपोर्ट वहां दिखाएंगे ताकि कर्नाटका की जनता को समझ में आ जाए कि किस तरह के प्रधानमंत्री, किस तरह के गृह मंत्री इस देश में हैं और अब अगर डैमेज का एक्‍सटेंट देखेंगे, 54,000 लोग विस्‍थापित हुए हैं, मणिपुर की कुल आबादी सिर्फ 28 लाख है, एक सेन्‍ट्रल इंडिया का जो है उत्तरी भारत हो या ईस्‍टर्न इंडिया का एक लोकसभा क्षेत्र है, उसमें 54,000 लोग डिस्‍प्‍लेस हुए हैं, 20 पुलिस स्‍टेशन जला दिए गए हैं, कोई न्‍यूज कवरेज नहीं है। 20 पुलिस स्‍टेशन, आपने कभी सुना है, इस देश में ये है लॉ एंड ऑर्डर, ये है 56 इंच के सीने की सरकार, ये है अमित शाह जी का लोहा- 20 पुलिस स्‍टेशन, 2,000 मकान जला दिए। मतलब है कि साउथ दिल्‍ली में अगर चुनाव, अगर उस क्षेत्र में इस स्‍तर के दंगे होते तो पूरा जीके, जीके 1 उड़ जाता, 2,000 मकान जल जाते, कोई न्‍यूज कवरेज नहीं, किसी को कोई चिंता नहीं और 1,000 सेमी ऑटोमैटिक राइफल्‍स की लूट हुई है पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज से, कोई न्‍यूज नहीं है, 1,000 semi-automatic weapon, 6,000 बुलेट्स राउंड लूटे गए, आप सोच लीजिएगा कि ऐसे हथियार पब्लिक के बीच में चले गए हैं। 1 प्‍लाटून में 30 के आस-पास लोग होते हैं तो आप उसमें मल्‍टीप्‍लाई कीजिए 1,000 से, प्‍लाटून, 1 स्‍कवायड मतलब पुलिस के जो जिप्‍सी में घूमते हैं 8 लोग हैं, तो वैसे जो हैं 150 जो है स्‍कवायड खड़े हो गए, जिनके पास सेमी ऑटोमैटिक वैपन्‍स हैं मणिपुर में जो सरकार के और आम जनता के खिलाफ इस्‍तेमाल होंगे, 200 चर्च, गिरिजाघर को जला दिया गया है या डैमेज किया गया है और 5 मंदिर भी। सबसे चिंता का विषय क्‍या है – कि अधिकांश जगह में दोनो कम्‍युनिटी के लोग अगर वो अल्‍पसंख्‍यक में हैं तो बचे नहीं उस इलाके में, कभी नहीं हुआ ऐसा। इम्‍फाल वैली से जितने भी जो हिल्‍स के लोग थे, वो सब चले गए और जितने भी जो हैं प्‍लेन के, जो मैतेई समाज के जो लोग हिल्‍स में थे वो आ गए, कभी भारत में नहीं हुआ, लेकिन कोई न्‍यूज कवरेज नहीं। This is the government, we have elected! This is the Prime Minister, जो जाते हैं चुनाव प्रचार में। 54,000 लोग जो है बेघर हो गए, लेकिन प्रधानमंत्री जी चुनाव प्रचार में व्‍यस्‍त हैं, अमित शाह जी को मीटिंग बुलाने के लिए टाईम नहीं है, अभी तक नहीं गए हैं, अभी तक कोई भी केन्‍द्रीय मंत्री… चुनाव से पहले हर दूसरे दिन 3-3 मंत्री जाते थे, Now there is not even a single Minister, who has visited Manipur, and we have elected such a government, which doesn’t care.चिंता का विषय ये है कि अब जो कमान जो है वो राजनीति से संबंधित लोगों के हाथ से छूट गई है, दोनों तरफ से चरमपंथियों के पास ये जो है नैरेटिव चला गया है, ये देश के लिए बहुत खतरे की बात है। The narrative has gone to the extremist sections of both the communities. पॉलिटिशियन ऐसी भाषा बोल रहे हैं, जो चरमपंथी लोग बोलते थे, दोनों तरफ से।आपको मालूम होगा कि इम्‍फाल हॉस्पिटल के शवगृह में 70 लाशें 5 मई से अभी भी पड़ी हुई हैं, 70 Bodies, unofficial estimate जो सौ बोलते हैं, सरकार जो है 70 बोल रही है। चुराचांदपुर में 18 लाश जो हैं 5 मई से अभी भी वहां के शवगृह में पड़ी हुई हैं, eighteen bodies in Churachandpur, seventy bodies, इन्हें लेने के लिए कोई है ही नहीं, क्‍योंकि मालूम भी नहीं है और लेने के लिए भी डर रहे हैं, क्‍या बॉडी की क्‍या स्थिति होगी। मणिपुर जैसे सेंसटिव इलाके में 2016, अगर हमारा जो डेटा सही होगा, याददाश्‍त सही है तो… 2016 में इसी तरह का चुराचांदपुर में 10 लाशें 100 दिन से ऊपर बिना क्रिमेशन के हॉस्पिटल में पड़ी रहीं।तो 18 मई को जो है, मुकुल वासनिक जी के नेतृत्‍व में कांग्रेस की डेलीगेशन, वहां के जो सीएलपी लीडर और भूतपूर्व मुख्‍यमंत्री जी, इबोबी सिंह साहब, मेघाचंद्र जी, जो वहां के पीसीसी प्रेसिडेंट हैं, भक्‍त चरण दास जी, जो इंचार्ज हैं, सुदीप रॉय बर्मन और मैं, मुकुल जी डेलीगेशन के लीडर थे और मणिपुर के अलग-अलग समाज के, अलग-अलग कांग्रेस के नेतागण, गवर्नर से मुलाकात की और हमारी डिमांड जो सेन्‍ट्रल गवर्नमेंट और गवर्नर के पास हैं, जो हमने उनको दिया है, मैं उनको थोड़ा पढ़ लेता हूं।Immediate rehabilitation, तुरंत जो है, जिन-जिन लोगों को, जो विस्‍थापित हुए हैं उनकी ठीक ढंग से सरकार को व्‍यवस्‍था करने की आवश्‍यकता है। जितने भी गांव जो हैं, जो बॉर्डरिंग है, हिल्‍स और प्‍लेन के बीच में, वहां पर लोग एकदम डरे हुए हैं, वहां पर सिक्‍योरिटी नहीं है, सिर्फ इम्‍फाल शहर में सिक्‍योरिटी है, बाकी पूरे बॉर्डर एरिया में कोई भी सिक्‍योरिटी नहीं है। कंपनसेशन सरकार ने ऐलान किया था, 5 लाख, मृतक को 5 लाख, गंभीर रूप से अगर घायल हैं तो 2 लाख और अगर माइनर इंजरी है तो 25,000। हमने सरकार से डिमांड की है कि 20 लाख मिनिमम कंपनसेशन होना चाहिए मृतक को, 5 लाख जो गंभीर रूप से घायल हैं और 1 लाख जिनकी माइनर इंजरी हैं। जितने भी रिलीफ कैंप है, सरकार दूर-दूर नहीं दिखाई देती। सभी रिलीफ कैंप हैं उसमें समाज के लोग जो हैं… उसमें दरारें और गहरी होती जा रही हैं। कुकी एरिया में कुकी समाज के लोग कैंप्स चला रहे हैं, मैतेई एरिया में सरकार नाम की चीज ही नहीं है, आप देख लीजिए क्‍या स्थिति हो गई है। इतने स्‍टूडेंट्स जो परीक्षा दे रहे थे, वो काफी परेशान हैं, सबसे ज्‍यादा विचित्र स्‍थ‍िति है कि सरकारी अफसर भाग गए, अगर आप कुकी सरकारी अफसर हैं तो आप वैली छोड़कर पहाड़ में चले गए और अगर आप मैतेई अफसर हैं तो आप पहाड़ छोड़कर के वैली में आ गए हैं। इस देश में कभी, इंडीपेंडेंट इंडिया में कभी ऐसा हुआ नहीं है। प्‍लीज, मैं आपसे अनुरोध करता हूं, हो सकता है कि maybe the onus, don’t want to show this, but, this is crazy. मैंने अपने जो है पुलिस लॉ में इस तरह का जो है separation of communities कभी नहीं देखा है और दरार इतनी गहरी है। कांग्रेस पार्टी डिमांड करती है कि तुरंत जो है प्रधानमंत्री और गृहमंत्री जी दोनों कम्‍युनिटीज के लीडर्स को बुलाकर बातचीत शुरू करें। Manipur is a border state आप तो जानते हैं कि म्‍यांमार में क्‍या हो रहा है, अगर मणिपुर के 7,000 ट्राइबल्‍स मिजोरम में जाकर शरण ले रहे हैं तो आप सोच लीजिएगा कि ये सिर्फ मणिपुर की समस्‍या नहीं है, अब ये मिजोरम को भी उस समस्‍या ने खींच लिया है। बर्मा क्‍योंकि काफी लोगों के रिश्‍तेदार बॉर्डर के उस तरफ भी हैं, चीन, कुकी जो सेमी ट्राईब, अलग-अलग नाम, अलग-अलग जगह। केन्‍द्र सरकार और आप लोगों से अनुरोध है कि आप लोग इस समस्‍या को समझिए 54,000 विस्थापित, 100 डैड, कोई कम्‍युनिटी एक-दूसरे से बात नहीं कर रही है। अभी-भी फिर से कल आपने देखा होगा कि फिर से वहां पर आगजनी की घटना शुरू हुई है।

लास्‍ट में मैं एक सर्वेश्‍वर दयाल सक्‍सेना जी की एक पंक्ति पढ़ना चाहता हूं

“यदि तुम्‍हारे घर के एक कमरे में आग लगी हो,

तो क्‍या तुम दूसरे कमरे में सो सकते हो,

यदि तुम्‍हारे घर के एक कमरे में लाशें सड़ रही हों,

तो क्‍या तुम दूसरे कमरे में प्रार्थना कर सकते हो,

यदि हां, मोदी जी और अमित शाह जी, यदि जवाब हां है तो मुझे आपसे कुछ नहीं कहना है।

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