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फरीदाबाद: राष्ट्रीय महिला दिवस – महिलाओं की हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका-प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचंदा

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
फरीदाबाद: राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एन एच तीन फरीदाबाद में प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचंदा की अध्यक्षता में जूनियर रेडक्रॉस, सैंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड और गाइडस ने राष्ट्रीय महिला दिवस पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचंदा ने कहा कि
इस दिन प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी व कवयित्री सरोजिनी नायडू का जन्म हुआ था। उन्हें अपनी कविताओं के कारण भारत कोकिला के रूप में भी जाना जाता है। सरोजिनी नायडू ने देश की स्वतंत्रता के लिए भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी इसलिए भारत में हर वर्ष 13 फरवरी को राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। जूनियर रेडक्रॉस और सैंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड अधिकारी व प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचंदा ने बताया कि 1895 में हैदराबाद के निजाम ने सरोजिनी नायडू को छात्रवृत्ति पर इंग्लैंड भेजा था।

सरोजिनी नायडू को पहले लंदन के किंग्स कॉलेज और बाद में कैम्ब्रिज के गिरटन कॉलेज में पढ़ने का मौका मिला। पढ़ाई के साथ-साथ सरोजिनी कविताएं भी लिखती थीं। गोल्डन थ्रैशोल्ड उनका पहला कविता संग्रह था। 1898 में सरोजनी का विवाह डॉ. गोविन्द राजालु नायडू से हुआ था।सरोजिनी नायडू 1947 में संयुक्त प्रांत जिसे अब उत्तर प्रदेश के रूप में जाना जाता है, की पहली महिला राज्यपाल बनी थीं। मनचंदा ने आगे बताया कि सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी, 1879 को हुआ था। सरोजिनी बचपन से ही बहुत बुद्धिमान थीं। उन्होंने 12 वर्ष की छोटी सी उम्र में ही कविताएं लिखनी शुरू कर दी थी। वे न सिर्फ एक स्वतंत्रता सेनानी थीं, बल्कि उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के लिए भी बहुत संघर्ष किया था। उन्हें भारत की पहली महिला राजयपाल होने का भी गौरव प्राप्त है। प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचंदा ने बताया कि सरोजिनी नायडू महिला अधिकारों की प्रबल समर्थक थीं। उन्होंने उनकी शिक्षा और समाज में उन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए काफी प्रोत्साहन दिया।

यही कारण है कि उनके जन्मदिन पर भारतीय महिला संघ और अखिल भारतीय महिला सम्मेलन ने वर्ष 2014 से राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का निर्णय लिया। राष्ट्रीय महिला दिवस मनाते हुए हमें सरोजिनी नायडू के योगदान को नहीं भूलना चाहिए। सरोजिनी नायडू की 135वीं जयंती के अवसर पर 13 फरवरी 2014 से देश में राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरुआत की गई है। आज सरोजिनी नायडू की 142वीं जयंती है। 2 मार्च, 1949 को लखनऊ में अपने कार्यालय में कार्य करने के दौरान दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था। इस अवसर पर प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचंदा, प्राध्यापिका जसनीत कौर और शिवानी ने बच्चों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स और पोस्टर की सराहना करते हुए अच्छी शिक्षा प्राप्त कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

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