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फरीदाबाद: जे.सी. बोस विश्वविद्यालय द्वारा मनाया गया विश्व पृथ्वी दिवस


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
फरीदाबाद: जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के पर्यावरण विज्ञान विभाग और वसुंधरा ईको-क्लब द्वारा विश्व पृथ्वी दिवस- 2023 के अवसर पर ‘जी20-पर्यावरण और जलवायु स्थिरता’ पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया। यह आयोजन जी20 एवं लाइफ मिशन मूवमेंट ऑफ इंडिया के अंतर्गत करवाया गया। उल्लेखनीय है कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रतिवर्ष 22 अप्रैल को विश्व पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। कार्यक्रम के दौरान विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विभिन्न विषयों के छात्रों के लिए पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और स्थिरता के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञ वार्ता आयोजित की गई। उन्नत भारत अभियान के तहत विश्व विद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों के स्कूली बच्चों और शिक्षकों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सुशील कुमार तोमर ने की। अपने संबोधन में, उन्होंने भगवान के दार्शनिक अर्थ से शुरुआत की जिसमें पृथ्वी के सभी पांच तत्व – भूमि, आकाश, वायु, अग्नि और नीर शामिल हैं। पृथ्वी ही एकमात्र ऐसा ग्रह है जहां जीवन संभव है और मनुष्य को सब कुछ इसी से मिल रहा है, इसलिए पृथ्वी की रक्षा करना हमारा प्रमुख दायित्व है। उन्होंने भारत की अध्यक्षता में हो रहे जी-20 के थीम ‘वसुधैव कुटुम्बकम‘ – एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य, जो सार्वभौमिक एकता लाने की शक्ति रखता है, पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब दुनिया कई चुनौतियों का सामना कर रही है, सदियों पुराने भारतीय दर्शन एवं ज्ञान ने विश्व को एक परिवार के रूप में देखना सिखाया है।इससे पहले, पर्यावरण विज्ञान विभाग की अध्यक्षा व वसुंधरा इको क्लब की नोडल अधिकारी डॉ. रेणुका गुप्ता ने गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि 50 से अधिक वर्षों से, यह दिन दुनिया भर में मनाया जाता है और हमें याद दिलाता है कि हम पृथ्वी से कितने निकट से जुड़े हुए हैं, साथ ही साथ पृथ्वी की रक्षा करने की हमारी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और जलवायु स्थिरता जी 20 इंडिया प्रेसीडेंसी के प्रमुख फोकस क्षेत्र हैं। इस अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के तकनीकी सदस्य और मौसम विज्ञान विभाग के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक (एसजी) डॉ. एस.डी. अत्री ने जलवायु परिवर्तन के सरकारी पैनल  के डेटा का हवाला देते हुए जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी के विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यदि तापमान 1000 वर्षों में 1 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है तो वह स्थिर हो सकता है, लेकिन यदि यह 100 वर्षों में बढ़ता है, तो यह पर्यावरण के लिए अच्छा नहीं है। उन्होंने बताया कि वर्षा के पैटर्न में बदलाव, बाढ़, सूखा, जंगल की आग, और गर्मी की लपटें पिछले वर्षों में बढ़ रही हैं। ये जलवायु परिवर्तन के कारण है, जिसके कारण सभी प्रभावित हैं। यह अभी नहीं तो कभी नहीं जैसी स्थिति है और पर्यावरण को बनाए रखने के लिए सुधारात्मक उपाय करने का समय आ गया है। उन्होंने जीवन के स्थायी तौर-तरीकों पर बल दिया। कार्य क्रम को संबोधित करते हुए इग्नू, नई दिल्ली में स्कूल ऑफ साइंसेज से प्रो. आर. बस्कर जोकि हरियाणा में राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण के सदस्य भी है, ने उन विचारों का सुझाव दिया जिनके द्वारा हम अपने पर्यावरण में सुधार कर सकते हैं। उन्होंने पृथ्वी दिवस की थीम – हमारे ग्रह में निवेश करें और 17 सतत विकास लक्ष्यों के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। इस अवसर पर सभी छात्र प्रतिभागियों और संकाय सदस्यों द्वारा ‘पंच प्राण प्रतिज्ञा’ ली गई जोकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की पहल है। यह प्रतिज्ञा स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को पूरा करने का लक्ष्य के रूप में वर्ष 2047 तक भारत की स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने पर केन्द्रित है। कार्यक्रम के अंत में ईको-क्लब की सदस्य एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. अनीता गिरधर धन्यवाद प्रस्ताव ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन ईको क्लब सदस्यों द्वारा किया गया।

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