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फरीदाबाद

फरीदाबाद : एक कैबिनेट मंत्री के चहेतों को बैंकट हॉल के एलओयु निगम ने दिए,28 में से कुल 6 को एलओयु दी गई,एक बैंकट हाल के 25 से 30 लाख का रेट हैं।


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
फरीदाबाद : नगर निगम प्रशासन की मिलीभगत से 80 बैंकट हॉल में से 52 बैंकट हॉल अब भी शहर भर में अवैध रूप से धड़ल्ले से चल रहे हैं और बाकी के 28 बैंकट हाल एंव फार्म हाऊस के मामलें अलग -अलग अदालतों में विचाराधीन हैं मगर इन अवैध बैंकट हालों पर कौन कार्रवाई करेगा यह किसी को भी नहीं मालूम । सीएम फ़्लाइंग ने सोमवार को नगर निगम कार्यालय में इससे सम्बंधित रिकॉडों को खंगाला। बाजार में खबर फैली हुई हैं कि प्रत्येक फार्म हाउस वालों से रिश्वत के तौर पर 25 से 30 लाख रूपए लिए गए और अब भी लिए जा रहे हैं और निगम का सरकारी फीस जो भी हैं वह अलग से हैं औरइस लेनदेन में बीच की भुमिका कौन निभा रहा हैं इसका भी पता सरकार को लगाना बहुत जरुरी हैं और उसको बेनकाब करना भी बहुत जरुरी हैं।
खबर हैं कि शहर भर में कुल 80 मैरिज फार्म हाउस व बैंकट हॉल हैं, जिनमें से 27 फार्म हॉउस सूरजकुंड रोड पर हैं और बाकी के झाड़सेंतली व शहर भर के अलग -अलग हिस्सों में हैं। सूरजकुंड स्थित 27 में से करीब 13 बैंकट हॉल के मामले उच्चतम न्यायलय में चल रहे हैं। यह भी मालूम हुआ हैं कि कुल 6 बैंकट हॉल के एलओयू निगम द्वारा दिया गया हैं। इस एवज में फार्म हाउस के मालिकों से नगर निगम को करीब सवा 11 करोड़ रूपए मिले हैं।
सीएम फ़्लाइंग के मुताबिक नगर निगम के द्वारा एलओयु डिलाइट गार्डन,खालसा गार्डन, जन्नत वैल्ली, के.के उज्वल, योगी फार्म व ईडन गार्डन को दिया गया हैं। इसके बाद की फोर्मल्टी जो भी होती हैं वह सिर्फ डिलाइट गार्डन वालों ने पुरी की हैं जिसको नगर निगम ने रेगुलाईज कर दिया हैं और बनाने की परमिशन दे दी हैं। बाकी के पांच फार्म हाऊसों के पास सिर्फ एलओयु हैं। सीएम फलाइंग के डीएसपी दिनेश यादव का कहना हैं कि इसमें घोटाला तो हैं व जिन -जिन फार्म हाऊस के मालिकों एलओयु दिए गए हैं,उनको दो एकड़ जमीनों पर बने कवर एरिया पर दी गई हैं, इस में पार्किंग की जगह और इसके आगे व पीछे भी कुछ हिस्सा को छोड़ना होता हैं जिसको बिल्कुल नहीं छोड़ा गया हैं। इन फार्म हाऊसों पर जमीनें काफी जाएदा हैं और कवर एरिया भी बहुत जाएदा हैं,वावजूद इसके वह मात्र दो एकड़ जमीनों का ही एलओयु क्यों लिया व दिया गया हैं,यह एक बड़ा सवाल हैं। क्या एलओयु देने से पहले निगम प्रशासन ने मौके का मुआयना नहीं किया था या नहीं किया था तो यह गलती क्यों हुई।
इसका मतलब बिल्कुल साफ़ है कि एलओयु निगम अधिकारीयों ने अपने कार्यालय में बैठ कर और अपनी आंखें बंद करके एलओयु दे दिया । कई सवाल ऐसे हैं जिसकी जांच होना अभी बाकि हैं।दरअसल में वर्ष -2014 में सरकार ने एक पॉलिसी बनाई थी जिसमें चल रहे अवैध बैंकट हॉल को रेगुलाइज किया जाना था उस दौरान तक़रीबन 24 से 28 लोगों ने अप्लीकेशन दी थी इनमें से 6 लोगों को अभी एलओयु दिया गया और इसके बाद पहला फार्म हाउस हैं डिलाइट गार्डन हैं एलओ यु के बाद की फोर्मल्टी पूरी की हैं जिसको रेगुलाइज कर दिया गया हैं। अभी भी पांच लोग बाकि हैं।आपको बतादें कि जिन -जिन लोगों को एलओयु मिला हैं उनमें 2 -4 लोग ऐसे हैं जोकि एक कैबिनेट मंत्री के नजदीकी हैं। संभवता हैं कि उनका प्रभाव का इस्तेमाल जरूर किया गया होगा। इसके बाद भी प्रत्येक फ़ार्म हाऊस के मालिकों से रिश्वत के तौर पर तक़रीबन 25 -25 लाख रूपए लिए गए हैं जोकि बढ़ा कर अब 30 लाख रूपए कर दी गई हैं और जिन -जिन का फार्म हाउस को रेगुलाईज किए गए हैं किस आधार पर फारेस्ट व अन्य विभागों ने एनओसी जारी की हैं इन पहलुओं पर ही जांच की जा रहीं हैं। इस मामले में खालसा गार्डन मालिक नरेंद्र सिंह उर्फ़ डिमंपी का कहना हैं कि खालसा के नाम से उनका दो फार्म हाऊस हैं जो कि सबसे पुराना गार्डन हैं। इनमें से एक गार्डन का एलओयू मिल गया हैं और दूसरे गार्डन के लिए सरकारी दफ्तरों में उनकी फाइलें अभी चल रहीं हैं। उनका कहना हैं कि सबसे पहले उन्होनें ही कोर्ट में केस की थी और वह जीते भी थे और उन्हीं की वजह से सरकार ने रेगुलाइज के लिए पॉलिसी बनाई थी।

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