अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस ने कहा है कि केंद्र सरकार की 84 हजार करोड़ रुपये की ‘समुद्र मंथन’ योजना केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूंजीपति मित्र अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई है।सोमवार को कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शक्तिसिंह गोहिल ने मांग की कि ‘समुद्र मंथन’ योजना को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि 84,084 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि निजी कंपनियों को दिए जाने का कारण सार्वजनिक किया जाए। तेल एवं गैस की खोज के लिए यह राशि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ओएनजीसी को दी जाए। उन्होंने कहा कि देश में भारी बेरोजगारी के बावजूद रोजगार सृजन न करने वाली योजनाओं के लिए निजी कंपनियों को 84,084 करोड़ रुपये देने का औचित्य स्पष्ट किया जाए। इसके साथ ही, बीते वर्षों में देश के घरेलू तेल और गैस उत्पादन में आई कमी पर केंद्र की मोदी सरकार जवाब दे।

गोहिल ने बताया कि इस योजना को कैबिनेट ने एक अगस्त को मंजूरी दी है और इसके पहले चरण में 2031 तक 84,084 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। मोदी सरकार इस योजना के तहत 50 प्रतिशत राशि सीधे उस कंपनी को देगी, जो समुद्र में तेल-गैस ढूंढने का काम करेगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि एक कुआं 675 करोड़ रुपये में खोदा गया है, तो सरकार उस कंपनी को उसकी आधी राशि देगी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ओएनजीसी का बेहतरीन ट्रैक रिकॉर्ड और व्यापक अनुभव है, लेकिन उसे दरकिनार कर निजी क्षेत्र को लाभ पहुंचाया जा रहा है। गोहिल ने बताया कि तेल और गैस उत्पादन के लिए कुओं की खुदाई करने वाली अडानी वेलस्पन एक्सप्लोरेशन लिमिटेड के पास बेहद कम अनुभव है एवं यह कंपनी पहले से ही घाटे में चल रही है। इसमें अडानी समूह की 65 प्रतिशत और वेलस्पन समूह की 35 प्रतिशत हिस्सेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘समुद्र मंथन’ योजना इस कंपनी के घाटे को फायदे में बदलने के लिए बनाई गई है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि इस योजना की घोषणा के बाद अडानी वेलस्पन एक्सप्लोरेशन लिमिटेड के एमडी ने वेबसाइट पर लिखा कि सरकार की नीति से उनकी कंपनी को बड़ा लाभ होगा। कांग्रेस नेता ने यह भी याद दिलाया कि वेलस्पन समूह ने इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से भाजपा को 10 करोड़ रुपये का चंदा दिया था।उन्होंने कहा कि ‘समुद्र मंथन’ योजना के तहत कई प्रक्रियाएं हैं, जिनमें पहले ब्लॉक खरीदे जाते हैं और फिर पर्यावरण मंजूरी ली जाती है। लेकिन अडानी वेलस्पन कंपनी के पास पहले ही मुंबई व कच्छ में तीन ब्लॉक मौजूद हैं और उसे सभी आवश्यक मंजूरियां पहले ही मिल चुकी हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के बारे में जैसे ही सरकार ने जानकारी दी, वैसे ही प्रणव अडानी ने ट्वीट कर नरेंद्र मोदी की तारीफ कर दी। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि ‘समुद्र मंथन’ से देश की जनता के हिस्से में जहर और अडानी के हिस्से में अमृत आएगा।कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि समुद्र के बीच बने कुओं की मौजूदगी और उनकी वास्तविक गहराई की जांच नहीं की जा सकती, जिससे भयमुक्त होकर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होगा। उन्होंने यह भी बताया कि इस योजना में तेल और गैस के लिए एक साझा पाइपलाइन का उल्लेख है, जो अडानी के फायदे के लिए है। गोहिल ने देशभर में नियमों की अनदेखी कर अडानी को पहुंचाए जा रहे फायदों का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में चुनाव के वक्त भी 6,600 मेगावाट का टेंडर सीधे अडानी को मिला और यह सिंगल टेंडर था। मध्य प्रदेश के सिंगरौली में अडानी को कोल माइनिंग के ब्लॉक दिए गए, जिसमें सभी नियमों को नजरअंदाज कर दिया गया। ग्राम सभा से प्रस्ताव पास कराना अनिवार्य था, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। इसके अलावा, कच्छ में अडानी की एक कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए कॉपर के कच्चे माल के आयात पर लगी 2.5 प्रतिशत की पूरी कस्टम ड्यूटी ही हटा दी गई थी। कांग्रेस नेता ने याद दिलाया कि जब वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब जीएसपीसी (गुजरात राज्य पेट्रोलियम निगम) में 27 हजार करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार हुआ था और कैग ने इसका खुलासा किया था। उन्होंने कहा कि सामने आया था कि धरातल पर गैस या तेल की एक बूंद भी नहीं मिली और समुद्र में बनाए गए अधिकांश कुएं कागज़ों पर ही थे। उन्होंने मांग की कि इस भ्रष्टाचार की भी न्यायिक जांच होनी चाहिए।
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