
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार द्वारा आदिवासियों के साथ बड़े पैमाने पर की जा रही धोखाधड़ी का खुलासा करते हुए बताया है कि सिंगरौली में अडानी समूह की कंपनी को कोल ब्लॉक में खनन की अनुमति देने के लिए फर्जी ग्राम सभाओं और ग्रामीणों की सहमति के नाम पर मृतकों के फर्जी अंगूठों के निशानों का इस्तेमाल किया गया। कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए कांग्रेस कार्य समिति के स्थाई आमंत्रित सदस्य के. राजू और अनुसूचित जनजाति विभाग के अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने इस फर्जीवाड़े को ‘सिंगरौली फाइल्स’ नाम देते हुए कहा कि भाजपा सरकार में हर तरह की धोखाधड़ी मुमकिन है। देश में वोट चोरी, सीट चोरी, चंदा चोरी के बाद अब ‘अंगूठा चोरी’ सामने आई है। उन्होंने बताया कि ग्राम सभाओं की अनुमति लिए बिना खनन की मंजूरी देना वन अधिकार अधिनियम और पेसा कानून के तहत बने नियमों का उल्लंघन है। इसके बावजूद फर्जी ग्राम सभाएं बनाकर और फर्जी अंगूठों के निशानों के साथ अनुमति दिखाकर धड़ल्ले से खनन कराया जा रहा है।
कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि इस पूरे फर्जीवाड़े की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराई जाए। जालसाजी में शामिल दोषी अधिकारियों और कंपनियों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज हो। जब तक इस पूरे घोटाले की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक विवादित खदानों में खनन गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही पार्टी नेताओं ने यह मांग भी की कि चुनावी फायदे के लिए एसआईआर के जरिए मतदाता सूचियों से जिंदा लोगों के नाम काटने और उनका मताधिकार छीनने के मामले की भी दोबारा जांच हो। कांग्रेस नेता के. राजू ने कहा कि भाजपा सरकार ने लगातार आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों के बजाय अपने पूंजीपति मित्रों को प्राथमिकता दी है। पिछले 12 वर्षों से केंद्र और राज्यों की भाजपा सरकारें देश के आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को नियमगिरी की पहाड़ियों, हसदेव अरण्य के घने जंगलों या बस्तर, सीजी माली और रायगढ़ की जमीनों में सिर्फ खदानें दिखती हैं; वहां सदियों से रहने वाले आदिवासी नहीं दिखते। उन्होंने कहा कि वन अधिकार अधिनियम के तहत ग्राम सभाओं को सामुदायिक वन संसाधनों के प्रबंधन का अधिकार है और अधिकारों के निपटारे से पहले किसी को बेदखल नहीं किया जा सकता, लेकिन अधिकारों के निपटारे के बिना ही आदिवासियों को विस्थापित किया जा रहा है। यूपीए सरकार द्वारा बनाए गए भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास कानून के मुताबिक अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों की सहमति के बिना जमीन नहीं ली जा सकती और सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन भी अनिवार्य है, जिसे पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इसी तरह, आदिवासियों को संरक्षण देने वाले पेसा कानून का भी उल्लंघन हो रहा है। वहीं, डॉ. विक्रांत भूरिया ने आरटीआई से मिले दस्तावेजों और मृत्यु प्रमाण पत्रों के आधार पर अहम खुलासा करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश के सिंगरौली में अडानी समूह की कंपनी स्ट्रैटेटेक मिनरल रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड को धिरौली कोल ब्लॉक में खदान की मंजूरी देने के लिए यह फर्जीवाड़ा हुआ। उन्होंने बताया कि बृजभान सिंह की मृत्यु साल 2014 में हुई थी, लेकिन उनकी मौत के 7 साल बाद नवंबर 2021 की ग्राम सभा बैठक के रजिस्टर में उनके नाम पर अंगूठा लगाकर खदान के लिए सहमति दिखा दी गई। फुलेश्वरी सिंह की मृत्यु 2018 में हुई थी, लेकिन उनके अंगूठे का निशान भी 2021 की बैठक में दर्ज है। इसी तरह कई अन्य मृतकों के अंगूठों के निशान वर्ष 2021 की ग्राम सभा के प्रस्ताव में खदान और वन भूमि के उपयोग में परिवर्तन की अनुमति के लिए इस्तेमाल किए गए।डॉ. भूरिया ने बताया कि धिरौली कोल ब्लॉक का विरोध कर रहे सुमारू सिंह और सोनमती सिंह (जो दिल्ली आकर राहुल गांधी से भी मिले थे) पढ़े-लिखे हैं और हस्ताक्षर करते हैं, लेकिन ग्राम सभा के फर्जी प्रस्ताव में उनके भी फर्जी तरीके से अंगूठे के निशान लगा दिए गए।
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