
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस ने महाराष्ट्र की ‘लाडकी बहीण’ योजना से करीब 38 प्रतिशत लाभार्थियों को बाहर करने पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव बीतते ही भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति सरकार माताओं-बहनों को धोखा देकर उन्हें उनके हक से बेदखल कर रही है।नई दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता अतुल लोंढे पाटिल ने कहा कि चुनाव जीतने के लिए आनन-फानन में लाई गई इस योजना में सरकार लगभग 38 प्रतिशत महिलाओं को सूची से हटा चुकी है और इस आंकड़े को जल्द ही 50 प्रतिशत से ऊपर ले जाने की तैयारी है।अतुल लोंढे ने कहा कि सरकार ने 62 लाख महिलाओं को तो ई-केवाईसी न होने का बहाना बनाकर निकाल दिया। लगभग 1,80,000 महिलाओं को 65 वर्ष से अधिक की उम्र बताकर योजना से बाहर किया है। उन्होंने पूछा कि जब महिलाओं ने आवेदन के समय अपना आधार कार्ड जमा किया था, तो क्या सरकार को उसपर लिखी जन्मतिथि दिखाई नहीं दे रही थी? उन्होंने कहा कि घरेलू कामगार और अत्यंत गरीब महिलाओं के पास स्मार्टफोन भी नहीं होते, लेकिन उन्हें ई-केवाईसी करने को कहा जा रहा है।
अतुल लोंढे ने फॉर्म में जटिल कैप्चा कोड का जिक्र करते हुए कहा कि साधारण एवं अशिक्षित महिलाओं के लिए बड़े और छोटे वर्णाक्षरों वाले कैप्चा कोड को समझना नामुमकिन है। उन्होंने इसे योजना से गरीब महिलाओं को जानबूझकर बाहर रखने का एक और तकनीकी षड्यंत्र बताया। अतुल लोंढे ने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि महाराष्ट्र में ‘लाडकी बहीण’ योजना का कोई दफ्तर ही नहीं है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने जितनी भी योजनाएं लागू की, उन सभी का दफ्तर है और उसकी पूरी प्रक्रिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा सरकार ने साजिश कर गरीब महिलाओं के पेट पर लात मारी है। उन्होंने अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन्होंने भगवान को धोखा दिया है, उन्होंने माताओं-बहनों को भी धोखा दिया है। कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार ने इस योजना को लागू करने और वोटर लिस्ट में हेरफेर करने के उद्देश्य से 2024 के विधानसभा चुनावों को एक महीने आगे बढ़ा दिया था। उन्होंने वित्तीय कुप्रबंधन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि तत्कालीन वित्त मंत्री अजीत पवार और उनके विभाग ने स्पष्ट हिदायत दी थी कि महाराष्ट्र की वित्तीय स्थिति ऐसी नहीं है कि वह इस योजना का अतिरिक्त बोझ उठा सके। इसके बावजूद, तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चुनावी लाभ के लिए 1,500 रुपये प्रति माह दिए और बाद में इसे बढ़ाकर 2,100 रुपये करने का झांसा दिया। लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद बढ़ी हुई राशि देना तो दूर, तमाम कारण बताते हुए लाखों महिलाओं के नाम योजना से हटा दिए गए। कांग्रेस नेता ने कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि जिस काम के लिए करीब 29,732 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे, उस पर सरकार ने 33,237 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। कैग ने अतिरिक्त 3,500 करोड़ रुपये खर्च होने को लेकर सवाल किया तो सरकार के पास जवाब नहीं था। उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे इस पूरे मामले में जवाबदेही तय करें और स्पष्ट करें कि किसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने यह भी मांग की कि केवाईसी के आधार पर योजना से बाहर की गई 62 लाख पात्र महिलाओं की प्रशासन खुद केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर उनका लाभ तत्काल बहाल करे और उन्हें राशि दी जाए।
कांग्रेस नेता ने यह मांग भी की कि इस योजना से महिलाओं को बाहर करने के पूरे निर्णय की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच हो। साथ ही योजना के क्रियान्वयन में हुई अनियमितताओं, पुरुषों व सरकारी कर्मचारियों समेत अपात्र लोगों को लाभ देने तथा सरकारी धन के दुरुपयोग के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
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