Athrav – Online News Portal
दिल्ली राजनीतिक राष्ट्रीय हाइलाइट्स

कांग्रेस का खुलासा: सीबीएसई के डिजिटल मूल्यांकन का ठेका कोएम्प्ट को देने के लिए नियमों को जानबूझकर कमजोर किया गया। 


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
नई दिल्ली:कांग्रेस ने सोमवार को मोदी सरकार को घेरते हुए खुलासा किया है कि सीबीएसई के नए ‘ऑन-स्क्रीन’ डिजिटल मूल्यांकन (ओएसएम) का ठेका कोएम्प्ट कंपनी को देने के लिए टेंडर के नियमों और तकनीकी मानकों को जानबूझकर कमजोर किया गया था। नई दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए मीडिया और प्रचार (संचार विभाग) के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली में कथित गड़बड़ियों और टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इन गंभीर मुद्दों पर चुप्पी को लेकर भी हमला बोला। मोदी सरकार पर छात्रों के भविष्य को जानबूझकर अंधकार में धकेलने का गंभीर आरोप लगाते हुए खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि शिक्षकों और विशेषज्ञों द्वारा डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में 36 बड़ी कमियों की चेतावनी दिए जाने के बावजूद, सीबीएसई ने इसे लगभग 18 लाख छात्रों पर जबरन क्यों थोपा? कोएम्प्ट कंपनी को ठेका देने से पहले टेंडर की शर्तों, स्कैन गुणवत्ता और साइबर सुरक्षा मानकों में ढील देने का आदेश किसने दिया था? इस दागी ट्रैक रिकॉर्ड वाली कंपनी (जो पहले तेलंगाना में ‘ग्लोबरेना’ नाम से काम करते हुए विवादों में आई थी) के भाजपा नेताओं तथा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से क्या रिश्ते हैं?
खेड़ा ने आगे कहा कि पिछले दो वर्षों में नीट, यूजीसी-नेट, सीयूईटी और विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों के कारण लाखों छात्र प्रभावित हुए हैं। अब सीबीएसई की नई ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली में भी गंभीर खामियां सामने आ रही हैं। उन्होंने विस्तार से बताया कि पहले छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं सीधे परीक्षकों के पास जाती थीं, जहां उनका मूल्यांकन किया जाता था, लेकिन यह व्यवस्था बदल दी गई। नई प्रणाली के तहत उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर पोर्टल पर अपलोड करने की व्यवस्था की गई और इस प्रक्रिया को संचालित करने के लिए एक निजी कंपनी को ठेका दिया गया।उन्होंने बताया कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के लिए वेंडर ढूंढने से पहले सीबीएसई को तीन अलग-अलग टेंडर जारी करने पड़े, क्योंकि पहले टेंडर में कोई बोली नहीं लगी और दूसरे टेंडर में कोई तकनीकी रूप से योग्य बोली लगाने वाला नहीं मिला। ऐसे में अगस्त 2025 में टेंडर का तीसरा दौर आयोजित किया गया, जिसमें कोएम्प्ट कंपनी शामिल हुई।उन्होंने कहा कि कोएम्प्ट कंपनी को ठेका देने के लिए बार-बार टेंडर नियम बदल दिए गए, स्कैन गुणवत्ता की डीपीआई 300 होनी चाहिए थी, लेकिन इसे घटाकर 200 कर दिया गया जिससे उत्तर पुस्तिका पढ़ने लायक नहीं रह गई। पहले टेंडर में स्पष्ट रूप से रोबोटिक हाई-स्पीड स्कैनर की अनिवार्य शर्त थी, जिसके तहत टीसीएस कंपनी क्वालीफाई कर गई थी, लेकिन बाद में इसकी अनिवार्यता को हटाकर सामान्य स्कैनर तक सीमित कर दिया गया।  उन्होंने आरोप लगाया कि अनुभव और सुरक्षा मानकों में ढील देकर कंपनी के पिछले प्रदर्शन, वित्तीय मजबूती और खुद का डेटा सेंटर होने जैसी शर्तों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। ब्लैकलिस्टिंग के नियमों को नरम करते हुए यह शर्त भी हटा दी गई कि कंपनी अतीत में ब्लैकलिस्ट न हुई हो। खेड़ा ने लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के ट्वीट का जिक्र करते हुए कहा कि लगभग पांच लाख छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया है, जिसके कारण अभिभावकों की जेब से करीब 100 करोड़ रुपये वसूले जा रहे हैं, जबकि इसमें छात्रों की कोई गलती नहीं है।एनडीए सरकार पर शिक्षा के मामले में समझौता करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार की तुलना में शिक्षा के लिए बजट आवंटन में 50 प्रतिशत की कटौती की गई है। उन्होंने बताया कि 2013-14 (यूपीए-2 के अंतिम वित्त वर्ष) में शिक्षा पर कुल बजट का 4.77 प्रतिशत खर्च होता था, जो अब मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में घटकर बजट का मात्र 2.50 प्रतिशत रह गया है।उन्होंने यह भी बताया कि 19 साल के हैकर ने सीबीएसई की सुरक्षा खामियों को उजागर कर दिया, जिसके कारण करोड़ों छात्रों की निजी जानकारी, फोन नंबर, ईमेल, उत्तर पुस्तिकाएं और भुगतान के रिकॉर्ड सार्वजनिक होने का खतरा पैदा हो गया। उन्होंने कहा कि सरकार को शिकायतों का समाधान करना चाहिए, लेकिन सीबीएसई इस मामले को दबाने का प्रयास कर रही है।खेड़ा ने मोदी सरकार से जवाबदेही की मांग करते हुए सवाल किया कि भारत की शिक्षा प्रणाली को अराजकता में धकेलने के बाद क्या प्रधानमंत्री मोदी अपनी नाकामी को छिपाते रहेंगे या आखिरकार जवाबदेही तय करेंगे? कांग्रेस की मांग को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि भारत के शिक्षा इतिहास की सबसे बड़ी संस्थागत नाकामियों में से एक की अगुवाई करने के लिए धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।

Related posts

वीडियो: सलमान खुर्शीद, दिग्विजय सिंह, कुमारी शैलजा, के. राजू और गुरदीप सप्पल ने मीडिया को संबोधित किया।

Ajit Sinha

दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले सभी गैरजरूरी दफ्तर और सेवाएं 31 मार्च तक बंद: अरविन्द केजरीवाल

Ajit Sinha

दिल्ली ब्रेकिंग:पूर्व सेना प्रमुख की किताब को लेकर लोकसभा में हंगामा, सदन तीन बार स्थगित

Ajit Sinha
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
error: Content is protected !!
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x