
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:मणिपुर में नए सिरे से हिंसा भड़कने के बाद कांग्रेस ने राज्य में शांति बहाली के लिए तत्काल कदम उठाए जाने और एक समय सीमा के भीतर न्याय सुनिश्चित करने वाली जांच की मांग की है।नई दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए मणिपुर से कांग्रेस सांसद ए. बिमोल अकोइजाम ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार ने शांति बहाल करने और लोगों की जान की रक्षा करने की अपनी ज़िम्मेदारी पूरी तरह छोड़ दी है। उन्होंने कहा कि मणिपुर पिछले तीन वर्षों से जल रहा है, लेकिन मोदी सरकार इसे देश का हिस्सा मानने के बजाय दूसरे देश की तरह व्यवहार कर रही है।मणिपुर में हालिया हत्याओं और जारी अशांति को लेकर पार्टी ने राज्यपाल के माध्यम से प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन दिया है, जिसमें तत्काल सरकारी हस्तक्षेप और समयसीमा के भीतर जांच की मांग की गई है।

अकोइजाम ने बताया कि 7 अप्रैल को मणिपुर के बिष्णुपुर जिले के ट्रोंगलाओबी गांव में एक प्रोजेक्टाइल हमला हुआ, जिसमें दो छोटे बच्चों की मौत हो गई और उनकी मां घायल हो गई। उन्होंने कहा कि यह घटना इस बात का सबूत है कि मणिपुर में हिंसा में कमी नहीं आई है और स्थिति अब भी नियंत्रण से बाहर है।अकोइजाम ने सरकार द्वारा बनाए गए “बफर जोन” को गैर-कानूनी और असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल उन्हें उनके अपने निर्वाचन क्षेत्र में जाने से रोक रहे हैं, जबकि इसके लिए कोई कानूनी आदेश नहीं है। 7 अप्रैल की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमला बफर जोन के भीतर हुआ, जहां पुलिस और सीआरपीएफ की तैनाती के बावजूद मदद पहुंचने में घंटों लग गए।कांग्रेस सांसद ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब मणिपुर जल रहा है, तब प्रधानमंत्री और गृह मंत्री महिला आरक्षण बिल की आड़ में परिसीमन के जरिए अपनी सत्ता मजबूत करने में व्यस्त हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूर्वोत्तर के राज्यों को कमजोर करने की एक साजिश है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले तीन सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार भी मणिपुर का पूर्ण दौरा नहीं किया, जो जनता की पीड़ा के प्रति लापरवाह रवैये को दर्शाता है।अकोइजाम ने मणिपुर कांग्रेस द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों बच्चों की हत्या की जांच जल्द से जल्द पूरी की जाए। हिंसक गतिविधियों पर लगाम लगे और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। राज्य में क़ानून-व्यवस्था को बहाल कर उसे मजबूत किया जाए। कानून-व्यवस्था पर राज्य के अधिकार को कमज़ोर करने वाली सभी कार्रवाइयों को रोका जाए। नागरिकों को उनके घरों और आवश्यक सेवाओं तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित हो। 3 मई 2023 की हिंसा की जांच के नतीजे जल्द पूरे कर उन्हें सार्वजनिक किया जाए। पीड़ितों को न्याय और उचित मुआवजा प्रदान किया जाए। हिंसा से प्रभावित अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा हो। सभी हितधारकों के साथ बातचीत शुरू कर सामान्य स्थिति बहाल की जाए। नागरिकों और ग़ैर-नागरिकों की पहचान के लिए स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया स्थापित होने तक जनगणना को स्थगित किया जाए।
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