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कांग्रेस की मांग- वर्तमान 543 सीटों पर महिला आरक्षण तुरंत लागू हो, शर्तों को हटाया जाए।


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
नई दिल्ली:कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को डर और घबराहट का प्रतीक बताया है। पार्टी ने कहा कि प्रधानमंत्री महिला आरक्षण बिल की आड़ में विभाजन कारी और गैर-लोकतांत्रिक परिसीमन करना चाहते थे। कांग्रेस ने महिला आरक्षण को वर्तमान 543 सीटों के आधार पर तुरंत लागू करने की मांग दोहराई। पार्टी ने कहा कि महिला आरक्षण के लिए रखी गई शर्तों को हटाया जाए और सदन में विधेयक लाकर महिलाओं को 181 सीटें (एक तिहाई) दी जाएं। ऐसा करने पर पूरा विपक्ष मोदी सरकार का साथ देगा।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी की सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म विभाग की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने 29 मिनट के संबोधन में 58 बार कांग्रेस का नाम लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा जनता के मुद्दे उठाए जाने से नरेंद्र मोदी बौखलाए हुए हैं और महिला आरक्षण के नाम पर घड़ियाली आंसू बहाकर देश को गुमराह कर रहे हैं।श्रीनेत ने कहा कि मोदी सरकार महिला सशक्तिकरण की बात तो करती है, लेकिन वास्तव में महिला आरक्षण लागू करने से बच रही है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल तो 2023 में सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, लेकिन मोदी सरकार ने इसमें शर्तें लगाकर इसे रोक रखा है। उन्होंने कहा कि 30 महीने तक मोदी सरकार ने इस बिल को अधिसूचित तक नहीं किया और हाल ही में 16 अप्रैल 2026 को इसकी अधिसूचना जारी की गई। उन्होंने सवाल किया कि नरेंद्र मोदी 543 सीटों पर महिलाओं को आरक्षण क्यों नहीं दे रहे हैं? वे महिलाओं का हक क्यों छीन रहे हैं?
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि मोदी सरकार महिला आरक्षण को ढाल बनाकर विभाजनकारी और अलोकतांत्रिक परिसीमन थोपना चाहती थी। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने मोदी सरकार के विभाजनकारी मंसूबे पर पानी फेर दिया है। उन्होंने सभी राज्यों की 50 प्रतिशत सीटों की बढ़ोतरी को लेकर प्रधानमंत्री के दावे पर सवाल उठाया और बताया कि बिल के मसौदे में इसका कहीं भी ज़िक्र नहीं था। उन्होंने कहा कि परिसीमन से दक्षिण, पूर्वोत्तर और छोटे राज्यों का लोकसभा में प्रतिनिधित्व कम हो जाता। उन्होंने असम और जम्मू-कश्मीर में परिसीमन का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा का एक ही एजेंडा है कि सीटों को कांट-छांटकर ऐसा परिसीमन किया जाए कि सत्ता में वही काबिज रहे।उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी पिछड़े वर्ग की महिलाओं को उनका हक देना नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण  जातिगत जनगणना के बाद लागू होगा तो पिछड़े वर्ग की महिलाओं को भी आरक्षण देना पड़ेगा। मोदी ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि वह किसी भी महिला को आरक्षण देना नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि मोदी ने कांग्रेस द्वारा लगातार मांग के बाद मजबूरी में जातिगत जनगणना कराने की घोषणा की।
महिला सम्मान को लेकर प्रधानमंत्री के दावों पर सवाल उठाते हुए श्रीनेत ने महिलाओं के साथ हुई अत्याचार की कई घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने मणिपुर हिंसा, हाथरस कांड, उन्नाव, लखीमपुर, बिलकिस बानो मामले में दोषियों की रिहाई, अंकिता भंडारी हत्याकांड, महिला पहलवानों के विरोध प्रदर्शन समेत कई घटनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री चुप रहे या दोषियों के साथ खड़े नजर आए। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार में मंत्री हरदीप पुरी के कुख्यात यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ संबंध रहे हैं लेकिन प्रधानमंत्री उन्हें बचा रहे हैं। उन्होंने एपस्टीन के कहने पर मोदी के अमेरिका और इज़रायल दौरे पर जाने का भी उल्लेख किया। कांग्रेस प्रवक्ता ने याद दिलाया कि कैसे प्रधानमंत्री ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को कांग्रेस की विधवा कहा था। श्रीनेत ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड, शूर्पनखा वाली टिप्पणी और मुजरा जैसे शब्दों का प्रयोग उनकी महिला विरोधी सोच को दर्शाते हैं। श्रीनेत ने मांग की कि प्रधानमंत्री को अपने बयानों के लिए माफी मांगनी चाहिए। श्रीनेत ने आंकड़ों के जरिए प्रधानमंत्री के महिला हितैषी होने की पोल खोलते हुए बताया कि भाजपा के 240 सांसदों में सिर्फ 12.9 प्रतिशत यानि की 31 महिलाएं हैं, विधायकों में सिर्फ 9.9 प्रतिशत महिलाएं हैं और केंद्र में 72 मंत्रियों में सिर्फ सात महिलाएं हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के 54 सांसदों और विधायकों पर हत्या और दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों के मामले दर्ज हैं।कांग्रेस प्रवक्ता ने याद दिलाया कि आज पंचायतों में जो 15 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं, वह कांग्रेस सरकार द्वारा लाए गए 73वें और 74वें संविधान संशोधन की देन हैं, जिनके जनक राजीव गांधी थे। इससे महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिला था। उन्होंने कहा कि उस समय लाल कृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी, जसवंत सिंह और राम जेठमलानी जैसे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने इसका विरोध किया था।भाजपा द्वारा प्रायोजित प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री महिला आरक्षण के पीछे छिपकर प्रदर्शन करा रहे हैं। उन्होंने सरकार को महंगाई, एलपीजी संकट और बेरोजगारी पर घर-घर जाकर महिलाओं से बात करने की चुनौती दी।

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