अरविन्द उत्तम की रिपोर्ट
साइबर अपराध की दुनिया से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सेक्टर 65 स्थित एक प्रमुख फिनटेक कंपनी के सर्वर और एपीआई पोर्टल में सेंध लगाकर शातिर हैकरों ने करीब 2 करोड़ 42 लाख रुपये उड़ा लिए। हैरान करने वाली बात यह है कि यह पूरी वारदात सिर्फ आठ घंटे के भीतर 497 गैर-कानूनी ट्रांजेक्शन्स के जरिए अंजाम दी गई। कंपनी के निदेशक की शिकायत पर साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज कर लिया गया है।

साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज शिकायत के अनुसार फिनटेक कंपनी मोबाइल रिचार्ज, बिल भुगतान, आधार-इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम और मनी ट्रांसफर जैसी वित्तीय सेवाएं मुहैया कराती है। गत 13 सितंबर की दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे के बीच कंपनी के सर्वर और पेमेंट एपीआई में संदिग्ध हलचल हुई। प्राथमिक जांच से पता चलता है कि साइबर अपराधियों ने सुरक्षा चक्र को भेदते हुए ऑटोमेटेड यानी बेहद तेज गति वाले ट्रांजेक्शन्स का इस्तेमाल किया और चंद घंटों में 2,42,62,576 रुपये ट्रांसफर कर दिए।कंपनी को इस बड़े साइबर हमले की तुरंत भनक तक नहीं लगी। रूटीन ऑडिट के दौरान असामान्य ट्रांजेक्शन दर्ज दिखे, तब जाकर प्रबंधन के होश उड़े। इंटरनल जांच में सर्वर पर अनधिकृत एक्सेस की पुष्टि हुई, जिसके बाद तुरंत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई। जांच में सामने आया है कि चोरी की गई पूरी रकम देश के 28 अलग-अलग बैंकों के 58 बैंक खातों में तेजी से भेजी गई। पुलिस अब इन खातों के धारकों (खाताधारकों) की पहचान, डिजिटल वॉलेट ट्रांसफर और आगे के कैश फ्लो की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है ताकि मुख्य सरगना तक पहुंचा जा सके।साइबर सेल और तकनीकी फॉरेंसिक टीमें फिलहाल सर्वर लॉग्स, संदिग्ध आईपी (IP) एड्रेस और एपीआई कॉल्स का विश्लेषण कर रही हैं। जांच का एक बड़ा बिंदु यह भी है कि क्या इस वारदात में किसी अंदरूनी कर्मचारी की मिलीभगत थी, या फिर सिस्टम की तकनीकी खामियों और क्रेडेंशियल लीक का फायदा उठाकर बाहर से यह सेंधमारी की गई।
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