अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
पीएस साइबर, उत्तर-पश्चिम जिला, दिल्ली की टीम ने शुक्रवार को ₹7.36 करोड़ के साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस इस गिरोह के 6 आरोपितों को गिरफ्तार किए है जिसमें एक बैंक मैनेजर शामिल है, जिनके नाम मयंक कपूर, स्व. मुलखराज कपूर के पुत्र, निवासी रोहिल्ला किराना स्टोर, न्यू अनाज मंडी के पास, नजफगढ़, बाबा हरिदास नगर, दक्षिण-पश्चिम, दिल्ली-110043 एवं जगदीश कॉलोनी, रोहतक,अंकुर कुमार, सतेश चंद्र के पुत्र, निवासी रोहिणी सेक्टर-7, दिल्ली, आयु-31 वर्ष,मनोज, राम कुमार के पुत्र, निवासी प्रेम नगर-II, किराड़ी, सुलेमान नगर, दिल्ली-110086, आयु-30 वर्ष,पंकज पांडे , उमेश पांडे के पुत्र, निवासी हरिजन बस्ती, राजीव पार्क, पालम रोड, दक्षिण-पश्चिम, दिल्ली, आयु-28 वर्ष,महिला, गुलाम अली की पुत्री, निवासी शाकुर पुर, सरस्वती विहार, उत्तर-पश्चिम, दिल्ली, आयु-25 वर्ष व शोभित अग्रवाल, अमरनाथ अग्रवाल के पुत्र, निवासी ईडी ब्लॉक, पीतमपुरा, दिल्ली, आयु- 38 वर्ष है। इनके पास से पुलिस ने 1 लैपटॉप, 11 सिम कार्ड,7 चेकबुक,7 मोबाइल फोन,7 डेबिट कार्ड,60 हजार रुपये नकद,लगभग 150 ग्राम सोने के आभूषण,55 पासपोर्ट आकार के फोटोग्राफ,63 आधार कार्ड,60 पैन कार्ड बरामद किए है।

डीसीपी, उत्तर-पश्चिम जिला, आकांक्षा यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि म्यूल खाता डेटा की जांच के दौरान, कैथरीन सिरियन बैंक (सीएसबी) की त्रि नगर शाखा को एक प्रमुख शाखा के रूप में पहचाना गया, जिस पर म्यूल खातों को खोलने में सहायता करने का संदेह था। ऐसे ही एक खाते की विस्तृत प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि खाता धारक, राहुल, न तो शाखा में आया था और न ही उसने बैंक खाता खोलने के लिए आवेदन किया था। इसके अतिरिक्त, उसी शाखा में रखे गए दो अन्य संदिग्ध म्यूल खातों से संबंधित पते सत्यापित नहीं किए जा सके। इन तीनों खातों को भारत भर में दर्ज साइबर अपराध शिकायतों से जुड़ा पाया गया। तदनुसार, प्रारंभिक जांच के पश्चात, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 317(2), 317(5), 338, 336(3), 340 एवं 61(2) के अंतर्गत एफआईआर संख्या 28/26 दिनांक 17.06.2026 दर्ज की गई, और जांच प्रारंभ की गई।

उनका कहना है कि जांच के दौरान, सीएसबी बैंक की त्रिनगर शाखा में संचालित 17 अतिरिक्त खाते सामने आए, जिनमें खाता धारकों के पत्ते अस्तित्वहीन पाए गए तथा फोटोग्राफ और केवाईसी दस्तावेज लाइव अवस्था में प्राप्त नहीं किए गए थे। अपराधियों और बैंक अधिकारियों के एक बड़े गिरोह की संलिप्तता का संदेह होने पर, एसएचओ, पीएस साइबर, उत्तर-पश्चिम जिला, इंस्पेक्टर दिनेश दहिया के नेतृत्व में, एसीपी/साइबर, सुश्री सृष्टि भट्ट (आईपीएस) के पर्यवेक्षण तथा अधोहस्ताक्षरी के समग्र पर्यवेक्षण में, एसआई नवीन, एचसी गौरव, एचसी दीपक, एचसी सचिन एवं कॉन्स्टेबल अनुज को सम्मिलित करते हुए एक समर्पित टीम गठित की गई।उनका कहना है कि जांच के दौरान, पंजीकृत मोबाइल नंबरों, पंजीकृत ईमेल आईडी, इन ईमेल आईडी से जुड़े उपकरणों तथा ईमेल कनेक्टिविटी की पिछली श्रृंखला का गहन तकनीकी विश्लेषण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप आरोपी मयंक कपूर @ रिंकू, पुत्र मुल्क राज कपूर, को म्यूल खातों के संचालक के रूप में पहचाना गया। इसके बाद तकनीकी निगरानी के माध्यम से उसके ठिकाने की पहचान की गई, और उसे बाबा हरिदास नगर से गिरफ्तार किया गया। उसकी गिरफ्तारी के बाद, उसके ठिकाने से आपत्तिजनक वस्तुओं की बड़ी बरामदगी की गई, जिसमें 07 मोबाइल हैंडसेट, 01 लैपटॉप, म्यूल खातों से जुड़े 07 चेकबुक, ₹60,000 नकद, लगभग 150 ग्राम सोना, विभिन्न व्यक्तियों की 55 पासपोर्ट आकार की तस्वीरें, 11 सिम कार्ड, 63 आधार कार्ड, 60 पैन कार्ड और 07 डेबिट कार्ड शामिल थे।उनका कहना है कि पूछताछ के दौरान, आरोपी मयंक कपूर ने खुलासा किया कि उसने दैनिक वेतनभोगी मजदूरों के नाम पर म्यूल सिम कार्डों की व्यवस्था की थी और ऋण स्वीकृति के बहाने मोबाइल फोन पर उनसे संपर्क करके उनके केवाईसी दस्तावेज और तस्वीरें प्राप्त की थीं। दस्तावेज और तस्वीरें बाद में व्हाट्सएप के माध्यम से प्राप्त की गईं। इस प्रकार, मयंक कपूर ने म्यूल बैंक खाते खोलने के लिए विभिन्न व्यक्तियों के म्यूल सिम कार्ड, केवाईसी दस्तावेज और तस्वीरों की व्यवस्था की।उनका कहना है कि आगे की जांच से यह पता चला कि धोखाधड़ी से प्राप्त केवाईसी दस्तावेजों और फोटोग्राफों का उपयोग करके बैंक खाते खोलने और उनका संचालन करने के लिए, मयंक कपूर का संपर्क शोभित अग्रवाल, शाखा प्रबंधक, सीएसबी बैंक, सरस्वती विहार, दिल्ली से हुआ। बैंक अधिकारियों की कथित सहायता से, खाता धारकों की वास्तविक उपस्थिति के बिना म्यूल खाते खोले गए, और उनके नाम पर जाली हस्ताक्षर किए गए। इन खातों को खोलने के बाद, आरोपियों ने उनका उपयोग साइबर अपराध से प्राप्त धनराशि प्राप्त करने के लिए किया। प्राप्त धनराशि का एक हिस्सा कथित रूप से बैंकर शोभित अग्रवाल को दिया गया, जबकि शेष राशि को ट्रस्ट वॉलेट का उपयोग करके क्रिप्टो करेंसी (यूएसडीटी) में परिवर्तित कर दिया गया।इसके अतिरिक्त, शोभित अग्रवाल ने मयंक कपूर का परिचय सीएसबी बैंक, त्रि नगर शाखा के शाखा प्रबंधक सुशांत कुमार से कराया। बैंक अधिकारियों की कथित सहायता से, सरस्वती विहार शाखा में लगभग 17 म्यूल खाते और त्रि नगर शाखा में लगभग 20 खाते खोले गए। ये खाते भारत भर में दर्ज 99 साइबर अपराध शिकायतों से जुड़े पाए गए, जिनमें कुल लगभग ₹7.36 करोड़ की राशि जमा की गई थी। आगे की जांच में यह सामने आया कि सीएसबी बैंक की दोनों शाखाओं के शाखा प्रबंधकों तथा बिक्री स्टाफ के सदस्यों, जिनमें बैंक खातों के प्रसंस्करण के लिए जिम्मेदार बिज़नेस डेवलपमेंट एग्ज़ीक्यूटिव्स (बीडीई) भी शामिल थे, की कथित संलिप्तता म्यूल खातों को खाता धारकों की वास्तविक उपस्थिति के बिना और जाली हस्ताक्षरों का उपयोग करके खोलने में थी। इन खातों को बिक्री टीम के सदस्यों मनोज, अंकुर, लेडी और पंकज द्वारा संसाधित किया गया और तत्पश्चात शाखा प्रबंधकों, सुशांत कुमार और शोभित अग्रवाल, द्वारा अनुमोदित किया गया।
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