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कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, 48 दिनों में 4 प्रदेशों से गुजरी भारत यात्रा, 41 दिनों में की 1270 किलोमीटर की यात्रा पूरी-वीडियो।

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद व महासचिव जयराम रमेश ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आज भारत जोड़ो यात्रा का 48वां दिन है। इन 48 दिनों में 7 दिन विश्राम के दिन थे। 41 दिन भारत जोड़ो यात्रा सड़क पर उतरी थी। इन 41 दिनों में करीब 1,270 किलोमीटर पूरा हो चुका है, यानि के कुल मिलाकर एक तिहाई अब तक पूरा हो चुका है। परसों 50वां दिन है, भारत जोड़ो यात्रा फिर से शुरु होगी, तेलंगाना के महबूबनगर जिले से। पिछले 48 दिनों में 4 राज्यों से गुजरी है, भारत जोड़ो यात्रा- तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश और परसों हम तेलंगाना आए, पर तेलंगाना में यात्रा पूरी तरीके से परसों शुरु होगी। इन 4 राज्यों में 18 जिलों से गुजरी है। तमिलनाडु में दो जिले, केरल में 7 जिले, कर्नाटक में 7 जिले और आंध्र प्रदेश में 2 जिले। तो कुल मिलाकर 18 जिले कवर हो चुके हैं और तेलंगाना में परसों से 11 दिनों में 8 जिले और कवर होंगे। तेलंगाना के बाद हम नांदेड़ आएंगे, महाराष्ट्र में और महाराष्ट्र में करीब 16 दिन भारत जोड़ो यात्रा पूरी होगी। उसके बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश, उसकी घोषणा हम करते रहेंगे। रोज औसत के तौर पर भारत जोड़ो यात्रा 21 किलोमीटर कवर कर रही है, पैदल। सुबह औसत के तौर पर कुछ दिन ऐसे हैं, ज्यादा हैं, मैं सिर्फ आंकड़े दे रहा हूँ, ये औसत के तौर पर आंकड़े हैं। सुबह करीब 12-13 किलोमीटर औसत चलते हैं और शाम को करीब 8-9 किलोमीटर चलते हैं। कुल मिलाकर इन 48 दिनों में करीब 50 संस्थाएं, राहुल गांधी जी से मिली हैं, दोपहर को। ये अलग-अलग संस्थाएं हैं, युवा संस्थाएं हैं, महिला संस्थाएं हैं, ट्रेड यूनियन की संस्थाएं हैं, सामाजिक कार्यकर्ताओं की संस्थाएं हैं, सिविल सोसाइटी संस्थाएं, नागरिक संस्थाएं हैं और करीब 50 ऐसी संस्थाएं राहुल जी से मिली हैं, और अलग-अलग मुद्दों पर बात हुई है, खासतौर से किसान से संबंधित मुद्दे, हर जगह यही मुद्दा उठाया गया है। किसान कितना पीड़ित है।

दूसरा मुद्दा जो हर जगह हमें देखने को मिल रहा है, बातचीत करने का मौका मिल रहा है और दस्तावेज पेश किए जा रहे है, वो बेरोजगारी के ऊपर और खासतौर से छोटे और लघु उद्योग, जो बंद पड़े हुए हैं, तमिलनाडु में, केरल में, कर्नाटक में, आंध्र प्रदेश में, उनके बारे में रिप्रिजेंटेशन दिए गए हैं, राहुल को।

तीसरा मुद्दा महंगाई का है और खासतौर से जीएसटी की वजह से, जो आवश्यक सामग्री है, जो रोजाना इस्तेमाल होता है, उनके जो दाम बढ़े हैं, जीएसटी की वजह से उनके संदर्भ में कई चिंताएं जताई गई हैं। तो 50 संस्थाएं, कुल मिलाकर राहुल जी से मिली हैं, इन 48 दिनों में।

करीब 50 ऐसी संस्थाएं हैं, जो राहुल के साथ चली हैं। उन्होंने कोई दस्तावेज नहीं पेश किया, पर चले हैं। जो मैंने पहली कैटेगरी कहा था, उसका जिक्र किया था, वो ऐसी संस्थाएं हैं, जो आधे घंटे- पौन घंटे के लिए रोज दोपहर को राहुल जी से मिली हैं, पर इसके अलावा ऐसी भी संस्थाएं हैं, जो उनके साथ चलती हैं, जो वॉक दा टॉक होता है और 50 ऐसी संस्थाएं हैं, पिछले 48 दिनों में जिन्होंने राहुल जी के साथ कुछ समय बिताया- 10 मिनट, कुछ लोग 15 मिनट, कुछ लोग 20 मिनट और जो उनके मन में था, उससे उन्होंने राहुल जी को अवगत कराया।

इन 48 दिनों में राहुल जी ने 4 प्रेस कांफ्रेंसेज संबोधित की हैं। एक तमिलनाडु में, एक केरल में, एक कर्नाटक में और एक आंध्र प्रदेश में और हर एक राज्य में एक प्रेस वार्ता होगी उनकी। 31 तारीख को हैदराबाद के बाद 5वां प्रेस इंट्रेक्शन होगा। 4 विशाल रैलियों को संबोधित किया है, राहुल ने, पिछले 48 दिनों में- कन्याकुमारी में, त्रिस्सूर में, बल्लारी में और रायचूर में। ये 4 विशाल सभाएं थीं, रैली थीं। पार्टी की ओर से आयोजित की गईं और इसके अलावा इन 48 दिनों में करीब 35 ऐसी नुक्कड़ सभाएं, पब्लिक मीटिंग, छोटी-छोटी पब्लिक मीटिंग , सात, साढ़े सात, आठ बजे को उस दिन की भारत जोड़ो यात्रा पूरी होती है, उन्होंने इन सभाओं को भी संबधित किया, पर विशाल रैली, जो पब्लिक रैली है, वो 4 हैं। शुरुआत 7 सितम्बर को हुई थी, कन्याकुमारी से, उसके बाद त्रिस्सूर में, केरल में और कर्नाटक में दो, एक बल्लारी में और चौथा वाला, मैं समझता हूँ, सबसे सफल रैली, सबसे विशाल रैली जो हुई है, वो रायचूर में हुई थी।

तो एक तिहाई भारत जोड़ो यात्रा पूरी हो चुकी है और जिस रफ्तार से हम जा रहे हैं, मैं उम्मीद करता हूँ कि फरवरी की 20 तारीख तक हम कश्मीर पहुंच जाएंगे। हो सकता है कि उसके पहले भी पहुंच पाए, पर जिस रफ्तार से हम जा रहे हैं, तो 20 और 25 के बीच में हम ये कह सकते हैं कि भारत जोड़ो यात्रा पूरी हुई होगी।

लोगों का उत्साह देखने लायक है। लाइव स्ट्रीम हो रहा है, आप लोग देख रहे हैं और कई लोग आ रहे हैं,सड़क पर, कांग्रेस समर्थक आ रहे हैं, कांग्रेस कार्यकर्ता आ रहे है, कांग्रेस आलोचक आ रहे हैं और जो किसी राजनीतिक दल में कोई समर्थन नहीं है, जो दिलचस्पी नहीं रखते हैं, वो भी आ रहे हैं। जो न्यूट्रल आदमी है,न्यूट्रल महिलाएं हैं और जो उम्मीदें थीं, हमारी, हम ये मानकर चल रहे थे, कि तमिलनाडु और केरल में बहुत सकारात्मक रेस्पॉन्स मिलेगा जनता से, पर कर्नाटक में जहाँ बीजेपी की सरकार है, उनके प्रयासों के बावजूद, लोगों का जो रेस्पॉन्स है, वो बहुत उत्साहजनक था। आंध्र प्रदेश में भी, आंध्र प्रदेश की सरकार की ओर से काफी कोशिश की गई, यात्रा में कई बाधाएं डाली गईं, पर उसके बावजदू अनंतपुर जिले में और कर्नूर जिले में लाखों लोग, महिलाएं, युवा औऱ समाज के हर वर्ग के लोगों ने भारत जोड़ो यात्रा का स्वागत किया। तो 48 दिनों के बाद 4 राज्यों के बाद, 18 जिलों के बाद, 4 पब्लिक रैलियों के बाद, 35 नुक्कड़ मीटिंगों के बाद, 4 प्रेस कांफ्रेंसेज के बाद, मैं ये विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि जिस मकसद के साथ भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत की गई थी, जो कल्पना की गई थी, उदयपुर में और जिस मकसद से उसके लिए प्लानिंग भी की गई और 7 तारीख को उसकी शुरुआत हुई, कन्याकुमारी से, वो पूरा हो रहा है। अभी और राज्य बाकी हैं। अभी हम मध्य भारत और उत्तर भारत में प्रवेश कर रहे हैं और हम उम्मीद करते हैं कि जिस तरीके से संगठन ने, कांग्रेस संगठन ब्लॉक स्तर पर, जिले के स्तर पर, राज्य के स्तर पर, जिस तरीके से संगठन ने एकजुट होकर जो भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हुए, वही हमें महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और जम्मू और कश्मीर में भी देखने को मिलेगा। तो मैं आपको निमंत्रण देता हूँ कि 31 तारीख को प्रेस कांफ्रेंस है हैदराबाद में। वैसे तो मैं धन्यवाद भी देना चाहता हूँ, कि कवरेज बहुत सही रहा है, बहुत सकारात्मक रहा है। कांग्रेस के नैरेटिव में बदलाव आया है और मैं आपका शुक्रगुजार हूँ कि आप लोगों ने इसको बहुत गंभीरता से लिया है और जो हमारा संदेशा है, आप लोगों तक पहुंचा रहे हैं। तो ये बहुत सकारात्मक कदम है और अगले 50 दिनों में कठिन राज्य हैं। हम अभी मध्य और उत्तर भारत में आ रहे हैं, पर मैं कहना चाहता हूँ कि आंध्र प्रदेश में जहाँ हमारा संगठन इतना मजबूत नहीं है, जहाँ हमारा वोट प्रतिशत दो प्रतिशत है, जितना कि केरल में है, या कर्नाटक में है, या तेलंगाना में है, वहाँ जिस तरीके से मोबिलाइजेशन हुआ और जिस तरीके से लोग आए सड़क पर, जैसा कि मैंने कहा, राज्य सरकारों के प्रयासों के बावजूद वो आए, वो हमें विश्वास दिलाता है कि जहाँ हमारा वोट शेयर नहीं है, जहाँ हमारा संगठन भी कमजोर है, भारत जोड़ो यात्रा की वजह से एक नई जान और एक नई उमंग आएगी और यहाँ भी भारत जोड़ो यात्रा बहुत सफल रहेगी। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में रमेश ने कहा कि तमिलनाडु में हम डीएमके के गठबंधन के महत्वपूर्ण अंग हैं। केरल में हम सीपीएम के साथ मुकाबले में हैं। कर्नाटक में हम जेडीएस और बीजेपी के साथ मुकाबले में हैं। आंध्र प्रदेश में हम दो क्षेत्रीय पार्टियों के खिलाफ लड़ रहे हैं-वाईएसआरसीपी और तेलुगु देशम, तेलंगाना में हम टीआरएस और बीजेपी के खिलाफ़ लड़ रहे हैं। हम उम्मीद करते है और मुझे विश्वास है कि जब हम महाराष्ट्र में प्रवेश करेंगे तो एमवीए की जो पार्टियाँ हैं, वो हमारा स्वागत करेंगी और वो भारत जोड़ो यात्रा में भाग लेंगी, पर उसकी डीटेल मैं आपको आज शाम तक बता दूँगा।महाराष्ट्र में एमवीए गठबंधन को लेकर पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री रमेश ने कहा कि एमवीए के जो हमारे घटक दल हैं, हमने पहले से कहा है किसी भी राजनीतिक दल का स्वागत है, जो भारत जोड़ो यात्रा के मकसदों का समर्थन करता है। एनसीपी के साथ हमारा गठबंधन है। शिवसेना के साथ हमारा गठबंधन था, हमारी मिलीजुली सरकार महाराष्ट्र में थी, तो वास्तविक है कि उद्धव ठाकरे जी और शरद पवार भी भारत जोड़ो यात्रा में भाग लेंगे, पर मैं उसकी एग्जेक्ट डीटेल आज नहीं बता पाऊँगा, मैं आपको एक-दो दिन में जानकारी पूरी दे दूँगा, पर जेडीएस के साथ हमारा कोई समझौता नहीं है, कर्नाटक में; टीआरएस के साथ कोई समझौता नहीं है तेलंगाना में और सीपीएम के साथ केरल में तो सवाल ही नहीं उठता।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में रमेश ने कहा कि हमने पहले दिन से कहा है कि जो कोई संस्था, जो कोई राजनीतिक दल भारत जोड़ो यात्रा के मकसदों में विश्वास रखता है, उनका स्वागत है, भारत जोड़ो यात्रा में। मैंने किसी दल का नाम नहीं लिया था, मैंने किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया था, मैंने किसी संस्था का नाम नहीं लिया था, पर आप देख रहे होंगे, मैं किसी का नाम नहीं लूँगा, आप देख रहे होंगे कि पिछले 48 दिनों में ऐसे भी व्यक्ति, ऐसी भी संस्थाएं शामिल हैं, भारत जोड़ो यात्रा में, जो 2012 में कांग्रेस का विरोध करतीं थीं। न केवल कांग्रेस समर्थक भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हुए हैं, कांग्रेस आलोचक, जो एक जमाने में कांग्रेस आलोचक थे, तो उनके विचारों में भी परिवर्तन आया है, पर महाराष्ट्र के संदर्भ में, जो आपने सवाल उठाया, मैं जानता हूँ कि एनसीपी भाग लेना चाहती है, मुझे पक्का जानकारी नहीं है कि क्या उद्धव ठाकरे जी आना चाहते हैं कि नहीं, पर वो अगर आना चाहेंगे, जरुर हम उनका स्वागत करेंगे।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में रमेश ने कहा कि मैं भारत जोड़ो यात्रा की बात कर रहा हूँ, आप प्रधानमंत्री की ओर क्यों ले जा रहे हो? हम अपना काम करेंगे, प्रधानमंत्री अपना काम करेंगे। हमारा काम है, मैंने पहले दिन से कहा है, आर्थिक विषमताएं बढ़ रही हैं, सामाजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है और राजनीतिक तानाशाही एक वास्तविकता है, हमारे देश में और ये तीन मुद्दे हैं, जिनके खिलाफ़ भारत जोड़ो यात्रा अपनी आवाज उठा रही है।

इंग्लैंड के प्रधानमंत्री को लेकर पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में रमेश ने कहा कि जिनको जनादेश मिलता है, वो मुख्यमंत्री बनेंगे। जनादेश मिले, लोकतांत्रिक तरीके से जनादेश मिले और मुख्यमंत्री बनें, हमें क्या आपत्ति है। इंग्लैंड की जनता ने उनको, अब इंग्लैंड की जनता नहीं, इंग्लैंड की पार्टी ने उनको प्रधानमंत्री बनाया है, इंग्लैंड का, तो हम स्वागत करते हैं, उनका। इसी से संबंधित एक अन्य प्रश्न के उत्तर में रमेश ने कहा कि ये नौबत आ गई है कि हिंदुस्तान, भारत को इंग्लैंड से अनेकताओं को कैसे सम्मान देना है, हमें उनसे सबक लेना पड़ता है। हजारों सालों से अगर दुनिया में एक मिसाल था, अनेकताओं का, अनेकताओं का जश्न मनाने का, अनेकताओं को सम्मान देने का, वो हिंदुस्तान था, पर पिछले 8 सालों में जो हमने देखा है, मैं नहीं समझता हूँ कि हमें किसी और देश से सबक सीखने की जरुत है, हमारा समाज ही अनेकता में एकता है। कई सालों से हम कहते आ रहे हैं कि अनेकताओं का हम सम्मान करते हैं, अनेकताओं को हम एक समान, बराबर जगह देते हैं। संविधान में दिया गया है, उनका अधिकार दिया गया है और हमें किसी और देश से सबक सीखने की जरुरत नहीं है। हमारी एकता अनेकताओं से ही मजबूत होगी। अगर हम अनेकताओं को दबाएंगे, अगर हम यूनिफॉर्मिटी लाएंगे, एकसमानता लाएंगे, हमारी अनेकता से एकता बनेगी, ऐसा नहीं हो पाएगा। यूनिटी इन डायवर्सिटी सौ साल से हम कह रहे हैं। एकता में अनेकता, मैं उससे एक कदम आगे बढ़ रहा हूँ। अनेकता से ही एकता है। तो हमें अनेकताओं का सम्मान करना चाहिए और भारत जोड़ो यात्रा का मकसद ही यही है। भाषा, धर्म, जाति, अलग-अलग तरह की अनेकताएं हैं, हमारे देश में और हमें देखने को मिल रहा है। मैं आपको एक मिसाल देता हूँ कि कर्नाटक में कुछ दिनों पहले हम ऐसे लोगों से मिले जो ऐसी भाषा बोलते हैं, जिसकी स्क्रिप्ट ही नहीं है। ये लिंग्विस्टिक माइनोरिटी है। हम लोग जब माइनोरिटी की बात करते हैं, हमेशा रिलिजियस माइनोरिटी हमारे मन में आता है, पर हमारे देश में कई जगह हैं, जहाँ लिंग्विस्टिक माइनोरिटी है। मुश्किल से आपको 10 हजार, 15 हजार, 20 हजार लोग ऐसी भाषा बोलते हैं। वो भी हमारे देश के नागरिक हैं, उनको भी संवैधानिक अधिकार दिया गया है और उनको भी हमें सुरक्षित रखने की जरुरत है। तुलू है, कुड़ुआ है, बेरी है, ऐसी भाषाएं है, जिनकी जानकारी है। हम लोग हिंदी बोलते हैं, अंग्रेजी बोलते हैं, कन्नड़ बोलते हैं, तमिल बोलते हैं, पर ऐसी छोटी-छोटी भाषाएं हैं, 10 हजार लोग, 15 हजार लोग, 20 हजार लोग बोलते हैं। तो उनको भी हमें सुरक्षित रखना है, वो भी भारतीय नागरिक हैं। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में रमेश ने कहा कि हमारे देश में ज़ाकिर हुसैन साहब पहले राष्ट्रपति बने, 1967 में। हमारे देश में फ़ख़रुद्दीन अली अहमद राष्ट्रपति बने, हमारे देश में अब्दुल कलाम राष्ट्रपति बने। हमारे देश में, मैं अगर आपको मिसाल देते जाऊँ, राजस्थान में बरकतुल्लाह ख़ान मुख्यमंत्री बने हैं, हमारे देश में एआर अन्तुले साहब मुख्यमंत्री बने हैं।
इसी से संबंधित एक अन्य प्रश्न के उत्तर में रमेश ने कहा कि उनसे पूछिए न। उनसे पूछिए, मैं भारत जोड़ो यात्रा की बात कर रहा हूँ मैं और किसी व्यक्ति के बारे मे जो कहा है, उसकी टिप्पणी नहीं करूँगा और मैंने देखा भी नहीं है, उन्होंने क्या कहा है। इसी से संबंधित एक अन्य प्रश्न के उत्तर में रमेश ने कहा कि तो उनसे पूछिए। मैं भारत जोड़ो यात्रा पर बोलूँगा और किसी और के वक्तव्य पर मैं नहीं बोलूँगा। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में रमेश ने कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है, भारत जोड़ो यात्रा लोकतंत्र की शहनाई बजा रही है। भाजपा एकतंत्र की तोप चला रही है। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में रमेश ने कहा कि 8 सालों का विशेष जिक्र किया, क्योंकि अटल बिहारी वाजपेयी के समय में अब्दुल कलाम राष्ट्रपति बने हैं। अब वाजपेयी जी की सोच और नरेन्द्र मोदी की सोच के बीच में जमीन-आसमान का फर्क है, क्योंकि अटल बिहारी वाजपेयी नेहरु के जमाने के प्रोडक्ट हैं। मैं आज भी मानता हूँ कि अटल बिहारी वाजपेयी जी नेहरू से बहुत प्रभावित हुए थे और वो वास्तविक है, पर नरेन्द्र मोदी जी एक ही चीज में लगे हुए हैं कि जवाहरलाल नेहरू की विरासत को हम कैसे मिटाएं। तीन मूर्ति को खत्म कैसे करें? अभी टैन डाउनिंग स्ट्रीट में भी अभी तीन मूर्ति हो जाएगा।

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