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कांग्रेस: महिला आरक्षण लागू होना चाहिए, लेकिन मोदी सरकार द्वारा जल्दबाजी में किए जा रहे परिसीमन का तरीका गलत और असंवैधानिक


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
नई दिल्ली:कांग्रेस ने कहा है कि देश में महिला आरक्षण लागू होना चाहिए, लेकिन मोदी सरकार जिस तरह जल्दबाजी में परिसीमन करना चाहती है, वह तरीका गलत और असंवैधानिक है। आज मुद्दा महिला आरक्षण नहीं, परिसीमन है। कांग्रेस कार्य समिति की बैठक के बाद पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी के संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश और मुकुल वासनिक ने 16 अप्रैल से बुलाए गए तीन दिवसीय संसद के विशेष सत्र को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट कहा कि महिला आरक्षण का सवाल आज विवाद का विषय नहीं है, क्योंकि इस पर पहले ही सर्वसम्मति बन चुकी है। असली मुद्दा परिसीमन की प्रक्रिया, उसका आधार और संभावित प्रभाव हैं, जिसे बिना व्यापक चर्चा और सहमति के लागू करना न तो उचित है और न ही संवैधानिक।

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक की जानकारी देते हुए जयराम रमेश ने कहा कि मोदी सरकार महिला आरक्षण लागू करना चाहती है, तो वह कर सकती है। कांग्रेस चाहती है कि 2023 में सर्वसम्मति से पारित हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम और संविधान में शामिल 334(ए) को सही ढंग से लागू किया जाए। साथ ही परिसीमन एक गंभीर और दूरगामी मुद्दा है, जिस पर गहन चर्चा की आवश्यकता है। कांग्रेस नहीं चाहती कि जल्दबाजी में परिसीमन से राज्यों को नुकसान हो। उन्होंने महत्वपूर्ण तथ्य को रेखांकित करते हुए बताया कि पिछले 70 वर्षों में चार बार परिसीमन हुए हैं, लेकिन पहले जनगणना होती है और उसके आधार पर परिसीमन होता है। जयराम रमेश ने याद दिलाया कि जनगणना आयुक्त के अनुसार जनगणना के नतीजे 2027 तक उपलब्ध हो सकते हैं, ऐसे में यह कहना गलत है कि इसमें चार-पांच साल लगेंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 21 सितंबर, 2023 को राज्यसभा में कहा था कि महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की शर्त के बिना तुरंत लागू किया जाए। इसके अलावा खरगे ने जल्द से जल्द जातिगत जनगणना करवाने की मांग भी की थी। महिला आरक्षण 2029 से लागू होगा, लेकिन कांग्रेस चाहती थी कि यह 2024 के लोकसभा चुनाव से ही लागू हो। लेकिन सरकार ने यह बात नहीं मानी। यह उस समय लागू नहीं किया गया, इसके लिए प्रधानमंत्री को देश की महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए।जयराम रमेश ने बताया कि कांग्रेस कार्य समिति की बैठक का मुख्य विषय संसद का विशेष सत्र था। साथ ही, बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर एक प्रस्ताव भी पारित किया गया है। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि महिला आरक्षण बिल पर 16 अप्रैल से शुरू हो रहा संसद का विशेष सत्र और सर्वदलीय बैठक इस माह होने वाले विधानसभा चुनावों के बाद बुलाई जाए। उन्होंने कहा, ‘आसमान नहीं गिर जाएगा, अगर यह सत्र और बैठक 29 अप्रैल के बाद बुलाए जाएं। उन्होंने यह जानकारी भी दी कि सत्र को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे विपक्ष की सभी पार्टियों के नेताओं के साथ एक बैठक करेंगे। इसके अलावा, 16 अप्रैल को सत्र शुरू होने के दिन फ्लोर लीडर्स की भी बैठक होगी। कांग्रेस महासचिव ने बताया कि सरकार ने अभी तक आधिकारिक तौर पर यह जानकारी नहीं दी है कि वह संविधान के किन अनुच्छेदों या अधिनियमों में बदलाव करना चाहती है।जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बीते माह संसदीय कार्य मंत्री को तीन पत्र लिखे। इनमें मांग की गई कि पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। इसमें संविधान संशोधन बिल पर चर्चा हो और आम सहमति बनाने का प्रयास किया जाए। साथ ही, पांच राज्यों में जारी चुनाव के बीच यह विशेष सत्र न बुलाया जाए, क्योंकि यह आचार संहिता का उल्लंघन होगा। लेकिन सरकार ने इन मांगों को नजरअंदाज कर 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र बुला लिया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों को प्रभावित करने के लिए विशेष सत्र बुला रही है।उन्होंने पश्चिम एशिया में युद्धविराम का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि मोदी सरकार की विफल विदेश नीति का परिणाम है कि आज पाकिस्तान को अहम भूमिका मिल गई है। मोदी सरकार अपनी विफल विदेश नीति और आर्थिक मुद्दों से भी ध्यान भटकने के लिए महिला आरक्षण को लेकर बात कर रही है। जयराम रमेश ने कहा कि सितंबर, 2023 को महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन किया गया, जिसमें सर्वसम्मति से अनुच्छेद 334(ए) पारित हुआ। यह कहता है कि लोकसभा और विधान सभाओं में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण मिलेगा। 334 (ए) में कहा गया है कि पहले जनगणना कराई जाएगी, उसके नतीजों में आधार पर परिसीमन और महिला आरक्षण लागू होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐसी क्या मजबूरी है कि अब वे चुनाव प्रचार के बीच ही इस कानून में संविधान संशोधन के लिए सत्र बुला रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बार-बार महिला आरक्षण की बात कर नरेटिव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ये सरकार की विफलताओं वाले असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास है। असल मुद्दा परिसीमन का है।कांग्रेस नेता ने कहा कि पहले जाति जनगणना की मांग करने वालों को ‘अर्बन नक्सल’ कहने वाले प्रधानमंत्री ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के दबाव में 30 अप्रैल 2025 को यू-टर्न ले लिया और अब 2026 में जाति जनगणना की बात कर रहे हैं।

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