
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़: हरियाणा पुलिस द्वारा कम्युनिटी पुलिसिंग को सशक्त बनाने के लिए चलाए जा रहे जनभागीदारी आधारित कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभरकर सामने आए हैं। इन पहलों के माध्यम से पुलिस और आमजन के बीच विश्वास को मजबूत करने के साथ-साथ युवाओं को कानून, सामाजिक जिम्मेदारियों और सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है।हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कहा कि कम्युनिटी पुलिसिंग आधुनिक पुलिस व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है और हरियाणा पुलिस इस दिशा में लगातार नए प्रयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि स्टूडेंट पुलिस कैडेट कॉर्प्स,साइबर राहगिरी , कम्युनिटी लाइजन ग्रुप, मित्र कक्ष और जनता दरबार जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से पुलिस सीधे समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़ रही है। इन पहलों से अपराध रोकथाम में सामुदायिक भागीदारी बढ़ी है और युवाओं में कानून के प्रति जागरूकता तथा सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित हुई है।
स्टूडेंट पुलिस कैडेट कॉर्प्स (SPCC) कार्यक्रम के तहत युवाओं को पुलिस कार्यप्रणाली, कानून व्यवस्था, सड़क सुरक्षा, साइबर अपराध, नशे के दुष्प्रभाव तथा सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। वर्ष 2025 में हरियाणा के 182 स्कूलों में 7362 विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लेकर अनुशासन, नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारी के मूल्यों को आत्मसात किया। यह कार्यक्रम युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए हर माह के प्रथम बुधवार को “साइबर राहगिरी” कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इस अभियान के माध्यम से हजारों नागरिकों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 के बारे में जानकारी दी जा रही है। जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच आयोजित कार्यक्रमों में लाखों की संख्या में नागरिकों ने भाग लेकर डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता प्राप्त की।

पुलिस और समाज के बीच संवाद को मजबूत करने के लिए कम्युनिटी लाइजन ग्रुप (सीएलजी) का गठन किया गया है। हरियाणा के सभी जिलों में 24 सीएलजी सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, जो स्थानीय स्तर पर छोटे-मोटे विवादों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वर्ष 2025 से जनवरी 2026 के दौरान सीएलजी के माध्यम से सैकड़ों शिकायतों का स्थानीय स्तर पर समाधान कराया गया, जिससे न्यायिक प्रक्रिया पर भार कम हुआ और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा मिला।आम नागरिकों को पुलिस सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से “मित्र कक्ष” की स्थापना की गई है। वर्तमान में रोहतक और करनाल में 19 मित्र कक्ष संचालित हैं, जहां 16 प्रकार की पुलिस सेवाएं सिंगल विंडो प्रणाली के तहत उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन मित्र कक्षों के माध्यम से शिकायत दर्ज करने, चरित्र सत्यापन, किरायेदार सत्यापन, पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट सहित विभिन्न सेवाओं के हजारों मामलों का त्वरित निपटारा किया गया है, जिससे आम नागरिकों को बड़ी सुविधा मिली है।पुलिस पब्लिक कोऑर्डिनेशन कमेटी (पीपीसीसी) के माध्यम से पुलिस और समाज के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है। नियमित बैठकों के जरिए स्थानीय समस्याओं की पहचान कर उनका समाधान किया जा रहा है। इसके साथ ही आयोजित किए जा रहे जनता दरबार कार्यक्रमों के माध्यम से नागरिकों की शिकायतों का त्वरित निवारण सुनिश्चित किया जा रहा है। वर्ष 2025 से जनवरी 2026 के दौरान हजारों शिकायतों का समाधान कर पुलिस ने आमजन का विश्वास और अधिक मजबूत किया है।स्कूलों और विश्वविद्यालयों में पुलिस अधिकारियों द्वारा जागरूकता कार्यक्रम, वाद-विवाद प्रतियोगिताएं और संवाद सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को कानून, संविधान और पुलिस व्यवस्था के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसके अलावा बीट स्तर पर पुलिसिंग को सुदृढ़ करते हुए स्थानीय समुदाय के नेताओं, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों को भी पुलिस कार्यों में सहभागी बनाया जा रहा है, जिससे अपराध रोकथाम में सामुदायिक सहयोग को नई मजबूती मिल रही है। हरियाणा पुलिस की ये पहल न केवल राज्य में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ कर रही हैं, बल्कि जनसहभागिता आधारित पुलिसिंग के एक प्रभावी राष्ट्रीय मॉडल के रूप में भी उभर रही हैं।
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