Athrav – Online News Portal
नोएडा स्वास्थ्य

डॉक्टरों की संवेदनहीनता और लचर चिकित्सा व्यवस्था के कारण अस्पताल के बाहर ही “जागृति” ने कार में ही दम तोड़ दिया-देखें वीडियो

अरविन्द उत्तम की रिपोर्ट 
कोरोना काल के इस दौर में डॉक्टरों की संवेदनहीनता और लचर चिकित्सा व्यवस्था के चलते एक महिला अपनी कार में तड़पती रही, लेकिन उसे कोई डॉक्टर उसे देखने नहीं आया और ना ही उसे अस्पताल में एडमिट किया गया। जब महिला ने तड़प तड़प कर कार में ही दम तोड़ दिया , तब डॉक्टर आए और उसे मृत घोषित कर चले गए।  डॉक्टरों ने उस महिला के शव को मोर्चरी तक भिजवाने का व्यवस्था भी नहीं की और वह महिला साढे 3 घंटे तक मृत व्यवस्था में कार में ही पड़ी रही। ये घटना ग्रेटर नोएडा राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) की है।

ग्रेटर नोएडा के जिम्स अस्पताल के पार्किंग में खड़ी इस गाड़ी में रुकती सांसो को थामने का प्रयास कर रही है। इस महिला का नाम जागृति गुप्ता है जो ग्रेटर नोएडा के बीटा-2 में रहती हैं और वैष्णवी इंजीनियरिंग में काम करती है जागृति कुछ दिनों से बीमार चल रही थी। आज सुबह जब उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी और का ऑक्सीजन लेवल कम हो गया।  तो उस के साथी और किराएदार ने उसे अस्पताल में भर्ती कराने के प्रयास किया, वे उसे लेकर नोएडा के सभी अस्पतालों में घूमे लेकिन किसी ने भी भर्ती करना तो दूर उसका इलाज तक नहीं किया। अंत में वह 12:30 बजे करीब जिम्स अस्पताल पहुंचे। जागृति की साथी बार-बार डॉक्टर से रिक्वेस्ट की एक बार चल के उसके मरीज को देख ले क्योंकि उसकी हालत तेजी से बिगड़ रही है लेकिन डॉक्टर राजी नहीं हुए और उसे कहीं ले जाने को कह दिया। इस सारी कवायद में 3 घंटे बीत गए और इस बीच अपनी खुद की सांसो को जागृति संभाल नहीं पाई और उसकी साँसे थम गई। जागृति की साथी ने डॉक्टरों से जाकर कहा की उसकी हालत बेहद क्रिटिकल और सांस भी थम सी गई है तब डॉक्टर बाहर आए जागृति का जांच करने के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

इस घटना के चश्मदीद रहे सचिन कहते हैं कि वह वहां पर अपने एक मरीज को भर्ती कराने के लिए गए थे और जागृति की बिगड़ती हालत देखते हुए वह भी बार-बार डॉक्टर से रिक्वेस्ट कर रहे थे कि उसकी  देखभाल किया जाए। लेकिन कोई डॉक्टर नहीं आया डॉक्टरों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि बेड नहीं है। जब सचिन ने उनके साथ बहस की कि आपके वहां पर कितने लोग डिस्चार्ज हुए तो डॉक्टर ने बताया कि 13 लोग डिस्चार्ज हुए हैं लेकिन उनकी जगह भर गई है।  इस बात डॉक्टर इतने नाराज हो गए उन्हें सचिन के मरीज को  एडमिट करने से इंकार कर दिया और  उन्हे दूसरे अस्पताल ले जाना पड़ा।

Related posts

कपड़े में लिपटा मिला नवजात शिशु, पुलिस ने जिला अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया-देखें वीडियो

Ajit Sinha

फरीदाबाद जिले में अब तक 1088 यात्रियों को सर्विलांस पर लिया जा चुका है, 6 केस पॉजिटिव, एक को ठीक होने पर किया डिस्टार्ज: डा. रामभगत

Ajit Sinha

लड़की के साथ छेड़खानी करना लड़के को पड़ा महंगा,लड़की ने सरे बाजार लड़के की धुनाई सोशल मीडिया पर हुआ वायरल

Ajit Sinha
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments
//thuthoock.net/4/2220576
error: Content is protected !!
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x