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दिल्ली नई दिल्ली राजनीतिक राष्ट्रीय वीडियो

अजय माकन ने आयोजित प्रेस कांफ्रेस में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पर जमकर हमला बोला-लाइव वीडियो सुने।


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली: पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन ने पत्रकारों को संबोंधित करते हुए कहा कि दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री, जो कि अपने आपको आम आदमी कहते हैं और खुद को आम आदमी दिखाने के लिए अपने साईज से दो नाप फालतू के चप्‍पल, फ्लोटर, जूते, पैंट और कमीज पहनते हैं और आम आदमी दिखने के लिए जेब में रिनॉल्‍ड का पेन, एक रुपया वाला लगाकर के घूमते हैं, आम आदमी दिखने के लिए सर्दियों के अन्‍दर फ्लोटर चप्‍पल जुराब के साथ पहनते हैं। दु:ख की बात ये है कि एक ऐसा व्‍यक्ति जिसने एफिडेविट दिया कि वो आम आदमी की तरह सारी जिंदगी रहेगा, आम आदमी की तरह दिल्‍ली का मुख्‍यमंत्री रहेगा, उसके द्वारा भ्रष्‍टाचार के, उसकी सरकार के अंदर भ्रष्‍टाचार के और जिस स्‍टाइल ऑफ लिविंग को उन्‍होंने अपनाया है, अपने मकान को बनाकर के, उन्‍होंने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।

दिल्‍ली में सिम्‍पलिसिटी की, सादगी की अगर कोई मिसाल हम कहेंगे तो उनका नाम श्रीमती शीला दीक्षित है। कोई भी व्‍यक्ति श्रीमती शीला दीक्षित से अगर उनके घर पर, निवास स्‍थान पर जाकर अगर मिलता था तो उसको सबसे पहले सादगी का एहसास होता था और अरविंद केजरीवाल जी ने अपने महल को बनाने में, सजाने में जितना पैसा खर्च कर दिया, श्रीमती शीला दीक्षित जी की पूरी कैबिनेट ने 15 साल के अंदर मिलाकर के उतना पैसा खर्च नहीं किया होगा, उसका आधा भी नहीं किया होगा, उसका दसवां हिस्‍सा भी नहीं किया होगा, जितना केजरीवाल जी ने 2 साल में खर्च अपने महल पर कर दिया। आज मैं नए खुलासे के साथ में आप सब लोगों के माध्‍यम से दिल्‍ली की जनता को कुछ बताना चाहता हूं। ये मात्र 45 करोड़ का खर्चा नहीं है,केजरीवाल के महल पर मात्र 45 करोड़ नहीं खर्च हुए हैं, केजरीवाल जी के महल पर 171 करोड़ रुपया खर्च हुआ है, 171 करोड़ रुपया, पब्लिक का पैसा, कोविड के समय में, ऐसे समय में जब दिल्‍ली के अंदर लोग ऑक्‍सीजन को तरस रहे थे, हॉस्पिटल को तरस रहे थे, हॉस्पिटल बेड्स को तरस रहे थे, गरीब आदमी खाने को तरस रहे थे, 171 करोड़ रुपया का खर्चा केजरीवाल जी के महल पर हुआ है, 45 करोड़ नहीं और अब आपको बताता हूं ये 171 करोड़ रुपया कैसे?केजरीवाल जी का जो मकान है 06, फ्लैग स्‍टाफ रोड, इसके बाजू में 4 और मकान पड़ते हैं, 45 राजपुर रोड, 47 राजपुर रोड, 8ए फ्लैग स्‍टाफ रोड, 8बी फ्लैग स्‍टाफ रोड, इन सभी जगहों के ऊपर मिलाकर 22 ऑफिसर्स के फ्लैट्स हैं और 22 ऑफिसर्स फ्लैट्स में से 15 खाली करा दिया गए हैं या तुड़वा दिए गए हैं और 7 के बारे में ये इन्‍सट्रक्‍शन दिए गए हैं कि अब ये दोबारा अलॉट नहीं होंगे, ये बहुत जल्‍द खाली होने वाले हैं और अब जब ये 22 ऑफिसर्स फ्लैट्स की कमी हो रही है, उस कमी की भरपाई करने के लिए केजरीवाल साहब की सरकार ने कॉमनवेल्‍थ गेम्स विलेज में 21 फ्लैट्स, टाईप 5 के खरीदे हैं, जिसकी हर एक की कीमत लगभग 6 करोड़ रुपया पड़ रही है।तो जो 21 टाईप 5 फ्लैट्स खरीदे जा रहे हैं ताकि ये 22 ऑफिसर्स के फ्लैट्स जब कम हो जाएंगे तो वो भी तो केजरीवाल जी के महल के अंदर उसकी कीमत भी डालनी पड़ेगी, क्‍योंकि अगर केजरीवाल जी के मकान को फैलाया जा रहा है, बड़ा किया जा रहा है और ऑफिसर्स के फ्लैट्स गिराए जा रहे हैं, खाली कराए जा रहे हैं और उसकी भरपाई दिल्‍ली की जनता की जेब से जा रही है तो इसका जवाब भी केजरीवाल जी को देना पड़ेगा और 126 करोड़ रुपया इसमें और 45 करोड़ रुपया केजरीवाल जी के खुद के महल को बनाने में कुल 171 करोड़ रुपया इसके अंदर खर्च हुआ है और अब मैं आप लोगों को इसके साथ में ये बताना चाहूंगा कि कैसे ये दिल्‍ली के हैरिटेज के ऊपर, दिल्‍ली की ग्रीनरी के ऊपर, दिल्‍ली के मास्‍टर प्‍लान के ऊपर, इन सबके ऊपर, साथ-साथ में बजट के अंदर भी लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए प्रिविलेज का मामला बनता है। अगर भाजपा के जो विधायक हैं, उनमें जरा सी भी समझ होती तो ये तो ब्रीच ऑफ प्रिविलेज का सीधे-सीधे मामला है कि हाऊस से बजट पास करा लिया गया और डिमांड फॉर ग्रान्‍टस के अंदर कहीं पर भी मेन्‍शन नहीं है कि मुख्‍यमंत्री का आवास बन रहा है तो ये तो सीधे-सीधे ब्रीच ऑफ प्रिव‍िलेज का मामला है, मास्‍टर प्‍लान की अवहेलना है, हैरिटेज की अवहेलना है और क्‍यों हैरिटेज की अवहेलना है? क्‍यों मास्‍टर प्‍लान की अवहेलना है?आज उपराज्‍यपाल जी को एक लेटर मैं लिख रहा हूं इस प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के बाद में और उसके अंदर मैं ये मास्‍टर प्‍लान के रेलेवेंट पोर्शन्‍स को दे रहा हूं। मास्‍टर प्‍लान के अंदर ये कहा गया है “Higher FAR will, however, not be permissible in redevelopment of Lutyens Bungalow Zone, Civil Lines Bungalows Area and monument regulated zone.”सिविल लाइन्‍स बंग्लो एरियाज है, जिसके बारे में मास्‍टर प्‍लान 3.3.2 के मास्‍टर प्‍लान में ये लिखा हुआ है कि हायर एफएआर नहीं दिया जाएगा और जो लोग भी यहां पर केजरीवाल जी के मकान में पहले गए होंगे, उनको याद होगा कि चौधरी प्रेम सिंह जी जब यहां पर रहते थे एज स्‍पीकर जब गए या अमरीश गौतम जब डिप्‍टी स्‍पीकर रहते थे जब वहां पर गए, मुझे अच्‍छे से याद है जब मैं वहां पर जाता था ये सिंगल स्‍टोरी, ओल्‍ड कोलोनियल आर्किटेक्‍चर है, जैसे लुटियंस बंग्‍लो जोन है, ये उससे भी पुराना है, सिंगल स्‍टोरी है, यहां पर कोई डबल स्‍टोरी नहीं है और अब जो है इसको तोड़कर के वहां पर बेसमेंट, ग्राउण्‍ड, फर्स्‍ट, सेकेण्‍ड यानि अगर बेसमेंट हटा दें तो 3 मंजिला वहां पर बनाया गया है और 20,000 स्‍क्वायर फीट इसके अंदर जो है टोटल कंसट्रक्‍टेड एरिया है, जो कि डबल कर दिया गया है, जितना पहले था उससे।तो आप बताएं, मैं आपसे पूछता हूं, आपके माध्‍यम से दिल्‍ली की जनता से पूछता हूं कि ये हैरिटेज लॉ की वाइलेशन है या नहीं है, हमारी दिल्‍ली जिसकी एक हैरिटेज वैल्‍यू है और एक 4.2.1 मास्‍टर प्‍लान में लिखा है- “The essential character of wide avenues, large plots, extensive landscape and low-rise development; it has a heritage value that has to be conserved. Mixed use, high intensity development along MRTS corridor and de-densification of trees/reduction of green cover is not permitted at all”. ये लिखा हुआ है हमारे मास्‍टर प्‍लान के अंदर और यहां पर इन्‍होंने ग्राउंड फ्लोर का, अब जैसे ये हमारा एआईसीसी है तो क्‍या यहां पर हम एआईसीसी में ग्राउंड फ्लोर, ऊपर से इसके फर्स्‍ट फ्लोर, उसके ऊपर एक सेकण्‍ड फ्लोर और नीचे बेसमेंट क्‍या हम बना सकते हैं, ये सब ओल्‍ड बंग्‍लो जोन एरियाज हैं।तो ये पूरा का पूरा हैरिटेज स्‍ट्रक्‍चर को डेमोलिश वहां पर कर दिया गया है और ये दिल्‍ली की जनता के साथ और हैरिटेज वैल्‍यू के साथ में एक बहुत बड़ा अन्‍याय है। इसमें जैसे मास्‍टर प्‍लान में लिखा है कि Reduction of green cover is not allowed, de-densification of trees is not allowed. ये दो चीजें इसमें लिखी हुई हैं और 28 पेड़ वहां पर काट दिए गए हैं, फुल ग्रोन 28 पेड़ बर्गद के, आम के 28 पेड़ वहां पर काट दिए गए हैं, ये ऑन रिकॉर्ड। तो अब जो है दिल्‍ली की जनता सिर्फ ये नहीं पूछती कि आपने 171 करोड़ अपने खुद के शीश महल के ऊपर, अपने खुद के महल के ऊपर क्‍यों खर्च कर लिया है? बल्‍कि सवाल ये भी उठता है कि आपने दिल्‍ली के हैरिटेज की धज्जियां कैसे उड़ा दी? आपने ग्रीन एनवायरमेंट की धज्जियां वहां पर 28 फुल ग्रोन पेड़ को काटकर के आपने कैसे वहां पर से उसको उड़ा दिया?तो ये दु:ख की बात है कि आज ऐसी स्थिति के अंदर यहां पर हो रहा है और जैसे मैंने कहा कि ये पूरा सरकम्बेंट किया जा रहा है, जो हमारे बजट के प्रोवीजन्‍स हैं, डीटेल्ड डिमांड फॉर ग्रान्‍ट, जो बजट के अंदर दिया जाता है, उसके अंदर कहीं पर भी ये मेन्‍शन नहीं था कि ये मुख्‍यमंत्री जी का आवास बनाया जा रहा है, आप पार्लियामेंट के अंदर अगर देखें, प्राईम मिनिस्‍टर का बंग्‍ला उसमें लिखा होता है। दूसरी स्‍टेट्स में जाएं, जहां पर मुख्‍यमंत्री अपना बना रहे, वहां लिखा होता है, यहां पर कहीं पर भी इस हेड के अंदर नहीं डाला गया कि 171 करोड़ रुपया यहां पर हम लोगों ने या 45 करोड़ रुपया हम लोगों ने इस हेड के अंदर खर्च कर रहे हैं कहीं पर भी नहीं… तो इससे ज्‍यादा हाऊस की अवहेलना क्‍या हो सकती है? आज हम लोग आपके माध्‍यम से ये जानना चाहते हैं।मैं पिछले दिनों एक टी.वी. डिबेट में था, राघव चड्ढा जी मेरे सामने थे, वहां पर तो ज्‍यादा समय नहीं मिला, वो मुझे दिखा रहे थे कि उनके पास में प्रूफ है कॉर्पोरेशन का। तो मुझे पता तो था कि क्‍या प्रूफ है उनके पास कोर्पोरेशन का, परमिशन का, लेकिन समय वहां पर नहीं था, मैं नहीं बता पाया, आज मैं आपके माध्‍यम से दिल्‍ली की जनता को बताना चाहता हूं कैसे इन्‍होंने, पीडब्‍लूडी ने, कॉर्पोरेशन के ऑर्डर्स का इस्‍तेमाल करके अपना फायदा इन्‍होंने किया है और मुख्‍यमंत्री जी ने अपना उल्‍लू सीधा किया।कॉर्पोरेशन के नॉर्थ दिल्‍ली मुनिसिपल कोर्पोरेशन के 2017 के ऑर्डर्स हैं जिसमें वो पीडब्‍लूडी को एक्‍जेम्‍पट कर देते हैं From seeking sanction of building plan from the local bodies. यानि हम भी अगर कोई अपना मकान बनाने जाएं, तो हमको लोकल बॉडीज से अपने बिल्डिंग प्‍लान को सेंक्‍शन कराना पड़ता है, लेकिन इस ऑर्डर से एनडीएमसी ने, नॉर्थ दिल्‍ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने, पीडब्‍लूडी को एक्‍जेम्‍पट कर दिया है from seeking sanction of building plan from the local bodies, लेकिन इसके अंदर सबसे महत्‍वपूर्ण बात ये है कि हर किसी के लिए सैंक्‍शन करने के लिए एक्‍जेम्‍पशन नहीं है, इन्‍होंने लिखा है कि The Corporation has resolved to allow the PWD project to be used for public purposes, exempt from seeking sanction of building plans.यानि जो पब्लिक परपज़ के लिए जो बिल्डिंग्स बनाई जा रही है, उसको एक्‍जेम्‍पशन से छूट मिल रही है और पब्लिक परपज़ के लिए एक्‍जेम्‍पशन देने का मतलब जो स्‍कूल्‍स की बिल्डिंग हैं, हॉस्पिटल्स की बिल्डिंग हैं उसके अंदर समय बर्बाद न हो कि आपको एक्‍जेम्‍पशन के लिए पहले आप वहां पर कोर्पोरेशन कें अंदर 3-3, 4-4 महीने, साल, 2 साल लग जाएं और उसके बाद में पब्लिक परपज़ का प्रोजेक्‍ट डिले नहीं होना चाहिए। पब्लिक परपज के प्रोजेक्‍ट डिले न हो जाएं, इसके लिए एक्‍जेम्‍पशन दिया हुआ है और इसका फायदा उठाकर के बिल्‍डिंग बायलॉज की सारी वायलेशन करके पीडब्‍लूडी ने वहां पर कोर्पोरेशन को पब्लिक परपज के नाम से बिल्‍डिंग अलाऊ करने का फायदा लेकर उठाकर के, इन्‍होंने मुख्‍यमंत्री जी का महल एक्‍जेम्‍पशन लेकर इन्‍होंने बनाया।तो हर तरीके से बायलॉज को फ्लाउट किया गया है, हैरिटेज को डेमोलिश द‍िल्‍ली के किया गया है, 28 पेड़ों को मारा गया है और ये बात तो बहुत चल चुकी है कि कैसे वीयतनाम के मार्बल्‍स, कैसे ऑटोमेटिक खुलने वाले दरवाजे, कैसे बड़े-बड़े शीशे, माइक्रोबेव ऑवन और किचिन अप्‍लायंसेज 1.5 करोड़ रुपए के, आप हैरान हो जाएं कोई भी चूल्‍हा गैस का, 1,000-1,500 रुपए का गैस का चूल्‍हा और ये यहां पर 1.5 करोड़ रुपए के गैस के चूल्‍हे एक आम आदमी, जो एफिडेव‍िट देकर कहता था कि मैं आम आदमी हूं उसके घर का चूल्‍हा 1.5 करोड़ का है, उसके पर्दे ऐसे आलीशान कि 6-6 लाख के पर्दे, ऐसे मार्बल के फ्लोर वियतनाम के डिओर पर्ल के कि कोई सोच भी न सके और उसकी पॉलिशिंग 6-6 करोड़ के इनके मार्बल लग जाते हैं तो ये अपने आपको आम आदमी कहते हैं।आज दिल्‍ली की जनता को समझ जाना चाहिए कि किस तरीके से इन लोगों ने दिल्‍ली की जनता को गुमराह करके, सबसे अधिक सादगी की मिसाल रखने वाली, दिल्‍ली का विकास करने वाली श्रीमती शीला दीक्षित जी के‍ खिलाफ उल्‍टा-सीधा बोलकर, उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाकर दिल्‍ली के अंदर अपनी सत्‍ता को स्‍थापित किया और खुद महलों के अंदर रह रहे हैं। सिक्‍योरिटी की बात तो दूर अपनी लंबी-लंबी बड़ी-बड़ी गा‍ड़ि‍यां, किस तरीके से पंजाब पुलिस की गा‍ड़ि‍यां, पंजाब पुलिस की सिक्‍योरिटी, सेंट्रल गवर्नमेंट की सिक्‍योरिटी, दिल्‍ली पुलिस की सिक्‍योरिटी, सभी इनको चाहिए, कहीं से भी देखने के अंदर, काम करने में ये आम आदमी नहीं लगते हैं, ये हम आप लोगों के माध्‍यम से दिल्‍ली की जनता को एक विशेष प्रेस वार्ता के माध्‍यम से बताना चाहते हैं।

धन्‍यवाद!

टीवी चैनल के रिपोर्टर को दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के लिए बनाए गए ‘शीश महल’ की रिपोर्टिंग के संदर्भ में प्रताड़ित करने को लेकर पूछे एक प्रश्न के उत्तर में अजय माकन ने कहा कि बिल्कुल, सबसे पहले तो ये, मैंने शुरु से ही, बल्कि टाइम्स नाऊ में डिबेट में ही वहाँ पर नाविका जी को टाइम्स नाऊ और नवभारत को बधाई दी थी कि सबसे पहले आप लोगों ने ‘शीश महल’ का पर्दाफाश किया था और शायद उसकी सजा भी आपके रिपोर्टर्स को भुगतनी पड़ रही है और हम इसकी तीव्र निंदा करते हैं। किसी भी रिपोर्टर के साथ में, उसको अच्छी खबर दिखाने के लिए प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए और लोकतंत्र के लिए ये खराब समय होता है जब किसी भी रिपोर्टर को कोई भी सरकार तंग करे। हम हमेशा से इस चीज के खिलाफ हैं और कांग्रेस पार्टी इस बात में विश्वास रखती है कि रिपोर्टर को पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए और रिपोर्टर को पूरा हक होना चाहिए, आपकी ड्यूटी है, हमसे मुश्किल सवाल पूछने की, ये आपका कर्तव्य है और अगर आप हमसे कठिन सवाल नहीं पूछ रहे और अगर आप करप्शन को उजागर नहीं कर रहे है, तो इसका मतलब आप सही काम नहीं कर रहे हैं और आप लोगों को हमें प्रोत्साहित करना चाहिए। कांग्रेस पार्टी हमेशा इस चीज को प्रोत्साहित करती है।हम भी रुलिंग पार्टी में थे, उस वक्त भी टाइम्स नाऊ ने लगातार हम लोगों के खिलाफ बहुत सारे एक्सपोजे किए। बहुत सारी बातें की, कुछ ठीक थी, कुछ नहीं थी, कुछ प्रूफ नहीं हो पाई अभी तक, लेकिन हम लोगों ने कभी भी रिपोर्टर को या चैनल को प्रताड़ित करने का काम नहीं किया और इसलिए किसी भी रिपोर्टर को इस तरह से प्रताड़ित किया जाए, हम उसके खिलाफ हैं।आम आदमी पार्टी के साथ अलायंस के संदर्भ में पूछे एक अन्य प्रश्न पर श्री माकन ने कहा कि देखिए, ये सब चीजें, केजरीवाल जी का लिकर स्कैम है। इस स्कैम को लेकर कार्रवाई की मांग करने में कांग्रेस पार्टी बीजेपी से भी आगे थी।सबसे पहले हमारी डीपीसीसी ने दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने केजरीवाल के लिकर स्कैम की शिकायत की और सबसे पहले प्रदर्शन किया था। सीबीआई के पास सबसे पहले दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के लोग गए थे, अनिल चौधरी गए थे, हमारी डीपीसीसी गई थी और लगातार यहाँ से भी, इसी पोडियम से भी और हर जगह के ऊपर हम अग्रेसिवली केजरीवाल जी के खिलाफ काम करते रहे हैं और उनकी सरकार हमें मालूम है कि वो भ्रष्ट है, हमें मालूम है कि वो भ्रष्टाचार में लिप्त है।अभी जिस तरीके से अपने आपको आम आदमी कहते हैं वो और आम आदमी की पार्टी कहते हुए करोड़ों रुपए, 171 करोड़ रुपए जो आदमी अपने महल बनाने में खर्च कर दे, वो आम आदमी किस बात का? क्यों वो लोगों को बेवकूफ बनाते हैं, अपने से एक- दो साइज लंबा पेंट और शर्ट पहनकर और रेनोल्ड की पेन जेब में लटकाकर क्यों लोगों को बेवकूफ बनाते हैं? आप सब बातें लोगों के सामने बोलें, तो ये आदमी का कैरेक्टर बनाता है।जो केजरीवाल लोकपाल के नाम पर आया, अब चुप क्यों है? सेंट्रल गवर्नमेंट ने भी लोकपाल 2019 के 15 मार्च को उन्होंने लागू किया, वो भी सुप्रीम कोर्ट के आने के बाद, अभी भी उनके पास प्रोसीक्यूशन विंग नहीं है, सेंट्रल गवर्नमेंट के पास, तो अब केजरीवाल क्यों नहीं धरने पर बैठते, अब केजरीवाल जी क्यों नहीं शोर मचाते?सेंट्रल गवर्नमेंट ने लोकपाल एक्ट को डायल्यूट कर दिया, क्यों केजरीवाल जी धरने पर नहीं बैठते? सेंट्रल इनफार्मेशन कमीशन के सामने आरटीआई के 28,442 केस लंबित पड़े हैं, क्यों केजरीवाल जी नहीं बोलते? मैग्सेसे अवार्ड आरटीआई के नाम पर ले लिया, क्यों नहीं बोलते? तो व्यक्ति का कैरेक्टर ये है कि जो दिखाकर, बताकर सत्ता के अंदर आए और उसको एकदम से पूरा भूल गए, तो उस व्यक्ति को दिल्ली की जनता, हर पॉलिटिकल पार्टी को समझना चाहिए कि उसका असली कैरेक्टर क्या है।
2014 के अंदर, 2015 के अंदर, 2014 में कांग्रेस पार्टी ने समर्थन किया, इनको सरकार बनाने का, इन्होंने वापस किया, दिल्ली की जनता को दिया कुछ नहीं। कांग्रेस के खिलाफ ही बोल दिया, वो लोकपाल को लेकर 40 दिन के बाद में डिजॉल्व कर दिया, वो कहाँ है लोकपाल, किसी को मालूम ही नहीं और अभी भी ये भ्रष्टाचार के पैसे केजरीवाल जी ने गोवा के अंदर कांग्रेस के खिलाफ इस्तेमाल किया है। 100 करोड़ रुपए का मनी ट्रेल कांग्रेस के खिलाफ गोवा के चुनाव में इस्तेमाल हुआ। गुजरात के अंदर ट्राईबल एरिया के अंदर जानबूझकर ट्राईबल कैंडिडेट खड़े किए ताकि कांग्रेस वहाँ से हारे।
बीजेपी को मदद की , क्योंकि गुजरात के अंदर बीजेपी को मात्र 3 प्रतिशत वोट फालतू मिले, लेकिन 33 प्रतिशत सीट बीजेपी को फालतू मिल गए, 3 प्रतिशत एक्स्ट्रा वोट लेकर क्योंकि ये 13, 14 प्रतिशत वोट ये केजरीवाल महोदय खा गए। जबसे केजरीवाल जी दिल्ली में आए हैं, तबसे बीजेपी दिल्ली में स्ट्रॉंन्ग हुई है। ये कहते हैं कि ये बीजेपी के खिलाफ लड़ते हैं, ये बीजेपी के खिलाफ नहीं लड़ते हैं, बीजेपी की मदद करते हैं। 2014 से पहले कभी भी हमने शीला जी के नेतृत्व में बीजेपी को लोकसभा एक भी नहीं जीतने दी थी और केजरीवाल जी के आने के बाद में बीजेपी लोकसभा लगातार जीत रही है। पंजाब में क्या बीजेपी थी, पंजाब में बीजेपी नहीं थी। पंजाब में सिर्फ कांग्रेस या अकाली दल था। तो जहाँ-जहाँ पर ये कांग्रेस को कमजोर कर रहे हैं, वहाँ-वहाँ पर केजरीवाल जी बीजेपी को मजबूत कर रहे हैं। ये हमें समझ लेना चाहिए।एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री माकन ने कहा कि देखिए, मैं आपको बताता हूं, एजेंसी का इतना भारी दुरुपयोग सेंट्रल गवर्मेंट कर रही है कि जब वो सही जगह के ऊपर भी हाथ डालते हैं, तो ऐसा कुछ लोगों को लगता है कि ये गलत कर रहे हैं। अगर केंद्र सरकार एजेंसी का इतना ज्यादा इस्तेमाल ना करे कि सही और गलत के बीच में डिफरेंस करना भी असंभव हो जाए, तो वो इस समय भी हो रहा है, क्योंकि इतनी ज्यादा जगह पर उन्होंने एजेंसी का दुरुपयोग किया कि ऐसे समय में भी इनको ये कहने का मौका मिल रहा है कि देखिए, हमारे साथ दुरुपयोग हो रहा है। जबकि इसके अंदर लिकर स्कैम में पूरी दिल्ली जानती है कि किस प्रकार से घोटाला हुआ है। ये ऐसा नहीं है कि किसी से कुछ छुपा हुआ है, ये तो पब्लिक के सामने की बात है।

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