अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली: कला संस्कृति एवं भाषा मंत्रालय, हिंदी अकादमी विभाग द्वारा गणतंत्र दिवस के उपलक्ष में टाउन हॉल,चांदनी चौक में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देशभर के अलग-अलग क्षेत्र से बड़े ही प्रखर और चर्चित कवियों ने भाग लिया। चर्चित कवियों में मुख्य रूप से पद्मश्री डॉ सुरेंद्र शर्मा, कवि अशोक चक्रधर, कवि डॉक्टर विष्णु सक्सेना, कवि अरुण जैमिनी, कवि राजेंद्र मालवीय,कवि डॉक्टर प्रवीण शुक्ल,कवि सर्वेश अस्थाना,कवित्री प्रोफेसर श्रीमती प्रेम सिंह मौजूद रहे। कवि सम्मेलन का संचालन मशहूर कवयित्री डॉक्टर कीर्ति काले द्वारा किया गया। सभी कवियों ने टाउन हॉल में मौजूद सैकड़ों लोगों के समक्ष अपने जौहर का प्रदर्शन किया। पूरा टाउन हॉल सभी कवियों की बेहतरीन कविताओं पर तालियों से गूंज उठा। कला संस्कृति एवं भाषा मंत्री सौरभ भारद्वाज मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए। हिंदी अकादमी के सचिव संजय गर्ग ने मंत्री सौरभ भारद्वाज का मफलर पहनाकर एवं नव अंकुरित पौधा देकर स्वागत किया। मंत्री सौरभ भारद्वाज ने मंच पर मौजूद सभी सम्मानित कवियों का मफलर पहनकर स्वागत किया।

मंच से संबोधन करते हुए मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा, कि इस कवि सम्मेलन को लाल किले का कवि सम्मेलन कहा जाता है। प्रतिवर्ष इस सम्मेलन का आयोजन लाल किले के पास किया जाता रहा है। परंतु कुछ समस्याओं के चलते यह कवि सम्मेलन इस बार लाल किले पर न होकर चांदनी चौक के टाउन हॉल में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता का यह इतिहास रहा है, कि दिल्ली की जनता ने हमेशा कविताओं में, मुशायरों आदि में बहुत रुचि दिखाई है और दिल्ली की जनता सही मायने में वह श्रोता है, जो हर कवि अपने कवि सम्मेलनों में देखना चाहता है। मंत्री सौरभ भारद्वाज ने मंच पर आसीन सभी बड़े-बड़े बहुत चर्चित अनुभवी कवियों का इस मंच पर आने के लिए धन्यवाद किया। मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हमने इस कवि सम्मेलन के लिए प्रथक प्रथक विचारधारा के कवियों को चुना है, ताकि सभी प्रकार के श्रोताओं का ध्यान रखा जा सके और जो लोग यहां कवियों को सुनाने आए हैं, वह सभी अपनी-अपनी विचारधारा से मेल खाते कवियों की कविताओं का आनंद ले सके. उन्होंने कहा क्योंकि इस टाउन हॉल में पहली बार कवि सम्मेलन किया जा रहा है और सभी कार्य बहुत जल्दबाजी में किए गए हैं,इस वजह से व्यव्स्थाओं में जो कमी रह गई हैं, हमारी यह कोशिश रहेगी की अगली बार जब इस कवि सम्मेलन का आयोजन कराया जाएगा तो इसका प्रचार प्रसार खूब अच्छे तरीके से किया जाएगा और भी बेहतर तरीके से व्यवस्था की जाएगी ताकि दिल्ली के कोने-कोने तक इस कवि सम्मेलन की जानकारी लोगों तक पहुंचे और जितनी भीड़ इस बार कवियों को सुनने के लिए आई है, उससे भी दोगुनी, चार गुनी तादाद में लोग इस कवि सम्मेलन में हमारे मशहूर कवियों की कविताओं का आनंद लेने आ सकें।
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