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गुडगाँव

डीसी डा. यश गर्ग ने आज गुरूग्राम के उद्यमियों की समस्याएं सुनी और मौके पर अधिकारियों को उनके निवारण के आदेश दिए।

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
गुरुग्राम: उपायुक्त डा. यश गर्ग ने आज गुरूग्राम के उद्यमियों की समस्याएं सुनी और मौके पर अधिकारियों को उनके निवारण के आदेश दिए। वे आज गुरूग्राम के लघु सचिवालय में प्रथम तल पर स्थित सभागार में उद्योगों के लिए ईज आॅफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित जिला स्तरीय क्लीरेंस कमेटी तथा जिला स्तरीय ग्रीवेंस कमेटी की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस बैठक में गुरूग्राम के सैक्टर-37 स्थित औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों द्वारा रखी गई समस्याओं का कड़ा संज्ञान लेते हुए उपायुक्त ने निर्देश दिए कि नगर निगम गुरूग्राम के मुख्य अभियंता तथा हरियाणा राज्य औद्योगिक सरंचना विकास निगम(एचएसआईआईडीसी) के सहायक महाप्रबंधक संयुक्त रूप से सैक्टर-37 औद्योगिक क्षेत्र का दौरा करेंगे और वहां की जो भी समस्याएं होंगी उसके बारे में एक सप्ताह में रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपेंगे।

वहां की इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन ने सिवरेज , बरसाती पानी निकासी और सफाई से संबंधित मुद्दे उठाए थे। उपायुक्त ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में उद्यमियों को सौहार्दपूर्ण माहौल उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है और हमें भी इस दिशा में काम करने की आवश्यकता है। औद्योगिक क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी कमियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए। इस बैठक में उपायुक्त ने बताया कि उद्यमियों की सुविधा के लिए राज्य सरकार ने हरियाणा इन्टरप्रैन्योर प्रोमोशन काउंसिल(एचईपीसी)पोर्टल शुरू किया हुआ है जिस पर उद्योग लगाने या पहले से लगे उद्योगों का विस्तार करने के लिए विभिन्न सरकारी विभागों से ली जाने वाली  कन्सेंट अथवा एनओसी प्राप्त करने के लिए सिंगल विंडो पर अप्लाई किया जा सकता है। इस पोर्टल पर आने वाले आवेदन संबंधित विभाग को भेजे जाते हैं और कंसेंट तथा एनओसी की प्रक्र्रिया पूरी करने के बाद संबंधित उद्यमी को एक निर्धारित समय अवधि में दस्तावेज दे दिए जाते हैं। बैठक में उपस्थित जिला उद्योग केन्द्र के संयुक्त निदेशक राजेश कुमार खेड़ा ने बताया कि अब राज्य सरकार ने पोर्टल पर मिलने वाले आवेदनो के लिए अधिकतम 45 दिन की सीमा तय कर दी है। इसका तात्पर्य यह है कि 45 दिन में यदि कोई विभाग आवेदन पर कार्यवाही नही करता है तो उद्यमी को डीम्ड क्लीरेंस मिल जाएगी और उसे कंसेंट या एनओसी के लिए इंतजार करने की आवश्यकता नही है और संबंधित विभाग के अधिकारी की देरी के लिए जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। इन 45 दिनों की अवधि में उद्यमी से दस्तावेज पूरे करवाने आदि का भी समय शामिल हैं। डीम्ड क्लीयरेंस मिलने के बाद संबंधित उद्यमी पोर्टल से उसकी काॅपी निकालकर अपनी आगे की कार्यवाही कर सकता है। बैठक में यह भी बताया गया कि 1 नवंबर 2020 से लेकर 30 अप्रैल 2021 की अवधि के दौरान जितनी भी सर्विसेज उद्यमियों को दी गई हैं, उसके बारे में उनसे 1 मई से 30 जून 2021 तक डीआईपीपी द्वारा फोन पर फीडबैक लिया जाएगा। खेड़ा ने सभी उद्यमियों से आग्रह किया कि वे इस दौरान अपना मोबाइल फोन पर आने वाली काॅल को जरूर उठाएं और अपने अनुभव सांझे करें। हरियाणा की पूरे देश में ईज आॅफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग में उनकी फीडबैक अथवा रिस्पांस के भी अंक होते हैं। आज की बैठक में जिला स्तरीय क्लीरेंस कमेटी में 39 मामले रखे गए थे जिनमें से 22 का समाधान मौके पर किया गया तथा बाकि आवेदनों पर संबंधित उद्यमियों से दस्तावेजो की मांग की गई है। इसी प्रकार, उद्यमियों के लिए गठित जिला स्तरीय ग्रीवेंस कमेटी में 11 मामले रखे गए थे जिनमें से लगभग आधे मामलों का निपटारा किया गया। इस अवसर पर उद्योग विहार इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन से अनिमेश साहनी व आर एस सिंह, एनसीआर चैंबर आफ इंडस्ट्रीज से विवेक उपाध्याय व अशोक कोहली, जीआईए के अध्यक्ष जे एम मंगला, सदस्य मनोज जैन , यशपाल अग्रवाल, रामचंद्र राय, सैक्टर-37 की इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन से राकेश बाटला व के के गांधी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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