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दिल्ली नई दिल्ली

केंद्रीय जल मंत्री व डब्ल्यूएचओ के मानक पर खरा उतर चुका है दिल्ली का पानी,राजनीति ठीक नहीं है: अरविंद केजरीवाल

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में पानी की गुणवत्ता पर हो रही राजनीति का करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली का पानी केंद्रीय जल मंत्री और डब्ल्यूएचओ के मानक पर खरा उतर चुका है। केंद्रीय जल मंत्री दिल्ली में 20 जगहों के नमूने के आधार पर कह चुके हैं कि दिल्ली का पानी यूरोपीय शहरों से बेहतर है, फिर इस पर हो रही राजनीति ठीक नहीं है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आने वाले दिनों में दिल्ली जल बोर्ड हर वार्ड से 5 नमूना लेगा। पूरी दिल्ली से करीब दो हजार नमूने लिए जाएंगे, जिसकी रिपोर्ट जनता के सामने रखी जाएगी। अरविंद केजरीवाल ने इसके लिए केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान को पत्र लिखकर आमंत्रित भी किया है। मुख्यमंत्री ने कहा भले ही रामविलास पासवान जी हमें 11 नमूनों के स्थान की जानकारी नहीं दे रहे हैं, लेकिन हम चाहते हैं कि वह हमारे साथ चलकर पानी का नमूना लें। मुख्यमंत्री ने कहा दिल्ली में पानी की गुणवत्ता पर हो रही राजनीति ठीक नहीं है।  

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय जल मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने  26 सितंबर 2019 को बताया था कि दिल्ली का पानी यूरोपीय शहरों से बेहतर है। 6 अक्टूबर को दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने भी केंद्रीय जल मंत्री के बयान का समर्थन किया था। केंद्रीय जल मंत्री ने दिल्ली में 20 जगहों से लिए गए पानी के नमूने की रिपोर्ट के आधार पर अपनी बात कही थी। अरविंद केजरीवाल ने यह भी याद किया कि पूर्व में केंद्रीय जल मंत्री दिल्ली की पानी पर केंद्रीय खाद्य मंत्री राम विलास पालवान के बयान को उनकी निजी राय बता चुके हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली की पानी पर केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान का ताजा बयान 11 स्थानों से लिए गए पानी के नमूने को आधार बनाकर दिए जाने की जानकारी मिली है। सीएम ने कहा कि हमने उन स्थानों की सूची मांगी, वह सूची हमें नहीं दी गई। सीएम ने यह भी कहा कि दो करोड़ की जनसंख्या वाले शहर में पानी की गुणवत्ता को सिर्फ 11 जगहों से लिए गए नमूनों के आधार पर बताया ही नहीं जा सकता है। सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुसार दस हजार की जनसंख्या पर एक नमूना एकत्र किया जाना चाहिए। इस लिहाज से कम से कम दिल्ली में 2000 नमूने लेने चाहिए थे। दिल्ली जल बोर्ड की ओर से दिल्ली में विभिन्न स्थानों से हर रोज 500 नमूने लिए जाते है। 1 जनवरी और 24 सितंबर 2019 को दिल्ली जल बोर्ड ने 155302 नमूने एकत्र किए। उनमें से केवल 2222 नमूने यानि सिर्फ 1.43 प्रतिशत ही असफल रहे।



अक्टूबर में फिर से दिल्ली जल बोर्ड ने 16502 नमूने एकत्र किए, जिनमें से केवल 3.98 प्रतिशि नमूने (658) फेल हुए। जबकि 96.02 प्रतिशत (15844) पास हुए। डब्ल्यूएचओ के मानदंडों के अनुसार पानी का नमूना फेल होने की स्वीकार्य सीमा 5 प्रतिशत है। दिल्ली का प्रदर्शन इस मानदंडों के अंदर ही आता है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आने वाले दिनों में दिल्ली जल बोर्ड हर वार्ड से रेंडम पांच पानी के नमूने एकत्र करेगा। हम मीडिया और राम विलास पासवान जी को आमंत्रित करेंगे। उन नमूनों की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाएगा। जिससे दिल्ली की पानी पर हो रही राजनीति का सच सामने आ सके। सीएम ने कहा हम यह दावा नहीं कर रहे हैं कि दिल्ली में सभी समस्याओं का हल हो गया है। पिछले 70 वर्षों में विभिन्न सरकारों ने दिल्ली को बर्बाद किया है। सब कुछ पांच साल में नहीं किया जा सकता। हम लोगों ने पिछले पांच वर्षों में विभिन्न सुविधाएं प्रदान की हैं। काफी मेहनत हुआ है। कई कॉलोनियों में दिल्ली सरकार ने नई पानी की पाइप लाइनें बिछाईं। कई कॉलोनियों में सीवर लाइनें बिछाई गई। जिससे पीने के पानी व सीवरेज की लाईन मिल न जाए। दिल्ली में पीने के पानी की गुणवत्ता में सुधार के लिए कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। पिछले पांच वर्षों में पानी के कनेक्शन और पानी की गुणवत्ता के बारे में दिल्ली में अभूतपूर्व बदलाव हुआ है। 

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