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हरियाणा पुलिस की उल्लेखनीय उपलब्धियां, सितंबर 2026 में राष्ट्रीय डैशबोर्ड पर हासिल किया प्रथम स्थान-डीजीपी

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
चंडीगढ़: हरियाणा पुलिस ने तीन नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। भारतीय न्याय संहिता, 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 को 1 जुलाई, 2024 से लागू किए जाने के बाद हरियाणा ने इनके कानूनी, तकनी की और प्रशासनिक प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं। हरियाणा देश का पहला राज्य है, जिसने इन तीनों नए आपराधिक कानूनों को पूर्ण रूप से लागू किया है।

हरियाणा ने इन तीनों नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में विभिन्न कानूनी एवं तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करते हुए लगभग शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया है। सितंबर 2026 में हरियाणा ने नए आपराधिक कानूनों के डैशबोर्ड पर देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी कार्यक्षमता का परिचय दिया। हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कहा कि तीन नए आपराधिक कानून देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को अधिक आधुनिक, पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

हरियाणा पुलिस इन कानूनों को केवल कानूनी प्रावधानों के रूप में लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके माध्यम से जांच की गुणवत्ता सुधारने, वैज्ञानिक साक्ष्यों को मजबूत करने और न्याय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि तकनीक का अधिकतम उपयोग, फॉरेंसिक जांच को प्राथमिकता, पुलिस कर्मियों का निरंतर प्रशिक्षण और अदालतों के साथ बेहतर समन्वय इस व्यवस्था के प्रमुख आधार हैं। हमारा उद्देश्य है कि प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध, निष्पक्ष और प्रभावी न्याय मिले तथा पुलिस व्यवस्था में जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हो।नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए हरियाणा पुलिस द्वारा विभिन्न अधिसूचनाएं, सामान्य आदेश, मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs), नियम और दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। जांच अधिकारियों की सुविधा के लिए नए कानूनों के विशिष्ट प्रावधानों पर 14 द्विभाषी दिशा निर्देश भी जारी किए गए हैं।हरियाणा पुलिस के शत-प्रतिशत पुलिस कर्मियों को नए आपराधिक कानूनों का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, 56,000 पुलिस कर्मियों का iGOT पोर्टल पर पंजीकरण किया गया है, जिनमें से 34,500 कर्मियों ने पोर्टल पर उपलब्ध एआई आधारित पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस प्रकार उक्त पाठ्यक्रम में पंजीकृत कर्मियों के बीच 62 प्रतिशत पूर्णता दर हासिल की गई है।हरियाणा में ई-साक्ष्य (e-Sakshya) और ई-समन (e-Summon) ऐप सफलतापूर्वक लागू किए गए हैं। सभी जांच अधिकारियों को ई-साक्ष्य ऐप पर ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अपलोड करने का प्रशिक्षण दिया गया है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 176(3) के तहत अपराध स्थल की फॉरेंसिक जांच की रिकॉर्डिंग में इस ऐप का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। निर्धारित प्रावधानों के अंतर्गत 99.2 प्रतिशत फॉरेंसिक जांच रिकॉर्डिंग ई-साक्ष्य ऐप के माध्यम से की जा रही हैं।इसी प्रकार, हरियाणा में 78.13 प्रतिशत समन इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्राप्त हो रहे हैं। इससे कागजी कार्रवाई में कमी आई है तथा संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के समय, आवागमन और ईंधन की बचत हुई है। न्यायिक प्रक्रिया में डिजिटल माध्यमों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए पुलिस थानों, फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं, न्यायालयों, जेलों और बैंकों में कुल 2,145 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग क्यूबिकल स्थापित किए गए हैं। इनके माध्यम से गवाहों और संबंधित व्यक्तियों की ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से पेशी एवं परीक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।वर्तमान में लगभग 70 प्रतिशत पुलिसकर्मी अदालतों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हो रहे हैं, जबकि 81.78  प्रतिशत आरोपी विभिन्न अदालतों में इसी माध्यम से पेश किए जा रहे हैं। इससे जेलों से अदालतों तक कैदियों को लाने-ले जाने के लिए जेल वैन और अन्य वाहनों के उपयोग में कमी आई है। परिणामस्वरूप ईंधन की बचत के साथ-साथ वाहनों के रखरखाव पर होने वाला खर्च भी कम हुआ है। पुलिसकर्मियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी ने मानव संसाधनों के अधिक प्रभावी उपयोग में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब पुलिसकर्मी हरियाणा मानवाधिकार आयोग, हरियाणा राज्य महिला आयोग, हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग, हरियाणा अनुसूचित जाति आयोग, हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग, हरियाणा राज्य सूचना आयोग और हरियाणा पुलिस शिकायत प्राधिकरण सहित विभिन्न आयोगों एवं प्राधिकरणों के समक्ष भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हो रहे हैं।तीन नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन से मानव संसाधनों, कागज, ईंधन और अन्य सरकारी संसाधनों की बचत का आकलन करने के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से विस्तृत अध्ययन कराया गया है।अध्ययन के अनुसार, ई-चालान प्रणाली के माध्यम से केवल चार महीनों में लगभग 6,704 ए4 पेपर रीम की बचत हुई, जिससे अनुमानित 8,165 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन और 3,15,106 लीटर पानी की बचत हुई। इसी प्रकार, छह महीनों में ई-समन प्रणाली से लगभग 3,240 पेपर रीम की बचत हुई। इसके परिणामस्वरूप लगभग 1,52,306 लीटर पानी तथा 27,00,466 लीटर ईंधन की बचत दर्ज की गई, जिसका अनुमानित मूल्य 25.65 करोड़ रुपये है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई से सात महीनों में लगभग 1,22,400 लीटर ईंधन की बचत हुई, जिसका अनुमानित मूल्य 1.16 करोड़ रुपये है। इसके अतिरिक्त, पुलिस कर्मियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी से यात्रा भत्ते के मद में लगभग 1.10 करोड़ रुपये की बचत हुई है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि डिजिटल माध्यमों का उपयोग न केवल न्यायिक प्रक्रिया को सुगम बना रहा है, बल्कि सरकारी संसाधनों के अधिक कुशल उपयोग और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे रहा है।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 176(3) के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत सात वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले अपराधों में अपराध स्थल पर फॉरेंसिक विशेषज्ञ की विजिट और साक्ष्य एकत्रित करने की प्रक्रिया की इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से रिकॉर्डिंग सुनिश्चित की जा रही है। हरियाणा ने सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में अपराध स्थलों पर फॉरेंसिक टीम की शत-प्रतिशत विजिट का लक्ष्य हासिल किया है। इसके अतिरिक्त, सात वर्ष से कम सजा वाले अपराधों में भी फॉरेंसिक टीमों की विजिट सुनिश्चित की जा रही है। अपराध स्थलों पर फॉरेंसिक टीमों की उपस्थिति की नियमित निगरानी की जा रही है, ताकि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच को अधिक मजबूत बनाया जा सके। नए आपराधिक कानूनों के तहत वैज्ञानिक जांच की बढ़ती आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए हरियाणा में फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं की मानव संसाधन क्षमता और तकनीकी सुविधाओं में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में स्वीकृत पदों की संख्या 351 से बढ़ाकर 1,044 कर दी गई है, जो लगभग 197.4 प्रतिशत की वृद्धि है। कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों की संख्या भी 167 से बढ़कर 470 हो गई है। इनमें 290 नियमित कर्मचारी, 65 ओएसपी-II, 86 एचकेआरएनएल और 29 एनआईसीएसआई के माध्यम से तैनात कर्मचारी शामिल हैं। 563 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया सक्रिय रूप से जारी है। राज्य की एक मुख्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोग शाला और चार क्षेत्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं का उन्नयन किया गया है। मादक पदार्थों के विश्लेषण में तेजी लाने के लिए तीन अत्याधुनिक जीसी-एमएस इकाइयां तथा मामलों में तुलना और परीक्षण की क्षमता बढ़ाने के लिए तीन उच्च परिशुद्धता तुलना माइक्रोस्कोप उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा, डीएनए डिवीजन में आधुनिक डीएनए सीक्वेंसर, पीसीआर सिस्टम और स्वचालित एक्सट्रैक्शन यूनिट स्थापित की गई हैं। बायोलॉजी डिवीजन को आधुनिक माइक्रोस्कोप, फ्रीजर और विश्लेषणात्मक उपकरणों से सुसज्जित किया गया है। साइबर फॉरेंसिक यूनिट की स्थापना भी की गई है। अपराध स्थलों पर त्वरित वैज्ञानिक जांच सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान में प्रत्येक जिले में कम से कम एक मोबाइल फॉरेंसिक वैन कार्यरत है, जबकि बड़े जिलों में दो वैन तैनात की गई हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार द्वारा 17 नई मोबाइल फॉरेंसिक साइंस यूनिट स्थापित करने की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इससे घटनास्थल पर ही साक्ष्य संकलन और वैज्ञानिक जांच की क्षमता को और मजबूत किया जाएगा।नए आपराधिक कानूनों के तहत नागरिकों को त्वरित राहत प्रदान करने और अधिकार क्षेत्र की बाधाओं के कारण शिकायतों में देरी रोकने के उद्देश्य से जीरो एफआईआर की निगरानी के लिए मानक संचालन प्रक्रिया जारी की गई है। जिला पुलिस अधीक्षकों द्वारा जीरो एफआईआर की साप्ताहिक समीक्षा की जा रही है। हरियाणा में जीरो एफआईआर को सामान्यतः 48 घंटे के भीतर नियमित एफआईआर में परिवर्तित करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। इससे शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई और जांच प्रक्रिया में तेजी लाने में मदद मिल रही है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 303 के तहत राज्य सरकार द्वारा सामान्य आदेश जारी कर कुछ श्रेणियों के कैदियों को जेल से अदालत तक ले जाने की आवश्यकता को सीमित किया गया है। इसके परिणामस्वरूप 84.49 प्रतिशत आरोपी जेलों से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालतों में पेश हो रहे हैं। इससे सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव कम करने के साथ-साथ परिवहन, ईंधन और अन्य संसाधनों की बचत भी हो रही है। हरियाणा पुलिस द्वारा नए आपराधिक कानूनों के तहत नागरिकों को अधिक सरल और पारदर्शी सेवाएं प्रदान करने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। इनमें वाहन चोरी के मामलों में ई-एफआईआर की सुविधा, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम तथा हिट-एंड-रन मामलों में मुआवजे से संबंधित सूचनाएं संबंधित अधिकारियों को ई-मेल के माध्यम से भेजना, पुलिस थाना लोकेटर और जांच के प्रत्येक चरण में नागरिकों को एसएमएस अलर्ट भेजना शामिल है। इन पहलों से नागरिकों को शिकायतों और जांच की प्रगति की जानकारी प्राप्त करने में सुविधा हो रही है तथा पुलिस सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा रहा है। हरियाणा पुलिस नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तकनीकी नवाचार, वैज्ञानिक जांच, निरंतर प्रशिक्षण और डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर विशेष जोर दे रही है। इन प्रयासों का उद्देश्य जांच प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाना, न्याय वितरण में तेजी लाना और नागरिकों के लिए एक आधुनिक, पारदर्शी तथा प्रभावी आपराधिक न्याय प्रणाली सुनिश्चित करना है।

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