
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली: वोट चोरी को लेकर ‘इंडिया’ गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार देर शाम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में मांग की कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा हो, मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को जीवन पर्यंत कानूनी कार्रवाई से छूट देने वाले कानून को निरस्त किया जाए, एसआईआर पर तत्काल रोक लगे और मतदाता सूची से अवैध रूप से हटाए गए 13.30 करोड़ मतदाताओं को दोबारा शामिल किया जाए। ईवीएम को पूरी तरह से हटाकर बैलेट पेपर के जरिए चुनाव कराए जाएं। साथ ही, पिछले दो सालों में हुए वे सभी विधानसभा चुनाव रद्द हों, जहां वोट चोरी के निर्णायक सबूत हैं।

प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस अध्यक्ष व राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी, सपा नेता राजीव राय, एनसीपी (शरद चंद्र पवार) नेता सुप्रिया सुले, राजद नेता मनोज झा, सीपीएम नेता एमए बेबी, सीपीआई नेता डी. राजा, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और वीसीके नेता थोल. थिरुमावलवन शामिल थे। इससे पहले, ‘इंडिया’ गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं ने सांसदों के साथ संसद के सेंट्रल हॉल में एक बैठक भी की। बैठक के बाद विपक्ष के इन नेताओं और सांसदों ने राष्ट्रपति भवन तक पैदल मार्च किया।राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी,संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल,कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार,हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और‘इंडिया’ गठबंधन के सांसद विजय चौक पर धरना देते हुए वोट चोरी को लेकर जमकर नारेबाजी करते रहे।मुलाकात के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने बताया कि ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं ने वोट चोरी का मुद्दा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के समक्ष रखा और उन्हें ज्ञापन सौंपा। विपक्ष के नेताओं ने राष्ट्रपति को बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने वोट चोरी में शामिल होकर बहुत बड़ी गलती की है। साथ ही, यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह लोकतंत्र को खत्म करने पर आमादा हैं।खरगे ने कहा कि राष्ट्रपति ने उनकी बात सुनी और ज्ञापन का संज्ञान लेकर सही कदम उठाने का आश्वासन दिया। खरगे ने बताया कि राष्ट्रपति ने विपक्ष से वोट चोरी के सबूत मांगे हैं, जिन्हें गठबंधन उन्हें सौंपेगा।वहीं, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति से साफ कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने भारतीय लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश की है। उन्हें उम्मीद थी कि राष्ट्रपति वोट चोरी से इनकार करेंगी और कहेंगी कि भारत में एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी सिस्टम है। लेकिन वह इस बात से आश्चर्यचकित थे कि जब प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को वोट चोरी के बारे में जानकारी दी, तो उन्होंने इससे इनकार नहीं किया। राष्ट्रपति ने यह नहीं कहा कि हिंदुस्तान में चुनाव चोरी नहीं हो रहे हैं, बल्कि उन्होंने वोट चोरी के सबूत देने को कहा।
राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव चोरी के सबूत पूरे देश के सामने हैं। एक के बाद एक कई राज्यों में चोरी हुई है और 2024 का लोकसभा चुनाव भी चोरी हुआ था। उन्होंने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन राष्ट्रपति को वोट चोरी के सबूत देने को तैयार है।वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने यह जानकारी भी दी कि ‘इंडिया’ गठबंधन का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगा।ज्ञापन में विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा कि वोट देने का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 में निहित प्रतिनिधि लोकतंत्र की नींव है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग इस अधिकार का संवैधानिक संरक्षक है, मालिक नहीं। आयोग संविधान के प्रति जवाबदेह है, न कि अपने राजनीतिक आकाओं के प्रति। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि किसी भी संस्था को इस अधिकार से जुड़े नियमों में मनमाने बदलाव करने, अपने फैसलों के लिए जवाबदेही से बचने या जवाब मांगने वालों की आवाज को दबाने की छूट नहीं दी जा सकती। विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति से इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेने और अपनी संवैधानिक भूमिका का निर्वहन करते हुए सभी मांगों पर बिना देरी के कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की। ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त पर वोट चोरी से जुड़े मामले को छिपाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष गलतबयानी करने और झूठ बोलने का आरोप भी लगाया गया। नेताओं ने राष्ट्रपति से संविधान की निर्णायक रूप से रक्षा करने और देश के नागरिकों के मतदान के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
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