अरविन्द उत्तम की रिपोर्ट
ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित ‘ला रेजिडेंशिया’ (LA Residentia) प्रोजेक्ट के फ्लैट खरीदारों के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। हाईकोर्ट ने ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) को निर्देश दिया है कि वह फ्लैटों की सब-लीज डीड यानी रजिस्ट्री को लेकर खरीदारों द्वारा दिए गए रिपेजेंटेशन पर तीन महीने के भीतर कानून के अनुसार निर्णय ले।

मामला ग्रेटर नोएडा वेस्ट (टेकज़ोन-4) स्थित ला रेजिडेंशिया प्रोजेक्ट से जुड़ा है। यहां के 43 फ्लैट खरीदारों श्रीमती किरण कपूर और अन्य ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर अपने फ्लैटों की रजिस्ट्री कराने की गुहार लगाई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने बिल्डर को फ्लैट की पूरी रकम अदा कर दी है और तमाम औपचारिकताएं भी पूरी कर ली हैं। इसके बावजूद बिल्डर और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के बीच बकाये और अन्य विवादों के कारण उनकी रजिस्ट्री लंबे समय से अटकी हुई थी। जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ में इस मामले की सुनवाई हुई याचिका कर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले (राम किशोर अरोड़ा बनाम बैंक ऑफ महाराष्ट्र व अन्य) का हवाला दिया गया, जिसमें पूरा भुगतान कर चुके फ्लैट खरीदारों के अधिकारों और सुरक्षा की बात कही गई है। हाईकोर्ट ने याचिका को लंबित रखने का कोई औचित्य न मानते हुए पक्षकारों की सहमति से इसका निस्तारण कर दिया। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा 9 और 11 जून 2026 को दिए गए प्रत्यावेदनों पर प्राधिकरण तीन महीने के भीतर नियमानुसार और तत्परता से विचार कर अंतिम निर्णय ले। वर्षों से रजिस्ट्री की बाट जोह रहे फ्लैट मालिकों के लिए यह एक अहम कानूनी कदम साबित हुआ है। हाईकोर्ट द्वारा तीन महीने की तय समय-सीमा से अब ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को निर्धारित समय के भीतर अपनी स्थिति साफ करनी होगी और निर्णय लेना होगा।
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