अजीत सिन्हा / नई दिल्ली
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवंराज्यसभा सांसद डॉ सुधांशु त्रिवेदी ने आज सोमवार को पार्टी के केंद्रीय कार्यालयमें प्रेस वार्ता को संबोधित किया और पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के देश केहिंदुओं के खिलाफ दिए गए बयान पर करारा हमला बोला। उन्होंने हामिद अंसारी के बयानको कांग्रेस की वैचारिक दिशा से भी जोड़ा। डॉ त्रिवेदी ने कहा कि हामिद अंसारी केबयान से नेहरू की कम्युनिज्म और हिंदू राष्ट्रवाद संबंधी सोच, राहुल गांधी के मुस्लिम लीग संबंधी बयान तथा कांग्रेसकी वर्तमान राजनीति पर प्रश्न उठते हैं। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने नेहरू केविभिन्न लेखन और वक्तव्यों का संदर्भ देते हुए मंदिरों, ताजमहल, वंदे मातरम और महमूद गजनी संबंधी टिप्पणियों काउल्लेख किया। डॉ त्रिवेदी ने एन.वी. गाडगिल की पुस्तक का हवाला देते हुए नेहरू कीनीतियों पर ऐतिहासिक संदर्भ प्रस्तुत किए और कांग्रेस से आत्ममंथन करने को कहा।डॉ त्रिवेदी ने कहा कि देश के संवैधानिक पद पर रहचुके व्यक्ति किस प्रकार अपने अंतर्मनोभावों और कांग्रेस के मनोभावों को अभिव्यक्तकरते हैं, इसका एक निंदनीय उदाहरण सामने आया है।

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने वर्ष 2019 में लिखी गई एककिताब को कोट करते हुए कहा है कि बकौल नेहरू, उनके लिए कम्युनिज्म उतना बड़ा खतरा नहीं था, जितना हिंदू राष्ट्रवाद। हामिद अंसारी ने तीन महत्वपूर्ण बातें स्पष्ट कीहैं। पहली बात, उनके बयान से यह स्पष्ट हुआ है कि कांग्रेस आज किसप्रकार की वैचारिक दिशा में जा चुकी है, यानी हामिदअंसारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस अब पूरी तरह से मुस्लिम लीगी माओवादीकांग्रेस हो चुकी है सांगोपांग रूप में। दूसरी बात, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि नेहरू कम्युनिज्म को एक खतरा मानते थे जिसमेंआज राहुल गांधी गोता लगा चुके हैं। आज की कांग्रेस जिस प्रकार अल्ट्रा-लेफ्ट की ओरजाती दिखाई देती है, उसके संदर्भ में यह बात महत्वपूर्ण है। तीसरी बात, उन्होंने स्वयं नेहरू का संदर्भ सामने रखा है।कांग्रेस समर्थक अक्सर पूछते हैं कि नेहरू का संदर्भ क्यों लाया जाता है। इस मामलेमें नेहरू का संदर्भ हम नहीं, बल्कि आपके ही समर्थक और संवैधानिक पद पर रहे व्यक्ति लेकर आए हैं। कांग्रेस की वर्तमान वैचारिक दिशा, कम्युनिज्म को लेकर नेहरू की सोच और स्वयं नेहरू का संदर्भ हामिद अंसारीद्वारा सामने लाया गया। आज राहुल गांधी की बातों में जो भी दिखाई पड़ता है उसकीकहानी खानदानी है। राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि 2 जून 2023 को राहुल गांधीने वाशिंगटन डी.सी. में प्रेस क्लब को संबोधित करते हुए कहा था कि “मुस्लिम लीग पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष है, मुझे इससे कोई समस्या नहीं है।” वो मुस्लिम लीग, जिसकी स्थापना जिन्ना ने की थी और जिसके साथ आजकांग्रेस केरल में सरकार चला रही है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह भी एक तथ्यहै कि केरल सरकार में मुस्लिम लीग के पांच मंत्री हैं। यदि कोई यह कहता है किमार्च 1949 में बनी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग जिन्ना की मुस्लिमलीग से अलग है। तो उसे ये तथ्य जानना चाहिए कि उसके संस्थापक मोहम्मद इस्माइलजिन्ना की मुस्लिम लीग के मद्रास प्रेसिडेंसी के अध्यक्ष रहे थे। जिन्ना कोकायदे-आजम कहा जाता था, जबकि मोहम्मद इस्माइल को कायदे-मिल्लत कहा जाता थाजिसके साथ मिलकर कांग्रेस केरल में सरकार चल रही है। अगर ये मुस्लिम लीग वोमुस्लिम लीग नहीं है तो ये कांग्रेस भी वो कांग्रेस नहीं है। मगर राहुल गांधी कोवाशिंगटन जाकर यह कहने की जरूरत क्यों पड़ी कि “बीजेपी सांप्रदायिक है और मुस्लिम लीग पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष है”? वर्ष 2011 में विकीलीक्ससे जुड़ी एक रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी ने अमेरिकी राजदूत से बातचीत में ‘हिंदू अप्राइज़िंग’ को लश्कर-ए-तैयबा से बड़ा खतरा बताया था। हम विकीलीक्स में लिखी हर बात कोसही नहीं मान रहे हैं, लेकिन कांग्रेस की ओर से इसका खंडन नहीं किया गया था।डॉ त्रिवेदी ने कहा कि जनवरी 2013 में तत्कालीन गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने जयपुरलिटरेरी फेस्टिवल में आरएसएस पर देश में ‘विनाशकारी गतिविधियों’’ के लिए शिविर चलाने का आरोप लगाया था। जब तत्कालीननेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज जी ने उनसे सदन के पटल पर इसका आधार स्पष्ट करने कोकहा, तो सुशील कुमार शिंदे ने अपना बयान वापस लेते हुए कहाकि उन्होंने ऐसे ही बोल दिया था। इससे यह सवाल उठता है कि इस प्रकार के आरोप किसआधार पर लगाए गए थे? अब हम नेहरू के उन बयानों और लेखन का उल्लेख करते हैं, जिनका संदर्भ स्वयं हामिद अंसारी ने सामने रखा है। 17 मार्च 1959 को आकाशवाणी केएक कार्यक्रम में, जिसमें नेहरू भारत के म्यूजियम का उद्घाटन कर रहे थेऔर तत्कालीन शिक्षा मंत्री हुमायूं कबीर भी मौजूद थे। नेहरू ने दक्षिण भारत के मंदिरों के संदर्भ में कहा था किवे सुंदर हैं, लेकिन कुछ मंदिर अपनी सुंदरता के बावजूद उन्हें ‘रिपेल’ करते हैं औरउन्हें ‘सप्रेस्ड’ महसूस होता है।नेहरू ने ताजमहल के बारे में कहा कि वह आंखों और आत्मा को प्रसन्न करने वाली सबसेसुंदर चीजों में से एक है। 17 मार्च 1959 के इस भाषण कास्रोत सेलेक्टेड वर्क्स ऑफ जवाहरलाल नेहरू, सीरीज 2, वॉल्यूम 47, प्रथम संस्करण, पृष्ठ 401 से 406 है। इसके अलावा, सेलेक्टेड वर्क्स ऑफ जवाहरलाल नेहरू, सीरीज 2, वॉल्यूम 74, मूल संस्करण, पृष्ठ 181 में मंदिरों मेंसंगमरमर के अधिक इस्तेमाल के संदर्भ में नेहरू की एक टिप्पणी का उल्लेख है, जिसमें उन्होंने इसे देखकर गुसलखाने या बाथरूम की यादआने की बात कही थी। मंदिरों और ताजमहल को लेकर नेहरू के अलग-अलग उल्लेखों को उनकेअपने शब्दों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। नेहरू ने यह भी कहा था कि संगमरमर सेचाहे जितनी सुंदर मूर्ति बना ले उससे गुसलखाना ही याद आता है, बनारस के लोगों को भले ही बुरा लग रहा हो। भाजपा सांसद ने कहा कि नेहरू ने ‘वंदे मातरम’ के लिए क्या कहा, यह सबको पता है। वही नेहरू विदेशी आक्रांताओं के लिएजो कहते हैं यह भी सबको पता है। नेहरू ने छत्रपति शिवाजी महाराज के लिए लिखा था “लूट ऑफ सूरत” और जब उसका विरोध हुआ, तो 1936 में वह उसे वापस लेकर, खेद व्यक्त किया था। मगर वही नेहरू ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ में, जहां महमूद गजनी का वर्णन करते हुए कहते हैं कि “गजनी कहीं अधिक एक योद्धा था। उसका धर्म से कोईलेना-देना नहीं था।” और इस कदर छिपाते हैं कि मथुरा में जब गजनी के आने काउल्लेख होता है, तो वह कहता है कि “अरे, इतनी सुंदर इमारतें! मुझे लगता है इनको बनाने में तो 200 साल लगे होंगे, फरिश्तों ने बनाया होगा।” लेकिन वहीं पर नेहरू रुक जाते हैं और कहते हैं कि वहकितना बड़ा कला का पारखी था। जबकि गजनी के साथ आए हुए जो इतिहासकार थे, जिनमें उत्बी, फरिश्ता और मिनहाज-उस-सिराज थे, जिन्होंने लिखाकि यह कहने के बाद गजनी ने कहा, “सारे मंदिरों को तोड़ दो, आग लगा दो, नेफ्था लगाकर आग लगा दो।” यह नेहरू के दिल की हकीकत है। जवाहरलाल नेहरू की सरकार में मंत्री रहे एन.वी. गाडगिल को उद्धृत करते हुए कहते हैं कि इन्हीं कारणों की वजह से वह यह कहरहे हैं कि स्वतंत्रता के समय हिंसा बढ़ी, “मुस्लिम समस्या पर नेहरू के भाषणों ने उन्हें उकसाया और हिंदुओं को क्रोधितकिया। मुसलमानों से कैसे निपटा जाए, इस मुद्दे परनेहरू और पटेल के बीच मतभेद लगातार बढ़ते गए। नेहरू के भाषणों के कारण वातावरणलगातार तनावपूर्ण होता जा रहा था और इससे गांधी जी के जीवन के लिए खतरा पैदा होरहा था।” राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि नेहरू की कैबिनेट मेंमंत्री एन.वी. गाडगिल ने अपनी पुस्तक ‘फ्रॉम इनसाइड दगवर्नमेंट’ के मूल संस्करण के पृष्ठ संख्या 147 से 148 पर इसका उल्लेख किया है। इसीलिए हामिद अंसारी नेइतिहास के गड़े हुए मुर्दे उखाड़े नहीं हैं, बल्कि उन मुर्दों में जान फूंक दी है। जो लोग इन बातों को भूल गए थे, उन्हें भी सारी चीजें याद दिला दी गई। आज हामिदअंसारी ने अपने बयान से यह साबित कर दिया है कि कांग्रेस जिस प्रकार के मुस्लिमोंको आगे बढ़ाती है, उनके अंदर वही लीगी भावना होती है, जो आज कांग्रेस के अंदर पूरी तरह व्याप्त हो गई है।नेहरू ने भी ऐसी ही बातें की थीं। 1935 में ‘ग्लिम्पसेज ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री’ में नेहरू ने लिखा था कि “मुझे स्वामी विवेकानंद द्वारा बताए गए हिंदू राष्ट्रवाद से कोई समस्या नहींहै।” मगर जैसे ही 1937 में जिन्ना कहता है कि ‘वंदे मातरम का विरोध करो’, तो 6 अप्रैल 1938 को नेहरू पत्रलिखते हैं कि “नहीं-नहीं, हम सब छोड़ने कोतैयार हैं, सब काटने-फाड़ने को तैयार हैं।” इसके बाद 1944 में ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ में यह लिख देते हैं।डॉ त्रिवेदी ने कहा कि यानी जो गलती कांग्रेस ने 100 साल पहले की थी, वही आज कर रही है। जिस प्रकार से हामिद अंसारी ने कांग्रेस को एक्सपोज किया, नेहरू को एक्सपोज किया और यह साबित किया कि वामपंथ एकखतरा है, उससे अब एकदम साफ हो गया है कि कांग्रेस के चेहरे कामास्क हट गया है और उसका असली चेहरा पूरी तरह सामने आ गया है। इसलिए कांग्रेसवालों को नेहरू को उद्धृत करने से पहले सोचना चाहिए, क्योंकि उनकी किताबों में जो कुछ लिखा है, शायद उन्होंने खुद भी नहीं पढ़ा है। राहुल गांधी तो ऐसे नेता हैं कि आपने ‘पढ़ा-लिखा’ दो शब्द सुनेहोंगे ना? वह सिर्फ लिखे हैं, पढ़े नहीं हैं। खटाखट-खटाखट ट्विटर पर लिखते हैं और पढ़ते कुछ नहीं हैं।इसलिए नेहरू और गांधी जी ने जो कुछ लिखा है, उसको पढ़िए और याद रखिए, “बैठे हैं दिल में इतने राज छुपाए, जरा सा एक पन्ना उठे तो तुम्हारा दिल डगमगाए।”
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