अजीत सिन्हा / नई दिल्ली
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने आज सोमवार कोउत्तर प्रदेश के मेरठ में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम को संबोधित किया और युवाओंसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 के विकसित भारत के संकल्प से जुड़कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने काआह्वान किया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने लक्ष्य, संकल्प, अध्ययन, अनुभव और धैर्यको सफलता का आधार बताते हुए नशा-मुक्ति, राष्ट्रप्रेम, योग, मेडिटेशन और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया। इस दौरान नितिन नवीन ने विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों के उत्तर दिएऔर कहा कि देश के भविष्य का निर्माण करने वाली सबसे शक्तिशाली ताकत युवा हैं। नितिन नवीन ने कहा कि युवाओं में अपार ऊर्जा, प्रतिभा और विचार-क्षमता है तथा यदि इस शक्ति को सही दिशा दी जाए, तो युवा देश को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। नवीन ने कहा कि देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए चल पड़ा है।

आजादी के बाद देशको अक्सर क्षेत्रीय या व्यक्तिगत नजरिए से देखा गया, लेकिन अब ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ 140 करोड़ देशवासियों को एकजुट होकर आगे बढ़ना है। भारतआज दुनिया में सबसे अधिक युवा आबादी वाला देश है, इसलिए युवाओं का दायित्व सबसे बड़ा है। आज की पीढ़ी को जीवन में ‘शॉर्टकट’ से बचने कीआवश्यकता है। आज का युवा भले ही ‘रील्स’ देखता है, लेकिन उसे पसंद वही आता है जो ‘रियल’ यानी यथार्थहोता है। बनावटी चीजों की पहुंच सीमित होती है, इसलिए जीवन में लक्ष्य तय करके और एक संकल्प के साथ सही रोडमैप बनाकर आगेबढ़ना चाहिए। छात्र चाहे डॉक्टर बनें,इंजीनियर बनेंया उद्यमी,उनका अंतिम लक्ष्य केवल स्वयं या परिवार का विकासनहीं,बल्कि राष्ट्र निर्माण होना चाहिए।हमारा मानना है किकोई भी काम छोटा नहीं होता। बड़े मन से किया गया छोटा काम भी बड़ा हो जाता है औरछोटे मन से किया गया बड़ा काम भी छोटा रह जाता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने समाज में फैल रही नशे की प्रवृत्ति पर गहरी चिंता व्यक्त की और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 15 अगस्त को शुरू किए गए नशा-मुक्ति अभियान से जुड़ने काआग्रह किया। हमारा सुझाव है कि युवाओं में राष्ट्रप्रेम और समर्पण की भावना कोगहराई तक उतारने के लिए उत्तर प्रदेश में भी ‘बॉर्डर दर्शन’ कार्यक्रम शुरू किया जाना चाहिए। जब युवा सीमा परजाकर खुले आसमान के नीचे देश की रक्षा कर रहे सैनिकों को देखते हैं, तो उनके भीतर भी देश के प्रति असीम समर्पण का भावजागृत होता है, जो उन्हें जीवन में कभी भटकने नहीं देता। लीडरशिपकेवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि हर क्षेत्र में इसकी आवश्यकता होती है। जिस तरहक्रिकेट में एक बल्लेबाज को अच्छी बैटिंग करने के लिए पहले ‘पिच पर जमना’ पड़ता है, उसी तरह युवाओं को अपने क्षेत्र की जड़ों तक जानाचाहिए। लीडरशिप के तीन मुख्य स्तंभ हैं, अध्ययन, अनुभव और धैर्य। इन्हें जीवन में उतारने से किसी भीक्षेत्र में नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। उसी प्रकार 100 मीटर की दौड़ में इंसान की गति की परख होती है, लेकिन लंबी दौड़ में ‘स्टैमिना’ यानी धैर्य और सहनशक्ति का परीक्षण होता है। जीवन एकलंबी दौड़ है। यदि युवा अपनी सहनशक्ति और निरंतरता बनाए रखेंगे, तो वे लंबी दूरी तय करके अपनी मंजिल तक अवश्यपहुंचेंगे। नवीन ने 2013 के ‘इंडो-यूएस कल्चर एक्सचेंज प्रोग्राम’ के तहत अपनी अमेरिका यात्रा का संस्मरण साझा करते हुएबताया कि वहां वह 48 घंटे एक अमेरिकी परिवार के साथ रहे। उस परिवार नेभारतीय संयुक्त परिवार व्यवस्था की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए दुख जताया था किअमेरिका में बच्चे अलग हो जाते हैं और त्योहारों पर भी परिवार साथ नहीं जुड़ता।लेकिन हमारे देश का युवा से अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़ा रहता है और हमारेयुवाओं को ऐसे ही रहना हैं।
हम सभी युवाओं से प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी द्वारा वैश्विक स्तर पर स्थापित किए गए ‘योग’ और ‘मेडिटेशन’ को अपनीदिनचर्या में शामिल करने का आह्वान करते हैं, ताकि युवा एकाग्रता और समर्पण के साथ काम कर सकें। इस समय बिहार बाढ़ कीसमस्या से जूझ रहा है। बिहार में बाढ़ का मुख्य कारण नेपाल की तराई से आने वालापानी है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के ‘नदियों को जोड़ने’ के विजन दिया था, जिसे अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगे बढ़ा रहे हैं। कोसीक्षेत्र में 20 हजार करोड़ रुपये की योजना से नेपाल की तराई मेंनदियों को जोड़ने का काम शुरू हो चुका है, जिससे इस विभीषिका से निजात मिलेगी। हिमालयी क्षेत्रों में ग्लोबल वार्मिंगके कारण कई आपदाएं उत्पन्न होती हैं। इससे बचने के लिए हम युवाओं से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से जुड़कर पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का आग्रह करतेहैं।भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि पिछले 10-12 वर्षों में देश में बड़े बदलाव हुए हैं। 10 साल पहले देश में मात्र 60 हजार मेडिकल सीटें थीं, जो आज 1.5 लाख से अधिक होगई हैं। देश में विश्वविद्यालयों की संख्या 400 से बढ़कर 1100 के पार जा चुकी है। कभी हर तकनीक के लिए आयात परनिर्भर रहने वाला भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता देश है।रक्षा क्षेत्र में भारत आज ब्रह्मोस और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत 38 हजार करोड़रुपये से अधिक के रक्षा उपकरणों का निर्यात कर रहा है। कोरोना काल में भारत नेविदेशी टीकों का इंतजार करने के बजाय अपने वैज्ञानिकों पर भरोसा किया और स्वदेशीवैक्सीन बनाकर दुनिया को भी दी। मोदी सरकार ने केवल इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बदला, बल्कि देश की सोच बदली है। कल तक जिन सीमावर्तीगांवों को भारत का ‘अंतिम गांव’ मानकर उनकेविकास की उपेक्षा की जाती थी, आज उन्हें भारत का ‘प्रथम गांव’ मानकर उनकी सुरक्षा और प्रगति सुनिश्चित की जा रहीहै। एक समय जिन सैनिकों को अपमान का घूंट पीना पड़ता था, आज सर्जिकल स्ट्राइक और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए उनका शौर्य पूरी दुनिया देख रही है। ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ जैसी योजनाओं ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित किया है। जैसे मेरठ, जिसे कभी माफियाओं का केंद्र माना जाता था, आज क्रिकेट बैट और हॉकी स्टिक के निर्माण के लिए जानाजा रहा है।नवीन ने कहा कि आज का भारतीय युवा अब नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बन गया है। देश में 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स और वैश्विक स्तर पर नेतृत्वकर रहे यूनिकॉर्न्स इस बात का प्रमाण हैं। भाजपा सरकार अंत्योदय के तहत आखिरीव्यक्ति तक लाभ और विकास पहुंचाने का कार्य कर रही है। आज 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन, 12 करोड़ माताओं-बहनों को सम्मानजनक जीवन देने के लिए शौचालय और 3 करोड़ ‘लखपति दीदी’ को स्वावलंबी बनाने का अभूतपूर्व कार्य हो रहा है। नवीन ने सभी छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि वे भारत के स्पेस, इनोवेशन और विकास की इस ऐतिहासिक यात्रा से स्वयं कोजोड़ें और अपनी ऊर्जा से देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएं।
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